<
Categories: विदेश

जब गाड़ी चलाने पर भी सरकार ने लगा दिया था बैन, क्या है 1973 तेल संकट? जिसकी की जा रही है होर्मुज तनाव से तुलना

1973 Oil Crisis: पश्चिमी देशों द्वारा इजरायल का समर्थन किए जाने के जवाब में अरब तेल उत्पादक देशों ने तेल को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का फैसला किया.

1973 Oil Crisis: अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकले वाले जहाजों की हालत में भारी गिरावट आई है. जिसकी वजह से दुनिया का तेल बाजार इस समय एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. विशेषज्ञ इसे 1973 तेल संकट से भी बड़ा संकट बता रहे हैं. उस समय मध्य-पूर्व के तेल उत्पादक देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और कुछ अन्य देशों को तेल देना बंद कर दिया था, क्योंकि उन्होंने इजराइल का समर्थन किया था. यह फैसला योम किप्पुर युद्ध के दौरान लिया गया था.

क्या है 1973 तेल संकट

1973 का तेल संकट भी एक बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष से जुड़ा था. यह संकट योम किप्पुर युद्ध के दौरान पैदा हुआ था जो 6 अक्टूबर 1973 को शुरू हुआ और लगभग तीन सप्ताह तक चला. इस युद्ध में मिस्र और सीरिया के नेतृत्व में अरब देशों ने इजरायल पर अचानक हमला कर दिया. उनका उद्देश्य उन क्षेत्रों को वापस हासिल करना था जिन्हें इजरायल ने 1967 के छह दिवसीय युद्ध में कब्ज़ा कर लिया था. इनमें मिस्र का सिनाई प्रायद्वीप और सीरिया का गोलान हाइट्स शामिल थे. इस युद्ध में वैश्विक शक्तियां भी शामिल हो गईं. संयुक्त राज्य अमेरिका ने इजरायल को सैन्य समर्थन दिया, जबकि सोवियत संघ ने मिस्र और सीरिया का साथ दिया.

इजरायल समर्थक देशों के खिलाफ तेल निर्यात पर प्रतिबंध

पश्चिमी देशों द्वारा इजरायल का समर्थन किए जाने के जवाब में अरब तेल उत्पादक देशों ने तेल को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का फैसला किया. 17 अक्टूबर 1973 को अरब पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन के सदस्य देशों ने उन देशों के खिलाफ तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जिन्हें इजरायल का समर्थक माना जाता था. इन देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, जापान और कनाडा शामिल थे. इसके साथ ही अरब देशों ने तेल उत्पादन में भी कटौती शुरू कर दी और हर महीने लगभग 5 प्रतिशत उत्पादन कम किया जाने लगा, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति तेजी से घटने लगी.

तेल पर निर्भर हो चुकी थी दुनिया की अर्थव्यवस्था

1970 के दशक की शुरुआत तक दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल पर निर्भर हो चुकी थी. उद्योग, परिवहन, बिजली उत्पादन और कृषि जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र तेल पर आधारित थे. इसी दौरान 1960 में बना तेल उत्पादक देशों का संगठन पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) इतना प्रभावशाली हो चुका था कि वह वैश्विक तेल उत्पादन और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता था. जब अरब देशों ने तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया और उत्पादन घटाया तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा.

चार गुना बढ़ गईं थी तेल की कीमत

तेल की कीमतें कुछ ही महीनों में लगभग चार गुना बढ़ गईं. कीमत लगभग 3 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, उद्योग, खेती और बिजली उत्पादन की लागत तेजी से बढ़ने लगी. इसका असर पूरी दुनिया में महसूस किया गया. यूनाइटेड स्टेट्स में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने वाली इकाइयां और कई जगह पेट्रोल की कमी हो गई. सरकार को ईंधन की राशनिंग, पेट्रोल पंपों के सीमित समय और हाईवे पर स्पीड लिमिट कम करने जैसे आवश्यकता कदम उठाने पड़े. यूरोप के कई देशों ने भी ऊर्जा बचाने के लिए सख्त नीतियां लागू कीं, जिनमें कुछ दिनों तक गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक और बिजली की खपत सीमित करना शामिल था. इस स्थिति को अर्थशास्त्र में “स्टैगफ्लेशन” कहा जाता है जब महंगाई बढ़ती है लेकिन आर्थिक विकास कमजोर हो जाता है. 1970 के दशक के मध्य तक कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई.

