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Women Reservation: 16 अप्रैल को महिलाओं के लिए होने वाला है कुछ बड़ा, अपने लेख में पीएम मोदी ने किया बड़ा खुलासा

PM Modi on Women Reservation: महिला आरक्षण बिल पर संसद से लेकर सड़क तक बहस हो रही है. इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख के जरिए देश को समझाया कि महिला आरक्षण बिल की ज़रूरत क्यों है. उन्होंने कहा कि संसद के इस फ़ैसले से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी मज़बूत होगी और लोकसभा और विधानसभाओं में उनकी सही जगह पक्की होगी.

PM Modi on Women Reservation:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर एक आर्टिकल में महिला रिज़र्वेशन पर अपने विचार शेयर किए हैं. PM मोदी ने कहा कि लेजिस्लेटिव बॉडीज़ में महिलाओं के लिए रिज़र्वेशन समय की ज़रूरत है. इससे हमारा डेमोक्रेसी और ज़्यादा वाइब्रेंट और पार्टिसिपेटरी बनेगा. इस रिज़र्वेशन को लागू करने में कोई भी देरी बहुत बुरा होगा. मैंने इस आर्टिकल में इस पर अपने विचार शेयर किए हैं.

पीएम मोदी का लेख

21वीं सदी की विकास यात्रा में हमारा भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर आगे बढ़ रहा है. आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत करने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनने वाले हैं. यह ऐसा अवसर है, जब समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता एक नए रूप में सामने आएगी. यह ऐसा समय है, जब हमारे देश की संसद को एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाना है. उसे ऐसा कदम आगे बढ़ाना है, जो हमारे लोकतंत्र को अधिक व्यापक एवं और अधिक प्रतिनिधिक बनाए. संसद का यह निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई शक्ति देगा और लोकसभा और विधानसभाओं संस्थाओं में उनका उचित स्थान सुनिश्चित करेगा.

यह क्षण इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह ऐसे समय में आ रहा है जब देश का वातावरण उत्सव, नवीनता और सकारात्मकता से भरा हुआ है. आने वाले दिनों में भारत के अलग अलग हिस्सों में अनेक पर्व मनाए जाएंगे. असम के लोग रोंगाली बिहू मनाने वाले हैं, और ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति का उत्सव मनाया जाएगा. पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख के साथ बंगाली नववर्ष की शुरुआत होगी. केरलम में विषु पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा. तमिलनाडु के लोग उत्सुकता से पुथांडु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोगों को बैसाखी के पर्व का इंतजार है. हमारे ये पावन पर्व हर किसी में एक नई आशा का संचार करने वाले हैं. भारत के साथ-साथ दुनियाभर में इन त्योहारों को मनाने वाले सभी लोगों को मैं हृदय से शुभकामनाएं देता हूं. मैं ये कामना करता हूं कि ये दिव्य और पावन अवसर हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएं.

इसी दौरान 11 अप्रैल से महात्मा फुले की 200वीं जयंती के समारोह भी शुरू होंगे. 14 अप्रैल को हम भारतवासी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाएंगे. ये दोनों तिथियां हमें सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के उन मूल्यों की भी याद दिलाती हैं, जिन्होंने आधुनिक होते भारत की दिशा तय की हैं.

16 अप्रैल को ऐतिहासिक बैठक

इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी. महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है. इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा. यह भारतवर्ष की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है.

हमारी नारीशक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है. आज देश के हर सेक्टर में नारीशक्ति मिसाल बन रही है. साइंस एंड टेक्नोलॉजी से लेकर एंटरप्रेन्योरशिप तक, खेल के मैदान से लेकर सशस्त्र बलों तक और संगीत से लेकर कला के क्षेत्र में महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं. हमारी माताएं-बहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं.

हमारे पारंपरिक मूल्य बताते हैं कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब माताओं-बहनों को आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा मौके मिलते हैं. इसी सोच के साथ बीते 11 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है, इसके लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं. शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती दी है.

लेकिन ये भी सच्चाई है कि इन सारे प्रयासों के बावजूद भी राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है. इस कमी को अब दूर किया जाना चाहिए क्योंकि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं तो उनका अनुभव और विजन बहुत काम आता है. इससे चर्चा तो समृद्ध होती ही है  क्वालिटी ऑफ गवर्नेंस में सुधार भी होता है. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है ये हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, अधिक संतुलित और अधिक उत्तरदायी बनाने का प्रयास है.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम

पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए बार-बार प्रयास हुए हैं. समितियां गठित की गईं, विधेयकों के मसौदे प्रस्तुत किए गए, लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके. फिर भी, इस बात पर व्यापक सहमति रही है कि विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए. सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था. यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा है. अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं.

महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर हमारे संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है. हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए. विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना, उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है. यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में प्रत्येक नागरिक की समान भूमिका हो.

अब इस निर्णय को और टाला नहीं जा सकता. दशकों से इसकी आवश्यकता को स्वीकार किया गया है. इस पर चर्चा हुई है, इसे बार बार दोहराया गया है. अगर अब भी हम इसे आगे टालते हैं, तो उसका अर्थ यही होगा कि हम उस असंतुलन को और लंबा खींच रहे हैं, जिसे हम पहचानते भी हैं और सुधारने की क्षमता भी रखते हैं. आज भारत पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. इसलिए ये जरूरी है कि हमारी संस्थाएं सभी नागरिकों, विशेष रूप से हमारी आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें. इससे न सिर्फ दशकों पुराना संकल्प पूरा होगा, बल्कि विकास की गति को बनाए रखने में भी बहुत मदद मिलेगी. यह हमारे लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाने और भविष्य के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम होगा.

यह समय सामूहिक संकल्प का है. यह किसी एक सरकार, एक दल या एक व्यक्ति का विषय नहीं है. यह पूरे राष्ट्र का विषय है. हमें मिलकर इस कदम के महत्व को समझना है और मिलकर ही इसे साकार करना है. यही हमारी नारी शक्ति के प्रति हमारा दायित्व भी है, इसलिए महिला आरक्षण बिल को पारित कराने के लिए सहमति बहुत जरूरी है. इसे बड़े राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए. ऐसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि कुछ फैसले अपने समय से बड़े होते हैं. वे आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं. ये हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की असली ताकत समय के साथ खुद को और अधिक न्यायपूर्ण और अधिक समावेशी बनाने की क्षमता में होती है.

संसद का यह ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है. मैं सभी दलों के सांसदों से हमारी नारीशक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं. हम जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करें. आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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