सायरा बानू से लेकर मुमताज तक; 60s और 70s की वो हसीनाएं, जिन्होंने गढ़ी ग्लैमर की नई परिभाषा
1960 और 1970 के दशक में बॉलीवुड ने हिंदी सिनेमा को कुछ सबसे यादगार स्टाइल आइकन दिए. रेड कार्पेट, इंस्टाग्राम फैशन पेज और सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट के चलन में आने से बहुत पहले, 60s और 70s की बॉलीवुड हसीनाएं हेयर स्टाइल, साड़ियों, आई मेकअप और अपने पर्दे पर निभाए गए किरदारों के जरिए ऐसे ट्रेंड सेट कर रही थीं जिन्हें दर्शक दशकों तक याद रखेंगे. सायरा बानू के युवा आकर्षण से लेकर मुमताज की तुरंत पहचानी जाने वाली साड़ी शैली तक, यहां ऐसी चुनिंदा बॉलीवुड हसीनाओं के बारे में बताया गया हैं जिनकी अदाएं आज भी हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की याद दिलाती हैं.
सायरा बानू
सायरा बानू ने किशोरावस्था में ही फिल्म 'जंगली' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा और देखते ही देखते 1960 के दशक की सबसे ग्लैमरस अभिनेत्रियों में से एक बन गईं. उनकी भावपूर्ण आंखें, आकर्षक हेयरस्टाइल और पारंपरिक एवं पश्चिमी परिधानों का मिश्रण उन्हें एक युवा और जीवंत छवि प्रदान करता था, जो उस दौर की रंगीन रोमांटिक फिल्मों के लिए एकदम उपयुक्त थी. 'जंगली', 'ब्लफ मास्टर', 'आई मिलन की बेला' और 'पड़ोसन' जैसी फिल्में उनकी फिल्मी विरासत का अहम हिस्सा हैं.
मुमताज
बॉलीवुड के फैशन में मुमताज की फिल्म 'ब्रह्मचारी' की नारंगी साड़ी आज भी आइकॉनिक हैं. इसकी कसकर लिपटी हुई, पहले से प्लीटेड स्टाइल मुमताज की सिग्नेचर पहचान बन गई और दशकों बाद भी कई लुक्स मुमताज के इस अंदाज से प्रेरित करके तैयार किये गए हैं. मुमताज के बोल्ड रंग और फिटेड चूड़ीदार सूट और विशिष्ट हेयरस्टाइल ने उन्हें अपनी पीढ़ी की सबसे प्रतिष्ठित स्टाइल आइकंस में से एक बना दिया.
शर्मिला टैगोर
शर्मिला टैगोर ने सहजता से सुरुचिपूर्ण भारतीय शैली और बोल्ड पश्चिमी फैशन के बीच तालमेल बिठाया. उनके ऊंचे-ऊंचे हेयरस्टाइल और आकर्षक विंग्ड आईलाइनर उनकी पहचान बन गए, वहीं फिल्म 'एन इवनिंग इन पेरिस' में बॉलीवुड ग्लैमर का एक और भी साहसिक पहलू देखने को मिला. वहीं दूसरी ओर, उनकी साड़ी वाली शैली में एक प्राचीन शालीनता बरकरार रही, जिसने उन्हें पारंपरिक शैली में भी उतना ही प्रभावशाली बना दिया.
वहीदा रहमान
वहीदा रहमान ने एक शांत और सौम्य ग्लैमर का प्रतिनिधित्व किया. दिखावटी स्टाइल पर निर्भर रहने के बजाय, वे सुरुचिपूर्ण साड़ियों, सादे मेकअप और स्वाभाविक अभिनय के लिए जानी जाती थीं. गाइड, साहिब बीबी और गुलाम और कागज़ के फूल जैसी फिल्मों ने उनकी उस परिष्कृत छवि को मजबूत करने में मदद की जो आज भी उनसे जुड़ी हुई है.
हेमा मालिनी
हेमा मालिनी के बॉलीवुड की "ड्रीम गर्ल" बनने के पीछे एक खास वजह थी. उनके पारंपरिक नैन-नक्श, लंबे बाल, साड़ियां और गहनों ने हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार ग्लैमरस छवि को जन्म दिया. लेकिन उनकी लोकप्रियता सिर्फ उनकी सजी-संवरी खूबसूरती तक ही सीमित नहीं थी. शोले में बसंती और सीता और गीता में दोहरी भूमिका जैसे किरदारों ने उनकी छवि में व्यक्तित्व और ऊर्जा का संचार किया, जिससे वे 1970 के दशक की सबसे प्रभावशाली महिला सितारों में से एक बन गईं.
रेखा
रेखा का बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टाइल आइकनों में से एक के रूप में उभरना उनके करियर का एक दिलचस्प हिस्सा है. 1970 के दशक की शुरुआत में उनका पहनावा उस छवि से बिल्कुल अलग था जिसे बाद में दर्शकों ने उनसे जोड़ा. समय के साथ, भव्य साड़ियाँ, आकर्षक आभूषण, विशिष्ट मेकअप और पारंपरिक भारतीय शैली अभिनेत्री की सार्वजनिक छवि का अभिन्न अंग बन गईं. आज भी, रेखा बॉलीवुड में ग्लैमर की पीढ़ियों को पार करने का एक स्पष्ट उदाहरण हैं.