Indian Army Success Story: भारतीय सेना में अधिकारी बनना हर युवा का सपना होता है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले की रहने वाली अश्विन किरुपाई (Aswin Kirupai) की, जिन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, गया में अपने कोर्स में पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीता है.
शनिवार को आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्हें ऑर्डर ऑफ मेरिट में टॉप करने के लिए सम्मानित किया गया. इसके साथ ही वह Indian Army में अधिकारी के रूप में कमीशन हो गईं.
पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटा हौसला
अश्विन किरुपाई की जिंदगी का सफर आसान नहीं रहा. महज 14 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. इस घटना ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी. कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा. 24 साल की उम्र में उन्होंने OTA गया में शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल एंट्री) के महिला कोर्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया.
खेल और पढ़ाई दोनों में रहीं आगे
अश्विन बचपन से ही प्रतिभाशाली रही हैं. सिर्फ आठ साल की उम्र में उन्होंने सब-जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया और लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर साइंस में MSc की पढ़ाई पूरी की और अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए नेशनल कैडेट कोर से जुड़ गईं. NCC में रहते हुए उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता और अनुशासन से सभी को प्रभावित किया. उनकी इसी प्रतिभा के कारण उन्हें 2019 में ऑल इंडिया थल सैनिक कैंप में गोल्ड मेडल और 2020 में प्रधानमंत्री अवॉर्ड भी मिला.
सफलता का श्रेय मां को दिया
अपनी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए अश्विन ने कहा कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनकी मां ग्लोरी अचुथा को जाता है. उन्होंने कहा कि उनकी मां ने हर मुश्किल समय में उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. अब उनका सपना भारतीय सेना में सेवा करते हुए देश का नाम रोशन करना है.