India News (इंडिया न्यूज), Canada: कनाडा के पीएम भारत के खिलाफ बयान को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। अब ट्रूडो ‘स्वस्तिक’ विवाद को लेकर चर्चा में आए हैं। उन्होने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर उन्होंने कह दिया कि ऐसे नफरत बढ़ाने वाले प्रतीक को वे संसद में दिखाने की इजाजत नहीं दे सकते। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के चिह्न पर कनाडा की सरकार बैन लगाने की फिराक में है।
When we see or hear hateful language and imagery, we must condemn it. The display of a swastika by an individual on Parliament Hill is unacceptable. Canadians have the right to assemble peacefully – but we cannot tolerate antisemitism, Islamophobia, or hate of any kind.
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swastika vs hakenkreuz
— Justin Trudeau (@JustinTrudeau) November 5, 2023
बता दें इस मामले को लेकर विधेयक तक लाया जा चुका है। जो अभी रुका हुआ है। लेकिन लोग इस बात से हैरान हैं कि स्वस्तिक से नफरत का या जंग का कोई लेना देना ही नहीं है। इसे हिन्दुओं में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। वहीं पश्चिम के कुछ देश इसे बार-बार नाजी जर्मनी के प्रतीक के साथ जोड़ते हैंं।
बता दें साल 2022 में कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी ने हेटफुल सिम्बॉल्स पर एक विधेयक लाने की कोशिश की। इस लिस्ट में कई ऐसे प्रतीक थे। जिन्हें मानने वाले लोग नफरत फैलाई और कई मासूम लोगों पर हिंसा की। नफरत फैलाने वाले चिह्नों में स्वस्तिक को भी रखा गया।
इसको लेकर बताया गया कि इसकी वजह से 8 लाख से ज्यादा यहूदियों की मौत हो गई। बता दें यहूदियों की हत्या की जिम्मेदार नाजी पार्टी थी। जिसका चिह्न स्वस्तिक से कुछ हद तक मिलता-जुलता है।
कहा ये भी जा रहा है कि जान-बूझकर ‘स्वस्तिक को हिटलर के नाजी पार्टी के चिह्न हकेनक्रेज से जोड़ा जा रहा है। ताकि लोगों में स्वस्तिक को लेकर भ्रम पैदा हो जाए और स्वस्तिक को लेकर लोग अलग नजरिया अपना लें। ये हिंदू-हेट बढ़ाने का भी एक तरीका है।
स्वस्तिक और हेकेनक्रेउज़ में क्या अंतर है?
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