Protection from mosquitoes in rain: बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है और बच्चों को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है. ऐसे में सिर्फ मच्छर भगाने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय घर के आसपास पानी जमा होने से रोकना, गमलों और कूलर की सफाई करना, खिड़कियों पर जाली लगाना और बच्चों को शरीर ढकने वाले कपड़े पहनाना जरूरी है.
मच्छरों का आतंक बढ़ने से पहले कर लें ये काम
Protection from mosquitoes in rain: बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक और हरियाली तो लाता है, लेकिन इसी के साथ घरों के आसपास मच्छरों की संख्या भी बढ़ने लगती है. थोड़ी सी लापरवाही इन छोटे कीड़ों को पनपने के लिए सही जगह दे सकती है. खासकर बच्चों को लेकर माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है, क्योंकि मच्छरों के काटने से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जीका जैसी बीमारियों का खतरा रहता है. ऐसे में मच्छर मारने वाली मशीन, कॉइल या स्प्रे का इस्तेमाल करने के साथ-साथ सबसे जरूरी है कि घर के अंदर और आसपास मच्छरों के पनपने की जगह ही खत्म की जाए. अक्सर बाल्टी, गमले की प्लेट, कूलर, पुराने टायर और बेकार पड़े बर्तनों में जमा थोड़ा सा पानी भी मच्छरों के लिए पर्याप्त जगह बन सकता है.
मच्छरों की रोकथाम के लिए सबसे पहले उन जगहों की पहचान करें जहां बारिश का पानी जमा हो सकता है. बाल्टी, पुराने टायर, प्लास्टिक की बोतल, टूटे बर्तन, गमले की प्लेट या घर के आसपास पड़ा कोई सामान अगर बारिश के पानी को रोक रहा है तो उसे तुरंत खाली कर दें. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पानी रखने वाले कंटेनरों को ढककर रखना और जिन जगहों पर पानी जमा हो सकता है, उन्हें खाली व साफ रखना मच्छरों की संख्या कम करने में मदद कर सकता है. बारिश के दिनों में सिर्फ एक बार सफाई करना पर्याप्त नहीं है. नियमित रूप से यह देखना जरूरी है कि कहीं दोबारा पानी तो जमा नहीं हो गया.
घर में पौधे रखने का शौक है तो गमलों के साथ उनकी नीचे लगी प्लेट पर भी ध्यान दें. बारिश या पौधों को पानी देने के बाद प्लेट में पानी जमा रह सकता है. यही पानी मच्छरों के लिए प्रजनन की जगह बन सकता है. इसी तरह कूलर और पानी रखने वाले दूसरे कंटेनर भी नियमित रूप से चेक करें. इनमें लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए ऐसी चीजों को नियमित अंतराल पर खाली करके साफ करना जरूरी है.
मच्छरों को घर के अंदर आने से रोकना भी बचाव का अहम हिस्सा है. इसके लिए खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली लगाई जा सकती है. अगर जाली में छेद हो गया है तो उसे समय रहते ठीक करवाएं. खासकर बच्चों के कमरे में इस बात का ध्यान रखें कि शाम और रात के समय मच्छरों के घर में प्रवेश के रास्ते कम से कम हों. घर के अंदर मच्छरों की संख्या कम होने पर बच्चों के काटे जाने का जोखिम भी घट सकता है.
बच्चे बारिश के मौसम में खेलने के लिए बाहर जाते हैं तो उनके कपड़ों का चुनाव भी महत्वपूर्ण हो जाता है. ऐसे समय में फुल स्लीव के कपड़े और पैरों को ढकने वाली पैंट पहनाना बेहतर विकल्प हो सकता है. ऐसे कपड़े चुनें जो शरीर के खुले हिस्सों को कम रखें. खासकर उन जगहों पर जाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें जहां मच्छरों की संख्या ज्यादा हो सकती है.
मच्छररोधी रिपेलेंट बच्चों को मच्छरों से बचाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से पहले उत्पाद के लेबल पर दी गई उम्र और इस्तेमाल संबंधी निर्देश जरूर पढ़ें. दो महीने से कम उम्र के बच्चों पर मच्छररोधी रिपेलेंट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसे छोटे बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए शरीर को ढकने वाले कपड़ों और मच्छरदानी जैसे उपायों को प्राथमिकता देना बेहतर है. बारिश के मौसम में मच्छरों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका केवल उन्हें मारना या भगाना नहीं, बल्कि उनके पनपने की संभावित जगहों को खत्म करना है. घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और गमलों की नियमित सफाई करें, खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाएं और बच्चों को बाहर जाते समय शरीर ढकने वाले कपड़े पहनाएं. इन छोटी-छोटी सावधानियों को रोजमर्रा की आदत में शामिल करके बारिश के मौसम में मच्छरों के संपर्क को कम किया जा सकता है.
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