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Best cities to live in India: हर उम्र के लिए अलग है भारत का बेस्ट शहर! करियर से रिटायरमेंट तक जानें कहां रहना होगा फायदे का सौदा

Best cities to live in India: भारत में रहने के लिए सबसे अच्छा शहर हर उम्र और जीवन के पड़ाव में अलग हो सकता है. एक विश्लेषण के अनुसार युवा प्रोफेशनल्स के लिए बेंगलुरु और हैदराबाद, परिवारों के लिए अहमदाबाद, चेन्नई और पुणे, जबकि रिटायरमेंट के बाद सूरत, इंदौर, कोयंबटूर और जयपुर जैसे शहर बेहतर विकल्प हो सकते हैं.

Best cities to live in India: भारत में रहने के लिए सबसे अच्छा शहर चुनना अब सिर्फ नौकरी और सैलरी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता. किसी शहर में करियर के शानदार मौके हो सकते हैं, लेकिन परिवार बढ़ने के बाद वही शहर महंगा या असुविधाजनक लग सकता है. इसी तरह रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कमाई से ज्यादा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और जीवन की गुणवत्ता मायने रखने लगती है. Dezerv के को-फाउंडर संदीप जेठवानी के एक विश्लेषण में भारतीय शहरों को उम्र और जीवन के अलग-अलग पड़ाव के हिसाब से परखा गया है. इसमें कमाई, खरीदारी क्षमता, सुरक्षा, प्रदूषण, स्वास्थ्य सुविधाएं, संपत्ति की कीमत और जीवन-यापन की लागत जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा गया है.

करियर बनाने वालों के लिए बेंगलुरु और हैदराबाद

25 से 35 साल की उम्र में ज्यादातर लोग अपने करियर को मजबूत करने और ज्यादा कमाई के अवसर तलाशने पर ध्यान देते हैं. इस उम्र के सिंगल प्रोफेशनल्स के लिए बेंगलुरु और हैदराबाद बेहतर विकल्प के तौर पर सामने आते हैं. इन शहरों में करियर ग्रोथ और कमाई की संभावनाएं अच्छी हैं. विश्लेषण के मुताबिक, यहां आय की तुलना में खरीदारी क्षमता भी बेहतर है. यानी युवा प्रोफेशनल्स अपनी कमाई का एक हिस्सा बचत और निवेश के लिए निकाल सकते हैं. हालांकि इस फायदे के साथ ट्रैफिक, प्रदूषण और लंबे सफर जैसी चुनौतियां भी हैं. करियर के शुरुआती दौर में लोग इन परेशानियों को बेहतर अवसरों के बदले समझौते के तौर पर स्वीकार कर सकते हैं. 30-40 साल: परिवार शुरू करने वालों के लिए अहमदाबाद, चेन्नई और पुणे 30 से 40 साल की उम्र में जब लोग शादी और परिवार की जिम्मेदारियों की ओर बढ़ते हैं, तो शहर चुनने की प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं. अब सिर्फ कमाई और नौकरी के अवसर पर्याप्त नहीं होते, बल्कि सुरक्षा और रहने की लागत भी महत्वपूर्ण हो जाती है. इस पड़ाव पर अहमदाबाद, चेन्नई और पुणे बेहतर विकल्प बताए गए हैं. अहमदाबाद में सुरक्षा और रहने की लागत का संतुलन अच्छा नजर आता है. वहीं चेन्नई और पुणे में खरीदारी क्षमता के साथ सुरक्षा का बेहतर तालमेल देखने को मिलता है.

बच्चों वाले परिवारों के लिए इंदौर, सूरत और जयपुर भी बेहतर

35 से 50 साल की उम्र में जब परिवार में स्कूल जाने वाले बच्चे होते हैं, तब माता-पिता के लिए शहर चुनते समय सुरक्षा, प्रदूषण और स्वास्थ्य सुविधाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती हैं. इस चरण में अहमदाबाद, सूरत, इंदौर, कोयंबटूर और जयपुर को बेहतर शहरों में शामिल किया गया है. इन शहरों में सुरक्षा और प्रदूषण से जुड़े पहलुओं पर प्रदर्शन कुछ बड़े महानगरों की तुलना में बेहतर बताया गया है. भले ही कुछ शहरों में कमाई और खरीदारी क्षमता मुंबई या बेंगलुरु जैसे महानगरों जितनी न हो, लेकिन परिवारों के लिए सुरक्षित और अपेक्षाकृत साफ वातावरण अधिक अहम हो सकता है.

घर खरीदने वालों के लिए हैदराबाद सबसे आगे

करियर के अच्छे कमाई वाले वर्षों में पहुंचने के बाद घर खरीदना भी बड़ी प्राथमिकता बन जाता है. ऐसे में सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि आय के मुकाबले संपत्ति की कीमत भी महत्वपूर्ण हो जाती है. विश्लेषण के अनुसार, इस मामले में हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे बेहतर विकल्प हैं. हैदराबाद में घर की कीमत और आय का अनुपात 4.3 बताया गया है, जो सूची में सबसे कम है. इसका मतलब है कि आय की तुलना में यहां घर खरीदना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है. अहमदाबाद और पुणे में भी यह अनुपात 8 से कम बताया गया है. वहीं मुंबई में यह 30.1 और दिल्ली में 16.1 है. इससे पता चलता है कि बड़े महानगरों में संपत्ति खरीदने का बोझ आय के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकता है.

रिटायरमेंट की तैयारी के लिए पुणे और चेन्नई

जैसे-जैसे व्यक्ति रिटायरमेंट के करीब पहुंचता है, करियर और अधिक कमाई की प्राथमिकता धीरे-धीरे पीछे होने लगती है. इस उम्र में सुरक्षित माहौल, स्वास्थ्य सुविधाएं और जीवन की गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती हैं. 48 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए पुणे, चेन्नई और हैदराबाद को बेहतर विकल्प बताया गया है. इन शहरों में नौकरी के साथ-साथ रहने की सुविधाओं और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का संतुलन देखा जा सकता है.

रिटायरमेंट के बाद सूरत, इंदौर और कोयंबटूर क्यों बेहतर?

50 साल या उससे अधिक उम्र के लोग अगर दूसरा घर खरीदना चाहते हैं या नौकरी से रिटायर हो चुके हैं, तो उनकी जरूरतें और बदल जाती हैं. इस चरण में शांत माहौल, कम प्रदूषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और संपत्ति की कीमत जैसे पहलू ज्यादा मायने रखते हैं. विश्लेषण में दूसरे घर या शुरुआती रिटायरमेंट के लिए कोयंबटूर, जयपुर और सूरत को बेहतर विकल्प माना गया है. वहीं पूरी तरह रिटायरमेंट के बाद रहने के लिए सूरत, इंदौर, कोयंबटूर और जयपुर को बेहतर शहरों में रखा गया है.

एक ही शहर हर उम्र में क्यों नहीं हो सकता बेस्ट?

इस विश्लेषण का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि भारत में रहने के लिए कोई एक शहर हर व्यक्ति और हर उम्र के लिए सबसे अच्छा नहीं हो सकता. 25 साल की उम्र में जहां करियर और कमाई प्राथमिकता हो सकती है, वहीं 40 की उम्र में बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं ज्यादा जरूरी हो सकती हैं. इसी तरह रिटायरमेंट के बाद कमाई से ज्यादा शांत वातावरण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और कम खर्च महत्वपूर्ण हो जाते हैं. इसलिए रहने के लिए सही शहर का चुनाव व्यक्ति की उम्र, आय, परिवार और जीवन की प्राथमिकताओं के हिसाब से बदलता रहता है.

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