Mumbra Politics: AIMIM की पार्षद सहर शेख के पिता युनुस शेख को एकनाथ शिंदे की शिवसेना से जुड़ी केबल सेना में कलवा-मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. युनुस इसे राजनीतिक प्रवेश के बजाय केबल ऑपरेटरों से जुड़ी संस्था में मिली जिम्मेदारी बता रहे हैं. वहीं, सहर शेख और उनके पिता के OBC प्रमाणपत्रों को लेकर शिकायत भी सामने आई है. सहर के पार्षद पद पर अंतिम स्थिति जाति वैधता समिति के फैसले पर निर्भर करेगी.
सहर शेख के पिता युनुस शेख को मिली नई जिम्मेदारी
Mumbra Politics: महाराष्ट्र के मुंब्रा की राजनीति में एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है. AIMIM के टिकट पर पार्षद बनीं सहर शेख के पिता युनुस शेख को एकनाथ शिंदे की शिवसेना से जुड़ी केबल सेना में अहम जिम्मेदारी मिली है. सहर अपने ‘पूरा मुंब्रा आने वाले समय में हरा करना है’ बयान के बाद चर्चा में आई थीं. अब उनके पिता की नई जिम्मेदारी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. दूसरी ओर, सहर और युनुस के OBC प्रमाणपत्रों को लेकर भी विवाद चल रहा है.
ठाणे महानगरपालिका चुनाव के बाद चर्चा में आए सहर शेख के परिवार से जुड़ा नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. युनुस शेख को शिवसेना के ठाणे के पदाधिकारियों ने पार्टी से जुड़ी केबल सेना में शामिल कर कलवा मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र के केबल ऑपरेटरों का अध्यक्ष बनाया है. नियुक्ति पत्र में इस जिम्मेदारी को एकनाथ शिंदे के आदेश से दिए जाने का उल्लेख होने की बात सामने आई है. इस घटनाक्रम की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि युनुस शेख की बेटी सहर शेख AIMIM के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं. ऐसे में शिंदे की शिवसेना से जुड़ी इकाई में युनुस को जिम्मेदारी मिलना मुंब्रा के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया है.
शिवसेना से जुड़ी इकाई में पद मिलने की खबर सामने आने के बाद युनुस शेख ने इसे राजनीतिक प्रवेश मानने से इनकार किया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें केबल ऑपरेटरों से जुड़ी संस्था में जिम्मेदारी दी गई है. उनके मुताबिक, वह पिछले 40 साल से केबल ऑपरेटर के तौर पर कारोबार कर रहे हैं. युनुस शेख ने बताया कि अखिल भारतीय केबल सेना केबल ऑपरेटरों के हितों के लिए काम करती है और इसी संस्था के तहत उन्हें कलवा मुंब्रा क्षेत्र की जिम्मेदारी मिली है. उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे के काम को देखकर अलग अलग क्षेत्रों के नेता शिवसेना में शामिल हो रहे हैं. साथ ही, उन्होंने टिप्पणी की कि शिवसेना को मजबूत करने के लिए उनकी जरूरत नहीं है. हालांकि, युनुस इसे पेशे से जुड़ी जिम्मेदारी बता रहे हैं, लेकिन शिवसेना से संबद्ध इकाई में पद मिलने के कारण उनके इस कदम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं.
युनुस शेख पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जितेंद्र आव्हाड के साथ काम कर चुके हैं. पिछले महानगरपालिका चुनाव में उनकी बेटी सहर शेख को NCP से टिकट नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने सहर को AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ाने का फैसला किया. सहर ने मुंब्रा के वार्ड नंबर 30 से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. उनकी जीत के बाद आयोजित जनसभा में उन्होंने जितेंद्र आव्हाड पर निशाना साधा था. जिस वार्ड से सहर पार्षद चुनी गईं, वहां शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था. इसी नतीजे पर सहर ने ‘कैसा हराया’ कहकर आव्हाड पर तंज कसा था. इसके बाद सहर का ‘पूरा मुंब्रा आने वाले समय में हरा करना है’ बयान भी सुर्खियों में आया. अब उनके पिता को शिंदे की शिवसेना से जुड़ी इकाई में जिम्मेदारी मिलने के बाद परिवार की राजनीतिक गतिविधियों पर फिर चर्चा हो रही है.
सहर शेख के राजनीतिक सफर के बीच उनके OBC प्रमाणपत्र को लेकर भी विवाद सामने आया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार गुट की कार्यकर्ता सिद्दीकी फराह शबाब अहमद ने सहर शेख और उनके पिता युनुस शेख के OBC प्रमाणपत्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के लिए सरकारी व्यवस्था को गुमराह कर गलत तरीके से OBC प्रमाणपत्र हासिल किए गए. प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं. ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन्हें अंतिम रूप से साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता. दी गई जानकारी के मुताबिक, ठाणे के तहसीलदार की जांच में प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान कुछ प्रक्रियागत अनियमितताओं की बात सामने आई. सहर और युनुस के कई वर्षों से ठाणे में रहने के बावजूद मुंबई शहर कलेक्ट्रेट से OBC प्रमाणपत्र हासिल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं.
इस मामले में सहर शेख का OBC प्रमाणपत्र रद्द करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाने की सिफारिश किए जाने की बात सामने आई है. फिलहाल प्रमाणपत्र से जुड़ा मामला जाति वैधता समिति के सामने है. सहर का पार्षद पद बना रहेगा या नहीं, इस पर अंतिम स्थिति संबंधित प्रक्रिया और समिति के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी. एक तरफ सहर शेख के प्रमाणपत्र को लेकर विवाद जारी है, तो दूसरी ओर उनके पिता युनुस शेख को शिंदे की शिवसेना से जुड़ी इकाई में जिम्मेदारी मिली है. युनुस इसे केबल ऑपरेटरों से जुड़ा पद बता रहे हैं, जबकि इस घटनाक्रम को मुंब्रा के बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. फिलहाल, दोनों मामलों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है.
MP Electricity Supply: मध्य प्रदेश में बिजली की कमी के कारण ग्रामीणों की मुसीबत बढ़…
Kasganj News: उत्तर प्रदेश के कासगंज में आकाशीय बिजली गिरने से मां-बेटी समेत तीन लोगों…
Pratapgarh murder: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में 45 वर्षीय बर्तन विक्रेता उमाशंकर उर्फ गुड्डू का…
Delhi Murder Case: दिल्ली में स्कूल यूनिफॉर्म के जूतों को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद…
young man Climbed The Tower: बिहार के कैमूर जिले में दुर्गावती के डिडखीली गांव के…
SIR dispute: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने…