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कैरिबियन ग्रेट की ‘जादू की झप्पी वाली डांट’ ने बनाया गावस्कर का करियर, हुए इतने इंप्रेस कि बेटे का नाम रख दिया रोहन; पढ़ें पूरी कहानी

Sunil Gavaskar-Rohan Kanhai: साल 1971 में सुनील गावस्कर ने भारत के वेस्टइंडीज दौरे पर अपना टेस्ट डेब्यू किया था. इस सीरीज के दौरान कैरिबियन दिग्गज खिलाड़ी की एक जादू की झप्पी वाली डांट ने सुनील गावस्कर का करियर बदल दिया था. पढ़ें पूरी कहानी...

Sunil Gavaskar-Rohan Kanhai Story: सुनील गावस्कर के भारत के महान क्रिकेटर रहे हैं. उन्होंने अपने करियर में कई बड़े रिकॉर्ड बनाए. विराट कोहली और रोहित शर्मा से जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी सुनील गावस्कर से प्रेरणा लेते हैं. इसके अलावा कई युवा खिलाड़ी भी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. हालांकि एक समय पर सुनील गावस्कर भी युवा क्रिकेटर थे. उस समय वह कैरिबियन क्रिकेटर रोहन कन्हाई से प्रेरणा लेते थे. कन्हाई ने गावस्कर के करियर की शुरुआत में उन्हें काफी प्रोत्साहित किया था. सुनील गावस्कर वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी रोहन कन्हाई के खेल और स्वभाव से काफी ज्यादा प्रभावित हुए थे. इससे उनका करियर पूरी तरह बदल गया.

इतना ही नहीं, गावस्कर ने रोहन कन्हाई से प्रभावित होकर अपने बेटे का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा. रोहन कन्हाई ने सुनील गावस्कर को ‘बॉम्बे ब्रैडमैन’ का उपनाम भी दिया था, जो दोनों दिग्गजों खिलाड़ियों के बीच गहरी दोस्ती और क्रिकेटिंग सम्मान को दर्शाता है. पढ़ें गावस्कर और कन्हाई की दोस्ती की कहानी…

‘जादू की झप्पी वाली डांट’ से बदला गावस्कर का करियर

साल 1971 में सुनील गावस्कर ने भारत के वेस्टइंडीज दौरे के दौरान अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी. वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने अपना डेब्यू किया था. इस सीरीज के दौरान जब भी सुनील गावस्कर कोई गलत शॉट खेलते थे, तो वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज रोहन कन्हाई उन्हें डांट लगाते थे. जब गावस्कर कोई खराब शॉट खेलते थे, तो कन्हाई अगले ओवर में उनके पास आकर कानों में फुसफुसाते थे. एक बार कन्हाई ने गावस्कर को जादू की झप्पी देकर डांट भी लगाई थी. कन्हाई ने गावस्कर से कहा था, ‘ध्यान करो! क्या तुम्हें 100 नहीं चाहिए? क्या हो गया तुम्हें?’ रोहन कन्हाई वेस्टइंडीज के खिलाड़ी थे, लेकिन फिर भी वह चाहते थे कि सुनील गावस्कर शतक बनाएं. इस सीरीज में गावस्कर ने शानदार प्रदर्शन किया. साथ ही इस दौरे पर भारत ने वेस्टइंडीज में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती थी. गावस्कर ने इस सीरीज में 4 मैचों में 154.80 की औसत से 774 रन बनाए थे. इसमें 4 शतक और एक दोहरा शतक शामिल था.

गावस्कर ने बेटे का नाम रखा रोहन

रोहन कन्हाई और सुनील गावस्कर का रिश्ता सिर्फ क्रिकेट के मैदान पर ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी काफी प्यारा था. कन्हाई की बल्लेबाजी के अलावा गावस्कर उनके व्यवहार से बहुत ज्यादा प्रभावित थे. गावस्कर आज भी कन्हाई को सबसे महान बल्लेबाज मानते हैं. सुनील गावस्कर दिग्गज खिलाड़ी कन्हाई को एक आदर्श मानते थे, जिसके चलते उन्होंने अपने बेटे का नाम भी रोहन रखा. वहीं, रोहन कन्हाई ने गावस्कर को ‘बॉम्बे ब्रैडमैन’ (Bombay Bradman) का उपनाम दिया था.

कौन हैं रोहन कन्हाई?

रोहन कन्हाई भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं. आजादी से पहले ही ब्रिटिश राज में रोहन के पूर्वज गुयाना में जाकर बस गए थे. इसकी वजह से वहां पर ही रोहन का जन्म हुआ था. रोहन कन्हाई को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था. आगे चलकर रोहन ने वेस्टइंडीज के लिए इंटरनेशनल लेवल पर क्रिकेट खेला. साल 1975 में वह वर्ल्ड कप जीतने वाली वेस्टइंडीज की टीम का हिस्सा रहे थे. इस वर्ल्ड कप में रोहन कन्हाई ने वेस्टइंडीज के लिए कमाल का प्रदर्शन किया था.

वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज रोहन कन्हाई का इंटरनेशनल करियर काफी शानदार रहा है. उन्होंने साल 1957 से लेकर 1974 तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेला. इस दौरान कन्हाई ने कुल 79 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 47.53 की औसत से 6,227 रन बनाए. इसमें 15 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं. इसके अलावा कन्हाई ने वनडे क्रिकेट में 7 मैच खेले हैं, जिसमें 164 रन बनाए. बता दें कि जब तक वनडे क्रिकेट पॉपुलर होना शुरू हुआ, तब तक कन्हाई रिटायरमेंट ले चुके थे. वहीं, फर्स्ट क्लास क्रिकेट की बात करें, तो कन्हाई ने कुल 421 FC मैच खेले हैं. इस दौरान कन्हाई के बल्ले से कुल 29,250 रन निकले हैं. वहीं, लिस्ट-ए क्रिकेट में कन्हाई के नाम 159 मैचों में 4,769 रन दर्ज हैं.

Ankush Upadhyay

अंकुश उपाध्याय युवा पत्रकार हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (CCS) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई की है. फिलहाल वह इंडिया न्यूज डिजिटल के साथ जुड़कर स्पोर्ट्स के लिए लेखन का काम कर रहे हैं. इससे पहले वह हरिभूमि डिजिटल डिपार्टमेंट में बतौर लेखक अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

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