यूजीसी एक्ट 2026 (UGC Act 2026) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. ऐसे में कई संगठनों (Many Organizations) ने इस नए कानून की जमकर आलोचना की है.
What is UGC Act 2026/ Picture Source: Amar Ujala
What is UGC Act 2026: यूजीसी एक्ट 2026 का मुख्य उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह से खत्म करना है. जिसमें पहली बार ओबीसी वर्ग को भी सुरक्षा दी गई है. लेकिन, अगड़ी जातियां (Forwad Caste) इसे अपने हितों के खिलाफ और कानून के दुरुपयोग के रूप में फिलहाल देख रही है.
दरअसल, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को विशेष रूप से बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘यूजीसी 2026’ को लाया गया है. तो वहीं, दूसरी तरफ ‘यूजीसी 2026’ को लेकर पूरे देशभर में इसकी जमकर चर्चा भी की जा रही है. 15 जनवरी 2026 से लागू हुए इस कानून ने न सिर्फ शैक्षणिक जगत (Academic World) में, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी पूरी तरह से हलचल पैदा कर दी है. आइए जानते हैं नए यूजीसी रेगुलेशन 2026 के बारे में.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किया गया यह नया कानून शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करने के लिए बनाया गया है
सबसे पहले जातिगत भेदभाव की रोकथाम मुख्य रूप से एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग तक केंद्रित थी, लेकिन अब इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी पूरी तरह से शामिल कर लिया गया है. अगर किसी संस्थान में किसी छात्र या फिर किसी भी तरह के कर्मचारी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता है, तो इस कानून के खिलाफ उस व्यक्ति पर पूरी तरह से कार्रवाई की जाएगी.
हर विश्वविद्यालय और कॉलेज को मुख्य रूप से एक ऐसी सेल बनानी होगी जिसमें भेदभाव की शिकायतों का पूरी तरह से समाधान किया जाएगा. तो वहीं, संस्थान के प्रमुख को यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसर में किसी भी समुदाय (SC/ST/OBC) के प्रति अपमानजनक टिप्पणी या फिर व्यवहार न देखने को मिले.
सवर्ण समाज और उनसे जुड़े संगठनों जैसे यति नरसिंहानंद गिरि और अन्य समूह के विरोध के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं. जिसमें विरोध करने वालों का यह मानना है कि एससी/एसटी एक्ट की तरह इस रेगुलेशन का भी दुरुपयोग किया जा सकता है. इसके अलावा उन्हें डर है कि झूठी शिकायतों के आधार पर सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को ज्यादा से ज्यादा निशाना भी बनाया जा सकता है.
इतना ही नहीं, सवर्ण समाज का यह भी मानना है कि योग्यता (Merit) पर इसका गलत प्रभाव देखने को मिल सकता है. मेरिट के बजाय जातिगत समीकरणों (Caste Equations) को ज्यादा से ज्यादा महत्व दिया जाएगा.
तो वहीं, उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 के चुनाव को लेकर आलोचकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. जिसपर उनका माना है कि यह कदम एक विशेष वोट बैंक (OBC) को साधने के लिए उठाया गया है, जिससे अगड़ी जातियों में असुरक्षा के भाव को पैदा करने की कोशिश की जा सकती है.
तो वहीं, कुछ समूहों का यह मानना है कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा इतनी व्यापक है कि सामान्य चर्चाओं या अकादमिक बहस को भी इस कानून के खिलाफ किया जा सकता है.
मॉडर्न स्टार सिस्टम के उदय से बहुत पहले, एक्ट्रेस मुमताज़ 60 और 70 के दशक…
August School Holidays 2026: अगस्त 2026 में स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन और मिलाद-उन-नबी समेत कई बड़े…
हाल ही में एक्ट्रेस संभावना सेठ और उनके पति अविनाश ने एक वीडियो अपलोड किया…
Amarnath Yatra Halted: अमरनाथ यात्रा शुक्रवार के लिए कुछ समय के लिए रोक दी गई…
महराजगंज में एक घूंघट वाली बहू ने अपनी सास को बीच सड़क पर एक सेकेंड…
Malaria Mosquito Bites At Night: दिनभर बेफिक्र घूमने वाले मच्छर आखिर रात होते ही ज्यादा…