झारखंड उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि रात में किसी महिला के घर में घुसना और उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना अपने आप में बलात्कार का प्रयास नहीं है, जबकि एक कम गंभीर अपराध को बरकरार रखा गया है.
झारखंड उच्च न्यायालय
हाल ही में एक मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि रात में किसी महिला के घर में घुसकर उसके कपड़े उठाने का प्रयास करना, हालांकि एक आपराधिक कृत्य है, लेकिन अपने आप में बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता.
न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कानून के अनुसार, किसी कृत्य को बलात्कार के प्रयास के रूप में तभी माना जा सकता है जब वह बलात्कार के घटित होने के काफी करीब हो. यह फैसला 31 अगस्त को एक आपराधिक अपील पर सुनाया गया और सोमवार को जारी किया गया.
खबरों के मुताबिक, यह मामला 26 दिसंबर 1999 का है, जब यह घटना रात में घटी थी. उस व्यक्ति को अगले दिन, 27 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उसके खिलाफ महिला के साथ बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दायर की गई. ट्रायल कोर्ट ने उसे बलात्कार के प्रयास का दोषी पाया और चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई.
अपील की सुनवाई के दौरान, झारखंड उच्च न्यायालय ने इस बात की जांच की कि क्या अपीलकर्ता पर लगाए गए आरोप बलात्कार के प्रयास की कानूनी श्रेणी में आते हैं. न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने माना कि ये आरोप उस सीमा को पार नहीं करते. खबरों के मुताबिक, अदालत ने पाया कि सबूत यह साबित करने के लिए पर्याप्त थे कि व्यक्ति ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया था. हालांकि, झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि सबूत इस बात को उचित नहीं ठहराते कि कम गंभीर अपराध को बलात्कार के प्रयास के अपराध में बदल दिया जाए.
झारखंड उच्च न्यायालय ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग करने के आरोप में आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए बलात्कार के प्रयास के आरोप में दोषसिद्धि को रद्द कर दिया. न्यायालय ने 25 जुलाई को पूर्वी सिंहभूम जिला सत्र न्यायालय द्वारा पारित आदेश में भी संशोधन किया.
खबरों के मुताबिक, न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि किसी कृत्य को बलात्कार का प्रयास तभी माना जा सकता है जब वह बलात्कार के घटित होने के काफी करीब हो. इस मामले में, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अपीलकर्ता पर लगाए गए आरोप उस कानूनी स्तर तक नहीं पहुंचे थे.
झारखंड उच्च न्यायालय ने बलात्कार के प्रयास के आरोप में दोषसिद्धि को पलटते हुए आरोपी की सजा को कम कर दिया. आरोपी पहले ही लगभग आठ महीने हिरासत में बिता चुका था, और न्यायालय ने माना कि शेष अपराध के लिए न्याय सुनिश्चित करने हेतु यह अवधि पर्याप्त थी.
अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई. झारखंड उच्च न्यायालय ने कम गंभीर अपराध के लिए दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन फैसला सुनाया कि जेल में बिताए गए लगभग आठ महीने पर्याप्त सजा हैं.
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