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10वीं फेल सब्जी वाले ने कर दिखाया कमाल: ₹125 में छत पर बनाया स्कूल, दिग्गज उद्योगपति श्रीधर वेम्बू भी हुए मुरीद

बिहार के रोहित कुमार, जो कभी सब्जी बेचते थे और 10वीं में फेल हो गए थे, आज अपनी छत पर 1000 बच्चों को पढ़ा रहे है. मात्र ₹125 की फीस में उनकी 'रूफटॉप क्लास' शिक्षा की नई मिसाल है. उनके इस जज्बे की तारीफ दिग्गज उद्योगपति श्रीधर वेम्बू ने भी की है.

बिहार के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले रोहित कुमार ने यह साबित कर दिया है कि अगर कुछ करने का जुनून हो, तो बड़ी डिग्रियां मायने नहीं रखतीं.  कभी सड़कों पर सब्जी बेचने वाले और 10वीं की परीक्षा में फेल हो चुके रोहित आज सैकड़ों बच्चों के लिए ‘मसीहा’ बन गए है.

सब्जी की टोकरी छोड़, उठाई कलम और बन गए ‘छत वाले मास्टर जी’

रोहित कुमार का शुरुआती जीवन काफी मुश्किलों भरा रहा.  उनके घर की माली हालत इतनी खराब थी कि उनकी मां उपले (गोबर के कंडे) बेचकर गुजारा करती थी.  रोहित खुद भी अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए सब्जी बेचते थे.  जब वह 10वीं की परीक्षा में फेल हुए, तो समाज ने उन्हें ताने दिए और उनका मजाक उड़ाया.  लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय दूसरों को शिक्षित करने का फैसला किया और अपनी छत पर सिर्फ 4 बच्चों से पढ़ाना शुरू किया.

मात्र ₹125 में दे रहे हैं बेहतरीन शिक्षा

रोहित ने अपने घर की छत को ही एक क्लासरूम का रूप दे दिया है.  वह हर बच्चे से महीने की फीस के तौर पर मात्र ₹125 लेते है.  शुरुआत में लोगों ने सवाल उठाए कि ‘ जो खुद फेल है, वह दूसरों को क्या पढ़ाएगा?’  लेकिन रोहित ने विज्ञान और गणित को इतने आसान और मजेदार तरीके से पढ़ाया कि बच्चे खिंचे चले आए.  आज उनकी यह पाठशाला सुबह 5 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलती है, जहां करीब 1,000 छात्र पढ़ाई करते है.

दिग्गज उद्योगपति श्रीधर वेम्बू ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

रोहित की मेहनत तब रंग लाई जब उनका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ.  सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) के सीईओ श्रीधर वेम्बू की नजर उन पर पड़ी.  वेम्बू रोहित के जज्बे से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ करते हुए लिखा,  इन बच्चों का उत्साह देखकर मुझे भारत के भविष्य पर गर्व होता है.  उन्होंने रोहित के इस नेक काम में अपनी फाउंडेशन के जरिए पूरी मदद देने का वादा भी किया है.

हार न मानने वालों के लिए एक बड़ा संदेश

बिहार के रोहित कुमार की कहानी संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत मिसाल है.  10वीं की परीक्षा में असफल होने और गरीबी के कारण सब्जी बेचने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी.  उन्होंने अपने घर की छत पर एक ‘रूफटॉप क्लासरूम’ शुरू किया, जहां वह मात्र 125 रुपये में बच्चों को विज्ञान और गणित पढ़ाते है.
आज उनकी पाठशाला में लगभग 1,000 छात्र पढ़ रहे है.  उनकी इस पहल ने जोहो (Zoho) के सीईओ श्रीधर वेम्बू का ध्यान भी खींचा है, जिन्होंने उनके जज्बे की सराहना की.  रोहित की कहानी सिखाती है कि असफलता अंत नहीं है और दृढ़ इच्छाशक्ति से सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.
Mansi Sharma

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