Sahar Shaikh Caste Certificate Case: मुंब्रा के प्रभाग क्रमांक 30 से चुनी गई पार्षद सहर शेख जाति प्रमाणपत्र के मुद्दे पर घिर गई हैं. उनका पार्षद का पद भी खतरे में पड़ सकता है.
Sahar Shaikh Caste Certificate Case: सहर शेख खुद फंसीं अपने बुने जाल में!
Sahar Shaikh Caste Certificate Case: ठाणे ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा धमाका हुआ है. महाराष्ट्र के ठाणे मुंब्रा की चर्चित और सोशल मीडिया पर ‘कैसा हराया’ वाले डायलॉग से वायरल हुई पार्षद सहर शेख अब जाति प्रमाणपत्र के विवाद में घिर गई हैं. सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद की ओर से सहर शेख पर आरोप लगाया गया है कि उनके पिता यूनुस इकबाल शेख ने फर्जी OBC जाति प्रमाणपत्र बनवाए. इसके चलते AIMIM की पार्षद सहर शेख अब एक बड़े विवाद में घिर गई हैं. जांच में आरोप सही पाए गए तो पार्षद पद भी जा सकता है. बता दें कि सहर शेख मुंब्रा के प्रभाग क्रमांक 30 से चुनी गई हैं. इस मामले को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) से जुड़े जावेद सिद्दीकी ने भी कई गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया है कि सहर शेख का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का. ऐसे में वैध जाति प्रमाणपत्र मिलने की अनुमति नहीं थी.
मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, मुंबई शहर जिला अधिकारी कार्यालय से सहर शेख ने जाति प्रमाणपत्र हासिल किया था. ताजा आरोप यह है कि इस प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों को गुमराह किया गया. हो सकती है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह जाति प्रमाणपत्र बनाया गया है. तहसीलदार कार्यालय ठाणे द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, जांच में कई गंभीर खामियों का खुलासा हुआ है.
जांच में सामने आया है कि जाति प्रमाणपत्र के मामले कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं. सबसे बड़ी और अहम बात यह है कि निर्धारित सरकारी प्रारूप के अनुसार जाति प्रमाणपत्र नहीं पाया गया. इसके अलावा पढ़ाई के दस्तावेजों में स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में नाम, जन्मस्थान और विवरण में काफी अंतर है.
परिवार का मूल निवास उत्तर प्रदेश (गाजियाबाद) है, जो सर्टिफिकेट में हैं, लेकिन OBC प्रमाणपत्र महाराष्ट्र से लिया गया. सबसे बड़ी और अहम सबूत यह है कि उन्होंने खुद बयान दे दिया कि देखा कैसे हराया.
इससे यही जाहिर होता है कि जाति प्रमाणपत्र हासिल करने में कई तरह की गड़बड़ियां हुई हैं. इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने की सिफारिश की गई है. अगर जांच में जाति प्रमाणपत्र के लिए दी गई जानकारी झूठी और गलत पाई जाती है तो सहर शेख का पार्षद पद चला जाएगा.
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