1974 में तेल प्रतिबंध खत्म

आखिरकार कूटनीतिक प्रयासों के बाद मार्च 1974 में तेल प्रतिबंध खत्म कर दिया गया. हालांकि यह संकट समाप्त हो गया, लेकिन इसका असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बना रहा. इसके बाद कई देशों ने तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने शुरू किए.

क्यों किया जा रहा है 1973 तेल संकट से तुलना?

यूएस एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम लिक्विड होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रते हैं. यह दुनिया भर में तेल की खपत का लगभग 20 प्रतिशत और दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक चौथाई से ज़्यादा है. इनमें से ज़्यादातर शिपमेंट एशिया के लिए होते हैं जिसमें चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया का हिस्सा एक बड़ा हिस्सा है. ये सब मिलकर स्ट्रेट से गुजरने वाले आधे से ज़्यादा कच्चे तेल की खपत करते हैं. किसी भी लंबे समय तक रुकावट का इन अर्थव्यवस्थाओं पर बड़ा असर पड़ेगा.मार्केट न्यूजलेटर, द कोबेसी लेटर के एक वायरल चार्ट में चेतावनी दी गई थी कि पूरी तरह से रुकावट इतिहास का सबसे बड़ा तेल झटका दे सकती है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस अनुमान ने दुनिया भर के ट्रेडिंग डेस्क को सकते में डाल दिया है.

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत अपनी क्रूड ऑयल की जरूरत का लगभग 85% हिस्सा इम्पोर्ट करता है. इसलिए, इसकी इकॉनमी ग्लोबल प्राइस स्विंग के प्रति खास तौर पर सेंसिटिव है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार ऑयल प्राइस में 10% की बढ़ोतरी से इन्फ्लेशन हो सकती है. शॉर्ट-टर्म ग्रोथ धीमी होने का डर है. एक छोटी सी रुकावट भी प्राइस में तेजी से बढ़ोतरी कर सकती है, जिसका असर फिस्कल बैलेंस और फाइनेंशियल मार्केट दोनों पर पड़ सकता है.

स्ट्रक्चरल कमजोरी साफ है. दुनिया की ऑयल सप्लाई का पांचवां हिस्सा एक ही पतले कॉरिडोर से होकर गुज़रता है जिसमें बहुत कम रिडंडेंसी है. ट्रेडर्स को अब न केवल रिस्क एक्सपोज़र के बारे में, बल्कि इस बारे में भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कब तक खुला रहेगा. ऑयल प्राइस की आखिरी लिमिट कहां हो सकती है?

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

Watch Video: 31 अक्टूबर को MS Dhoni ने ऐसा क्या किया था? जिसे याद कर आज भी थरथराते हैं गेंदबाज; 21 साल बाद भी कायम है वर्ल्ड रिकॉर्ड

MS Dhoni: 31 अक्टूबर 2005 को महेंद्र सिंह धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में…

Last Updated: October 31, 2026 13:53:59 IST

Delhi New Traffic Rules 2026: 1 नवंबर से दिल्ली में लागू होंगे नए नियम, किन गाड़ियों को मिलेगी एंट्री और किसे नहीं?

Delhi Pollution Rules: दिल्ली में 1 नवंबर 2026 से सर्दियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने…

Last Updated: October 31, 2026 13:45:38 IST

Caught on Camera: ‘मैडम गाड़ी रोको…’, कहता रहा पुलिसवाला, महिला ने नहीं सुनी एक भी बात; मुंबई का VIDEO देख रह जाएंगे हैरान

Caught on Camera: मुंबई पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे संगीत…

Last Updated: October 31, 2026 13:40:52 IST

IND VS NZ ODI: न्यूजीलैंड पहुंचते ही रोहित-विराट ने शुरू की तैयारी, कब दिखेगा रोको का जलवा? देखें पूरा शेड्यूल

IND VS NZ ODI: BCCI ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ वनडे सीरीज़ के लिए टीम में…

Last Updated: October 31, 2026 13:34:00 IST

Sanjay Gupta Death Reason: बाथरूम में ऐसा क्या हुआ? चली गई संजय गुप्ता जान; बॉलीवुड में पसरा मातम

Sanjay Gupta Death Reason: खबर है कि फिल्ममेकर कल रात अपने बाथरूम में गिर गए और…

Last Updated: October 31, 2026 13:17:32 IST

IND vs NZ 5th T20I Live Streaming: भारत-न्यूजीलैंड का आखिरी टी20 कब और कहां देखें? जानें पूरा शेड्यूल

India vs New Zealand 5th T20I 2026 का मुकाबला 1 नवंबर को हैमिल्टन में खेला…

Last Updated: October 31, 2026 13:03:12 IST