बचपन में शुरू किया एक्टिंग करियर, दोस्त के लिए डायरेक्टर से ले लिया पंगा, ‘खिलौना’ फिल्म का ये किस्सा है बेहद खास
Mumtaz Khilona Film Story: एक्ट्रेस मुमताज का नाम हिंदी सिनेमा में किसी पहचान का मोहताज नहीं है. उन्होंने किसी फिल्मी परिवार या बड़े स्टार के सहारे के बिना ही इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई. कभी जूनियर आर्टिस्ट और चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर कैमरे के सामने आने वाली मुमताज आगे चलकर ऐसी अभिनेत्री बनीं, जिनके साथ काम करने के लिए बड़े-बड़े सितारे और निर्माता तैयार रहते थे. उनकी जिंदगी का एक दिलचस्प किस्सा 1970 में आई फिल्म ‘खिलौना’ से भी जुड़ा है, जिसने उनके करियर को एक नई ऊंचाई दी.
चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरू हुआ सफर
मुमताज का फिल्मी सफर उस दौर में शुरू हुआ जब वह बच्ची थीं. उन्होंने 1950 के दशक में फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करना शुरू किया. फिल्मफेयर के मुताबिक, उनकी शुरुआती फिल्मों में 1958 में आई फिल्म सोने की चिड़िया शामिल थी। इसके बाद उन्होंने स्त्री और सहरा जैसी फिल्मों में भी छोटे किरदार निभाए. 60 के दशक में उन्होंने दारा सिंह के साथ कई एक्शन फिल्मों में काम किया. उनकी जोड़ी को खास तौर पर छोटे शहरों और कस्बों में खूब पसंद किया गया. हालांकि इसी वजह से लंबे समय तक उन्हें ‘स्टंट फिल्म हीरोइन’ की छवि से जूझना पड़ा.
जब मुमताज को मिली 'खिलौना'
फिर आया साल 1970 और मुमताज के करियर में एक बड़ा मोड़. निर्माता एल.वी. प्रसाद की फिल्म 'खिलौना' में उन्हें संजीव कुमार के साथ मुख्य किरदार में काम करने का मौका मिला. फिल्म का निर्देशन चंदर वोहरा ने किया था और कहानी गुलशन नंदा के उपन्यास पर आधारित थी. फिल्म में जीतेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. दिलचस्प बात यह है कि इस गंभीर किरदार के लिए शुरुआत में मुमताज को लेकर निर्माताओं को संदेह था. मुमताज उस समय तक अपनी चुलबुली और ग्लैमरस भूमिकाओं के लिए ज्यादा पहचानी जाती थीं. हालांकि निर्माता एल.वी. प्रसाद को उन पर पूरा भरोसा था और यही फैसला आगे चलकर ऐतिहासिक साबित हुआ.
'खिलौना' ने बदल दी मुमताज की पहचान
फिल्म में मुमताज ने चांद नाम की महिला का किरदार निभाया था, जो एक मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति की जिंदगी में आती है और उसे सामान्य जिंदगी में वापस लाने की कोशिश करती है. कहानी में इमोशनल उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा थे और मुमताज को अपने अब तक के ग्लैमरस अंदाज से बिल्कुल अलग अभिनय करना पड़ा. मुमताज ने इस किरदार में ऐसी जान फूंकी कि दर्शकों और समीक्षकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा. फिल्म को भी बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिली और मुमताज को 'खिलौना' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला. फिल्म ने कुल दो फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, जिसमें बेस्ट फिल्म और बेस्ट एक्ट्रेस शामिल थे.
दोस्त शत्रुघ्न सिन्हा के लिए मुमताज ने उठाई आवाज
'खिलौना' से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा मुमताज और शत्रुघ्न सिन्हा की दोस्ती से जुड़ा है. फिल्म की कास्ट में शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहारी का किरदार निभाया था. उस समय वह इंडस्ट्री में अपने शुरुआती दौर में थे और उन्हें लेकर निर्माताओं को कुछ संदेह भी था. शत्रुघ्न सिन्हा को शुरुआत में इस भूमिका के लिए इसलिए खारिज कर दिया गया था क्योंकि निर्माताओं को लगता था कि वह विलेन का किरदार निभाने के लिए बहुत युवा दिखते हैं. हालांकि मुमताज ने उनके लिए आवाज उठाई और शत्रुघ्न सिन्हा की मदद की. इसके बाद उन्हें ‘खिलौना’ में काम मिला, जिसकी उस समय उन्हें काफी जरूरत थी.
'खिलौना' के बाद बदल गया करियर
'खिलौना' की सफलता के बाद मुमताज को गंभीर अभिनेत्री के तौर पर भी पहचान मिलने लगी. अब उनके पास सिर्फ ग्लैमरस या एक्शन भूमिकाएं नहीं थीं बल्कि बड़े और चुनौतीपूर्ण किरदार भी आने लगे. आगे चलकर उन्होंने राजेश खन्ना के साथ दो रास्ते, सच्चा झूठा, आप की कसम जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया और लोकप्रियता हासिल की.