टीम इंडिया की लगातार हार और ढीली फील्डिंग पर सुनील गावस्कर का गुस्सा फूटा है. उन्होंने साफ कहा कि अब औसत दर्जे के फील्डरों को बाहर करने का समय आ गया है. जानिए कोचिंग स्टाफ की अंदरूनी उलझन और गावस्कर की कड़वी सलाह के बारे में...
सुनील गावस्कर
पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने हाल के दौरों में भारतीय क्रिकेट टीम के खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जताई है. टीम मैनेजमेंट को कड़ी सलाह देते हुए गावस्कर ने कहा कि सभी ‘औसत दर्जे’ के फील्डरों को तुरंत टीम से बाहर कर देना चाहिए. उनका मानना है कि आज के क्रिकेट में कोई भी कप्तान कमजोर फील्डरों को मैदान पर छिपाने का जोखिम नहीं उठा सकता, और अब कड़े कदम उठाने का समय आ गया है.
आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे के हालिया दौरों में भारतीय टीम की फील्डिंग बेहद निराशाजनक रही है. इन तीन दौरों में भारत को कुल आठ मैचों में हार का सामना करना पड़ा, जबकि वे केवल चार मैच ही जीत पाए. जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के दौरान स्थिति और खराब हो गई, जब भारतीय खिलाड़ियों ने दस आसान कैच छोड़े. इस खराब प्रदर्शन के कारण टीम के फील्डिंग कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ पर सवाल उठने लगे हैं.
टी. दिलीप अभी हेड फील्डिंग कोच हैं, लेकिन फील्डिंग के गिरते स्तर के कारण उन पर भारी दबाव है. वहीं, असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट को भी फील्डिंग का एक्सपर्ट माना जाता है; हालांकि, खबरों के मुताबिक दिलीप की मौजूदगी उन्हें इस भूमिका में खुलकर काम करने से रोक रही है. इस अंदरूनी उलझन का असर खिलाड़ियों के मैदान पर प्रदर्शन में साफ दिखता है.
अपने कॉलम में गावस्कर ने लिखा, ‘यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि जो भी खिलाड़ी औसत दर्जे का फील्डर हो, उसे टीम से बाहर कर दिया जाए. कोई कप्तान बस इस उम्मीद में तीन या चार खिलाड़ियों को छिपाने की कोशिश नहीं कर सकता कि गेंद उनकी तरफ नहीं आएगी.’ गावस्कर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी ढिलाई टीम के लिए महंगी साबित होती है.
हालांकि, अगस्त में BCCI की समीक्षा बैठक बुलाने के फैसले के बीच, गावस्कर ने घबराहट से बचने की सलाह भी दी है. उनका कहना है कि घबराने के बजाय ईमानदारी से आत्म-मंथन करने और शॉट चयन में सुधार करने की जरूरत है.
उन्होंने कहा, ‘एक गहन और ईमानदार समीक्षा जिसमें कमियों और उन्हें दूर करने के तरीकों पर चर्चा हो समय की मांग है. शॉट चयन बहुत महत्वपूर्ण है; यहां बल्लेबाज को अपने अहंकार को काबू में रखना चाहिए और अपनी छवि के अनुसार खेलने की कोशिश करने के बजाय गेंद की मेरिट के अनुसार खेलना चाहिए.’
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