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हिंदू समूह के दौरे पर महिला कर्मचारियों को किया गया बाहर, फ्रांस में मचा बवाल, एफिल टावर अस्थायी रूप से बंद

हिंदू समूह बीएपीएस की निजी यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को नजरों से ओझल होने के लिए कहे जाने पर एफिल टॉवर के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया. पेरिस के मेयर इमैनुअल ग्रेगोइरे ने कहा कि इस मामले की जांच जल्द ही शुरू की जाएगी.

पेरिस के एफिल टॉवर में कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी है. कर्मचारियों और प्रबंधन का कहना है कि कुछ दिन पहले एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को परिसर से ‘निकाल दिए जाने’ के आरोपों के विरोध में यह हड़ताल की गई है. 

विवाद की जड़ पिछले सप्ताह बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) से जुड़े लगभग 100 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे में है. बीएपीएस एक धार्मिक समूह है जिसके प्रतिनिधि पेरिस के बाहरी इलाके में एक मंदिर के उद्घाटन से संबंधित समारोहों के लिए फ्रांस में आए थे. 

एफिल टावर के कर्मचारी हुए नाराज

एक बयान में, एफिल टॉवर के कर्मचारियों ने प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान “उन पेशेवर निर्देशों की निंदा की, जिनके कारण महिला कर्मचारियों को उनके लिंग के आधार पर दरकिनार कर दिया गया, उनकी जगह किसी और को रख दिया गया और उन्हें अनदेखा कर दिया गया.”

“एफिल टावर की महिला कर्मचारियों और ठेकेदारों की महिला कर्मचारियों को इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए खुद को अदृश्य करने के निर्देश दिए गए थे,” कर्मचारियों ने अपने बयान में कहा, और यह भी कहा कि वे ऐसी स्थिति में डाले जाने से स्तब्ध थे. कुछ कर्मचारियों को अपने पद छोड़कर अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए कहा गया. कुछ पदों पर उनकी जगह पुरुषों को नियुक्त किया गया. और सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति में वे कुछ निश्चित क्षेत्रों से न गुजरें या उन्हें पार न करें.

‘हिंदू समूह का अनुरोध’

पेरिस के इस ऐतिहासिक स्थल का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने स्वीकार किया कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया था कि यात्रा को “महिलाओं के साथ बातचीत को सीमित करने” के लिए आयोजित किया जाए और कहा कि “इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था.”

कंपनी ने कहा कि ये स्थितियां “एसईटीई के मूल्यों और पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं,” और उसने “परिणामों” को स्वीकार करने का वादा किया. SETE के प्रेसिडेंट एरियल वेल ने समाचार एजेंसी AFP से कहा, “यह निश्चित रूप से स्वीकार्य व्यवहार नहीं है. मैं रिपब्लिकन मूल्यों और स्त्री-पुरुष समानता के प्रति एफिल टॉवर की प्रतिबद्धता को दोहराता हूं.” एरियल वेल पेरिस में एक चुने हुए समाजवादी अधिकारी भी हैं.

BAPS क्या है?

इसकी वेबसाइट के अनुसार, BAPS एक आध्यात्मिक और स्वयंसेवकों द्वारा चलाया जाने वाला संगठन है. यह “आस्था, सेवा और वैश्विक सद्भाव जैसे हिंदू मूल्यों को बढ़ावा देकर व्यक्तिगत विकास के माध्यम से समाज को बेहतर बनाने” के लिए समर्पित है. यह भारत में एक रजिस्टर्ड चैरिटेबल ट्रस्ट है और संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद के साथ सलाहकार का दर्जा रखने वाला एक NGO है.

एक सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन के तौर पर, यह समूह कई तरह के काम करता है, जैसे मानवीय सेवाएँ और अलग-अलग देशों में मंदिर बनाना.

BAPS का जवाब

पेरिस के पास रविवार को फ्रांस में अपना पहला बड़ा मंदिर बनाने वाले हिंदू संगठन ने विरोध के बाद एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि वे उठाई गई चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं. बयान में कहा गया, “हमारे दल के आकार को देखते हुए, यह दौरा एफिल टॉवर की टीमों के साथ तालमेल बिठाकर सामान्य खुलने के समय की शुरुआत में आयोजित किया गया था, ताकि दूसरे पर्यटकों को कम से कम परेशानी हो. हमारी जानकारी के मुताबिक, किसी भी समय किसी को भी एफिल टॉवर में जाने से नहीं रोका गया.”

फ्रांस की प्रतिक्रिया

पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने कहा कि “जितनी जल्दी हो सके” मामले की जांच शुरू की जाएगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि उन्हें कर्मचारियों के गुस्से के बारे में पता है और वे मानते हैं कि उनकी नाराजगी जायज है. ग्रेगोइरे ने लिखा, “यह बहुत ज़रूरी है कि इस विरोध की वजह बनी बातों का सच सामने आए.”

फ्रांस की समानता मंत्री ऑरोर बर्गे ने भी X पर गुस्से में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा, “फ्रांस में हम महिलाओं से खुद को मिटाने के लिए नहीं कहते. कोई भी मान्यता या धर्म देश के कानूनों से ऊपर नहीं है.”

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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