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अमेरिका-ईरान युद्ध में आतंकी संगठन की एंट्री! क्या मिडिल ईस्ट में बदल जाएगा जंग का रुख? 10 पॉइंट्स में समझें पूरा हाल

लेबनान के ईरान-समर्थक हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने रात भर इज़राइली इलाके में रॉकेट और ड्रोन दागे, और इस हमले को ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या का बदला और लेबनान की रक्षा के तौर पर बताया.

US-Iran War: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच शुरू हुआ सैन्य टकराव अब एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है, जिसमें सीधे हमले, मिसाइलों की बारिश और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है. ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका और इजराइल के भीषण हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की कथित हत्या ने हालात को विस्फोटक बना दिया. इसके जवाब में तेहरान ने मिसाइलों और ड्रोन से पलटवार किया, लेबनान के हिज़्बुल्लाह जैसे सहयोगी हथियारबंद समूहों को सक्रिय किया और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया.

तेजी से बढ़ते इस संघर्ष ने न सिर्फ पूरे मध्य-पूर्व को युद्ध की दहलीज पर ला खड़ा किया है बल्कि वैश्विक बाजारों में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है. दुनिया की निगाहें अब इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव सीमित रहेगा या एक बड़े विश्वस्तरीय संकट में बदल जाएगा?

हिज़्बुल्लाह ने इजराइल पर किया हमला

लेबनान के ईरान-समर्थक हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने रात भर इज़राइली इलाके में रॉकेट और ड्रोन दागे, और इस हमले को ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या का बदला और लेबनान की रक्षा के तौर पर बताया.

सुप्रीम लीडर खामेनेई मारे गए

ईरान के सरकारी मीडिया और इंटरनेशनल रिपोर्ट्स ने US और इज़राइली सेनाओं के कोऑर्डिनेटेड हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की, जिससे दुश्मनी में भारी बढ़ोतरी हुई.

अमेरिका और इजराइल का बड़ा कैंपेन

अमेरिका और इजराइल ने बड़े हमले के हिस्से के तौर पर लीडरशिप, मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और एयर डिफेंस सिस्टम सहित 1,000 से ज़्यादा ईरानी ठिकानों पर हमला किया है. जिसे US नेताओं ने खतरों को खत्म करने के लिए जरूरी बताया है.

ईरान ने पूरे इलाके में जवाबी हमला

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खुद इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिका और उसके सहयोगी मिलिट्री बेस को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च किए, जो दशकों के इलाके के तनाव में ईरान का सबसे बड़ा जवाब था.

हताहतों की संख्या बढ़ी

ईरान ने अपने इलाके में हमलों में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर दी जिसमें आम लोगों के हताहत होने की खबर भी शामिल है; इज़राइली अधिकारियों ने ईरानी हमलों में मौतों की पुष्टि की है; और US सेंट्रल कमांड ने बड़े कैंपेन में मारे गए पहले अमेरिकी सैनिकों को माना है.

तेहरान में पावर वैक्यूम और अनिश्चितता

सुप्रीम लीडरशिप के जाने के बाद, ईरान की प्रोविजनल गवर्निंग काउंसिल ने एक हाई-स्टेक्स सक्सेशन प्रोसेस के बीच काम करना शुरू कर दिया है जिसमें अंदरूनी स्टेबिलिटी और शासन की कंटिन्यूटी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

लड़ाई के असर से जूझ रहे हैं खाड़ी देश

ईरान की जवाबी कार्रवाई में मिसाइलें और ड्रोन खाड़ी देशों तक पहुँचे, जहाँ US सेनाएँ थीं, जिससे मिसाइलें इंटरसेप्शन हुईं, मलबे से कम से कम नुकसान हुआ और क्षेत्रीय डिफेंस पोज़िशन बढ़ गई.

ग्लोबल इकोनॉमिक असर तेज हुए

शिपिंग रूट्स पर लड़ाई के दबाव  खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास और एयरस्पेस में रुकावट ने ग्लोबल ट्रैवल और ट्रेड को रोक दिया है, जिससे एनर्जी की ज़्यादा लागत की चेतावनी दी गई है.

पश्चिमी सहयोगी देशों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने क्षेत्रीय हितों की रक्षा करने और ईरानी हमलों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहने का संकेत दिया, जबकि रूस और चीन जैसी दूसरी दुनिया की ताकतों ने हत्या की निंदा की और तनाव कम करने की अपील की.

युद्ध के डर के बीच बातचीत की अपील

बहुत ज़्यादा लड़ाई के बावजूद, कुछ डिप्लोमैटिक आवाज़ें फिर से बातचीत की वकालत कर रही हैं और इस बात पर ज़ोर दे रही हैं कि युद्ध से शांति की उम्मीद खत्म नहीं होनी चाहिए, भले ही दुश्मनी जारी रहे.

हिज़्बुल्लाह की ताकत क्या है?

हिजबुल्लाह को कई देश आतंकी संगठन मानते हैं. हिजबुल्लाह शिया मुस्लिम राजनीतिक दल और सशस्त्र संगठन है. हिज़्बुल्लाह दुनिया का सबसे ताकतवर नॉन-गवर्नमेंटल ग्रुप है. इसके लड़ाके रॉकेट और ड्रोन से लैस हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि हिज़्बुल्लाह के पास कुल 100,000 रॉकेट हो सकते हैं. हिज़्बुल्लाह लीडर हसन नसरल्लाह ने 2021 में कहा था कि उनके ऑर्गनाइज़ेशन में लगभग 100,000 लड़ाके हैं. हालांकि, इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ थिंक टैंक का अंदाज़ा है कि ऑर्गनाइज़ेशन में कुल 20,000 एक्टिव लड़ाके हो सकते हैं. हिज़्बुल्लाह का दावा है कि वह अपनी मिसाइलों और रॉकेट से पूरे इज़राइल को टारगेट कर सकता है.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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