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IND vs NZ: हाइब्रिड पिच पर होगा फाइनल? दूसरी पिच से ये कैसे अलग है, बल्लेबाज या गेंदबाज? किसे मिलेगा फायदा

भारत और न्यूजीलैंड के बीच फाइनल मुकाबला अहमदाबाद में हाइब्रिड पिच पर खेला जा सकता है. जानिए हाइब्रिड पिच क्या होती है, यह सामान्य पिच से कैसे अलग है और इससे किसे फायदा मिल सकता है.

IND vs NZ Final: अहमदाबाद में होने वाले बड़े मुकाबले से पहले “हाइब्रिड पिच” शब्द काफी चर्चा में है. क्रिकेट में यह एक नई तरह की तकनीक है, जिसका मकसद पिच को ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक टिकने लायक बनाना है. रिपोर्ट के अनसुार भारत और न्यूजीलैंड (India vs England) के बीच फाइनल मुकाबला हाइब्रिड पिच पर ही खेला जाना है. आइए जानते हैं क्या होती है हाइब्रिड पिच और ये अन्य पिचों से कैसे अलग होती है. सामान्य क्रिकेट पिच पूरी तरह मिट्टी और प्राकृतिक घास से बनाई जाती है, लेकिन हाइब्रिड पिच में इसके साथ थोड़ी आधुनिक तकनीक भी इस्तेमाल की जाती है.

क्या होती है हाइब्रिड पिच?

हाइब्रिड पिच ऐसी पिच होती है जिसमें प्राकृतिक घास के साथ थोड़ा सा सिंथेटिक (कृत्रिम) फाइबर भी मिलाया जाता है. पिच की मिट्टी के अंदर बहुत पतले कृत्रिम धागे डाले जाते हैं. ये धागे मिट्टी और घास को मजबूती देते हैं, जिससे पिच जल्दी खराब नहीं होती. बाहर से देखने पर यह पिच बिल्कुल सामान्य घास वाली पिच जैसी ही लगती है. खिलाड़ी को खेलते समय भी ज्यादा फर्क महसूस नहीं होता, लेकिन अंदर मौजूद फाइबर इसे ज्यादा मजबूत बना देते हैं.

सामान्य पिच से कैसे अलग है?

सबसे बड़ा फर्क इसकी मजबूती में होता है. सामान्य पिच पर अगर ज्यादा मैच खेले जाएं तो वह जल्दी टूटने लगती है. लेकिन हाइब्रिड पिच में कृत्रिम फाइबर होने की वजह से वह ज्यादा समय तक अच्छी हालत में रहती है. दूसरा फर्क गेंद के उछाल में देखने को मिलता है. हाइब्रिड पिच पर गेंद का बाउंस अक्सर एक जैसा रहता है. इससे बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को संतुलित मदद मिलती है. मेंटेनेंस के मामले में भी यह पिच आसान मानी जाती है. सामान्य पिच को हर मैच के बाद ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है, जबकि हाइब्रिड पिच को कम मरम्मत की जरूरत होती है.

खिलाड़ियों को क्या फायदा मिलता है?

ऐसी पिचों पर बल्लेबाजों को अच्छा बाउंस मिलता है, जिससे शॉट खेलना आसान हो जाता है. तेज गेंदबाजों को भी शुरुआत में अच्छी गति मिलती है. जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, स्पिन गेंदबाजों को भी थोड़ी मदद मिलने लगती है. कुल मिलाकर, हाइब्रिड पिच को क्रिकेट के लिए एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है. इसकी मदद से पिच ज्यादा समय तक अच्छी रहती है और एक ही मैदान पर ज्यादा मैच खेले जा सकते हैं.
Satyam Sengar

जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पढ़ाई के दौरान कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पत्रकारिता में एंट्री मिली. शुरुआत नेटवर्क 18 से हुई और अब ITV नेटवर्क के साथ जुड़ा हूं. पत्रकारिता में 3 साल से ज्यादा का अनुभव हो चुका है और स्पोर्ट्स पर अच्छी पकड़ है. क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और अन्य स्पोर्ट्स इवेंट्स कवर करता हूं. WWE की स्टोरीज लिखना बहुत ही ज्यादा पसंद है.

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