Strait Of Hormuz Rules: एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर ईरान ने कहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज' भारत के लिए खुला रहेगा. यह जलमार्ग, जो फारसी खाड़ी का एक संकरा मुहाना है और जिससे आम तौर पर दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल जहाजों से भेजा जाता है, पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ़ युद्ध छेड़े जाने के बाद से ईरान के नियंत्रण में है. ईरानी सरकारी टीवी से बात करते हुए विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि पश्चिमी मीडिया के दावों के विपरीत यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद नहीं है.
स्ट्रेट होर्मुज रुल्स
Strait Of Hormuz Rules: एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर ईरान ने कहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ भारत के लिए खुला रहेगा. यह जलमार्ग, जो फारसी खाड़ी का एक संकरा मुहाना है और जिससे आम तौर पर दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल जहाजों से भेजा जाता है, पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ़ युद्ध छेड़े जाने के बाद से ईरान के नियंत्रण में है. ईरानी सरकारी टीवी से बात करते हुए विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि पश्चिमी मीडिया के दावों के विपरीत यह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पूरी तरह से बंद नहीं है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि कई जहाज मालिकों या उन देशों ने जिनके ये जहाज़ हैं, हमसे संपर्क किया है और अनुरोध किया है कि हम इस जलडमरूमध्य से उनके सुरक्षित गुजरने की व्यवस्था करें. इनमें से कुछ देशों के लिए जिन्हें हम मित्र मानते हैं, या ऐसे मामलों में जहां हमने अन्य कारणों से ऐसा करने का फ़ैसला किया है, हमारी सेनाओं ने सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है. उन्होंने आगे कहा कि Dena जहाज की घटना में जिस पर बिना किसी चेतावनी के अन्यायपूर्ण तरीके से हमला किया गया था, मैं श्रीलंका और भारत को दो अन्य जहाजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने में उनकी अहम मदद के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा.
उन्होंने आगे कहा कि आपने खबरों में देखा होगा कि चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक़ और भारत. कुछ रात पहले इनके दो जहाज यहां से गुज़रे थे और कुछ अन्य देशों के भी जहाजों को जाने दिया गया. मेरा मानना है कि बांग्लादेश को भी अनुमति दी गई. ये वे देश हैं जिन्होंने हमसे बात की और हमारे साथ तालमेल बिठाया और यह भविष्य में भी जारी रहेगा, यहां तक कि युद्ध के बाद भी.
अराघची ने यह भी संकेत दिया कि जिन देशों को विरोधी माना जाता है या जो मौजूदा संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका, इज़राइल और कुछ खाड़ी देशों के जहाज़ों को जो मौजूदा संकट में भूमिका निभा रहे हैं, इस जलडमरूमध्य से गुजरने की मंज़ूरी नहीं दी जाएगी. उन्होंने बुधवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हम युद्ध की स्थिति में हैं. यह क्षेत्र एक युद्ध क्षेत्र है और हमारे दुश्मनों तथा उनके सहयोगियों के जहाजों को यहां से गुजरने देने का कोई कारण नहीं है. लेकिन यह दूसरों के लिए खुला रहेगा. ग़ौरतलब है कि इसी हफ्ते की शुरुआत में ईरान ने पाकिस्तान जा रहे एक कंटेनर जहाज़ को ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ पार करने से रोक दिया था. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, ‘सेलेन’ (SELEN) नामक यह जहाज जो संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह बंदरगाह से कराची की ओर जा रहा था, महत्वपूर्ण जलमार्ग के प्रवेश द्वार पर पहुंचने पर पारगमन अनुमति (transit authorisation) न होने के कारण अपना रास्ता बदलने पर मजबूर हो गया.
ईरान जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के ज़रिए जलडमरूमध्य (Strait) पर अपना दबदबा बनाए हुए है. दुनिया के पांचवें हिस्से के तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई का रास्ता लगभग बंद हो जाने से पूरी दुनिया में ईंधन की कमी हो रही है. एयरलाइंस से लेकर सुपरमार्केट और पुरानी कार बेचने वालों तक सभी तरह के कारोबार बढ़ती लागत, घटती मांग और सप्लाई चेन में रुकावट जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. कुछ सरकारें ऐसे राहत उपायों पर विचार कर रही हैं, जिनका इस्तेमाल आखिरी बार COVID महामारी के दौरान किया गया था.
यह युद्ध, जो अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर बमबारी से शुरू हुआ था, उसने तेहरान को पूरे इलाके में जवाबी हमले करने और जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) तक पहुंच को सख्ती से सीमित करने के लिए उकसाया. इसके चलते इन अहम जलमार्गों से रोज़ाना होने वाली ऊर्जा की शिपिंग में 95 फ़ीसदी की भारी गिरावट आ गई. शिपिंग इंडस्ट्री की जानकारी देने वाली साइट ‘लॉयड्स लिस्ट’ के मुताबिक, इस जलमार्ग से आम तौर पर रोज़ाना करीब 120 जहाज गुजरते हैं. हालांकि, एनालिटिक्स फ़र्म ‘Kpler’ के आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 25 मार्च के बीच मालवाहक जहाज़ों ने सिर्फ़ 155 बार ही इस रास्ते को पार किया जो कि 95 फ़ीसदी की गिरावट है. इनमें से 99 जहाज तेल के टैंकर और गैस ले जाने वाले जहाज़ थे और इनमें से ज्यादातर जहाज जलडमरूमध्य से निकलकर पूरब की ओर जा रहे थे. बुधवार को इस होर्मुज को पार करते हुए सिर्फ़ दो जहाज देखे गए और वे दोनों ही पश्चिम की ओर जा रहे थे.
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