Kiss Day 2026: फरवरी आते ही हवा में एक अलग-सी नरमी महसूस होने लगती है. वेलेंटाइन वीक के दौरान किस डे को अक्सर केवल रोमांटिक कपल्स का दिन माना जाता है. लेकिन सच यह है कि किस सिर्फ प्यार जताने का तरीका नहीं, बल्कि मानव व्यवहार की सबसे पुरानी और गहरी जैविक भाषा है. जब एक मां अपने बच्चे का माथा चूमती है, दादा- दादी अपने पोते या पोती को प्यार करने के लिए किस करते है और जब एक कपल किस करते है तो उनमें काफी अंतर होता है. साथ ही इस प्रक्रिया में अलग तरह की केमिकल निकलती है. जिसका मतलब है कि किस सिर्फ भावना नहीं बल्कि दिमाग, हार्मोन की विज्ञान से जुड़ा है. ऐसे में चलिए विस्तार से समझते है कि इंसान किस क्यों करता है और यह हमारे दिमाग व दिल पर इतना गहरा असर क्यों डालते है.
किस के पीछे छुपा साइंस?
कुछ किस अटैचमेंट से जुड़े होते हैं। किस करने से आपके दिमाग में एक केमिकल रिएक्शन होता है, जिसमें ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का तेज़ी से बढ़ना भी शामिल है. इसे अक्सर लव हॉर्मोन कहा जाता है, क्योंकि यह प्यार और अटैचमेंट की भावनाओं को जगाता है. 2013 की एक स्टडी के मुताबिक, ऑक्सीटोसिन पुरुषों को पार्टनर के साथ बॉन्ड बनाने और मोनोगैमस बने रहने में खास तौर पर जरूरी है. बच्चे के जन्म और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाओं में ऑक्सीटोसिन की बाढ़ आ जाती है, जिससे माँ-बच्चे का रिश्ता मजबूत होता है. खिलाने की बात करें तो, कई लोग मानते हैं कि किसिंग किस-फीडिंग की प्रैक्टिस से आई है. जैसे पक्षी अपने छोटे बच्चों को कीड़े खिलाते हैं, वैसे ही मां पहले अपने बच्चों को चबाया हुआ खाना खिलाती थीं और कुछ अब भी खिलाती हैं.
वहीं अगर डोपामि की बात करे तो इसे फील गुड केमिकल कहा जाता है. जब हम रोमांटिक किस करते है तो यह काफी तेजी से बढ़ता है. इस दौरान दिल की धड़कन काफी तेज हो जाती है और व्यक्ति अपने पार्टनर के प्रति ज्यादा आकर्षित महसूस करता है. इसी कारण की वजह से प्रेम में पड़ने वाले लोग अपने पार्टनर के साथ ज्यादा रहना पसंद करते है.
कुछ किस रोमांटिक प्यार से होते हैं जुड़े
आपको पता है जब आप किसी नए प्यार के लिए पागल हो जाते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं तो आपको कैसा लगता है? यह आपके दिमाग के रिवॉर्ड पाथवे में डोपामाइन का असर है.
डोपामाइन तब रिलीज़ होता है जब आप कुछ ऐसा करते हैं जो अच्छा लगता है, जैसे किस करना और किसी ऐसे व्यक्ति के साथ समय बिताना जिसकी ओर आप अट्रैक्टेड हैं.
यह और दूसरे हैप्पी हॉर्मोन आपको खुश और उत्साहित महसूस कराते हैं. आपको ये हॉर्मोन जितने ज़्यादा मिलेंगे, आपका शरीर उतना ही ज़्यादा इन्हें चाहेगा. कुछ लोगों के लिए, यह रिश्ते की शुरुआत में ज़्यादा साफ़ हो सकता है खासकर अगर आपका ज़्यादातर समय लिप लॉक में बीतता है. अगर आप उस शुरुआती स्पार्क के खत्म होने के बाद भी लगातार किस करते रह सकते हैं, तो आप उन हैप्पी हॉर्मोन के फ़ायदों का मज़ा लेते रह सकते हैं. हो सकता है आपका रिश्ता और भी ज़्यादा सैटिस्फाइंग हो. 2013 की एक स्टडी में, लंबे समय से रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स जो अक्सर किस करते थे, उन्होंने बताया कि उन्हें रिश्ते में ज़्यादा सैटिस्फैक्शन मिला.
किस करना कैसे साबित होता है लकी?
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि किस करते समच हम अनजाने में सामने वाले के शरीर की गंध और इम्यून सिस्टम को पहचानते है. जिसके बाद हमारा दिमाग ऐसे पार्टनर को ज्यादा पसंद करता है जिसकी प्रतिरक्षा प्रणाली हमसे काफी अलग हो. इस प्रक्रिया से भविष्य में बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत बनती है.
किस मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे असर डालता है?
किस करने से हमारा मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाता है, जिसक बाद हमें एंग्जायटी कम होती है, ब्लड प्रेशर घटता है, नींद अच्छी आती है, अकेलापन महसूस नहीं होता और रिश्तों में भरोसा बढ़ता है.