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इस देश में कौओं को मिल रही ग्रुप डी की नौकरी,सैलरी सुन चौंक जाएंगे आप

Corvid Cleaning: साइंटिस्ट मानते हैं कि पक्षियों का कोर्विड परिवार (जिसमें कौवे और मैगपाई शामिल हैं) दुनिया के सबसे समझदार जीवों में से एक है. उनकी सीखने की क्षमता 7 साल के बच्चे जितनी होती है. वे एक-दूसरे को देखकर काम जल्दी सीखते हैं. वे लेन-देन के सिस्टम को बहुत अच्छी तरह समझते हैं.

Sweden Crows Cleaning Experiment: सड़कों पर बिखरे कचरे को ठीक करने के लिए स्वीडन के सोडरटेलजे शहर ने एक अनोखा एक्सपेरिमेंट शुरू किया है. इस काम के लिए कौओं को ट्रेन किया जाता है. आपने अक्सर कौओं को चालाकी से खाना चुराते या कचरे में खोजबीन करते देखा होगा लेकिन स्वीडन के सोडरटेलजे शहर में अब कौए क्लीनर का काम कर रहे हैं. इन पक्षियों को सड़कों पर पड़े सिगरेट के टुकड़े उठाने की ट्रेनिंग दी जाती है जिसके बदले में उन्हें खास मशीनों से खाना खिलाया जाता है.

कौओं की साइकोलॉजी पर काम करती है मशीन

इस पूरे प्रोसेस के पीछे कोर्विड क्लीनिंग नाम का एक स्टार्टअप है. उन्होंने एक ऑटोमैटिक मशीन बनाई है जो कौओं की साइकोलॉजी पर काम करती है. उन्हें सिगरेट के टुकड़े सड़क किनारे रखे खास डस्टबिन में डालना सिखाया जाता है. जो कौए यह काम सही तरीके से करते हैं, उन्हें मूंगफली इनाम में दी जाती है. लेकिन, अगर वे सिगरेट की जगह डस्टबिन में कुछ और डालते हैं, तो उन्हें कोई इनाम नहीं मिलता.

कोर्विड क्लीनिंग की वेबसाइट बताती है कि डस्टबिन खास तौर पर डिजाइन किए गए हैं. जैसे ही कौवे सिगरेट के टुकड़े डालते हैं, मूंगफली निकलती है लेकिन अगर वे कुछ और डालते हैं जैसे पत्थर या पत्ते तो उन्हें कोई इनाम नहीं मिलता.

कौवों को क्यों चुना गया?

साइंटिस्ट मानते हैं कि पक्षियों का कोर्विड परिवार (जिसमें कौवे और मैगपाई शामिल हैं) दुनिया के सबसे समझदार जीवों में से एक है. उनकी सीखने की क्षमता 7 साल के बच्चे जितनी होती है. वे एक-दूसरे को देखकर काम जल्दी सीखते हैं. वे लेन-देन के सिस्टम को बहुत अच्छी तरह समझते हैं.

सड़कों से सिगरेट के टुकड़े साफ करना महंगा

स्वीडन में सड़कों से सिगरेट के टुकड़े साफ करना एक महंगा काम है. आंकड़ों के मुताबिक हर साल स्वीडिश सड़कों पर 1 बिलियन से ज्यादा सिगरेट के टुकड़े फेंके जाते हैं. इंसानों द्वारा उन्हें साफ करना बहुत महंगा है. इस पायलट प्रोजेक्ट के फाउंडर क्रिश्चियन गुंथर-हैनसेन का कहना है कि कौवों का इस्तेमाल करके सफाई का खर्च 75% तक कम किया जा सकता है.

क्या कौवों को इससे खतरा है?

कुछ पर्यावरणविदों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जताई है, उनका कहना है कि सिगरेट में मौजूद निकोटीन और टॉक्सिन पक्षियों की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. हालांकि, कोर्विड क्लीनिंग टीम का कहना है कि वे पक्षियों पर करीब से नज़र रख रहे हैं और यह पक्का कर रहे हैं कि वे कचरा सिर्फ़ मशीन में डालें, निगलें नहीं. क्रिश्चियन गुंथर-हैनसेन का कहना है कि यह वॉलंटरी काम है. “हम उन पर ज़बरदस्ती नहीं कर रहे हैं, हम बस उन्हें एक चॉइस दे रहे हैं. वे बहुत स्मार्ट हैं और जानते हैं कि खाना कहाँ मिलेगा.”

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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