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Bihar Politics: Nitish Kumar के बाद बिहार CM की रेस में 3 नाम, यहां देखें तीनों नेताओं की प्रोफाइल

Bihar Politics: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के दरमियान अब सियासी हलचल तेज होने लगी है. बिहार में नए सीएम की चर्चाएं होने लगी हैं. ऐसे में इन तीन नामों की पेशकश की जा रही है. जानिए वो तीन नाम कौन हैं और उनका सफर?

Bihar Politics: बिहार में आज गुरुवार को एक बड़ा पॉलिटिकल इवेंट देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला किया है और बिहार का अगला सीएम BJP से देखने को मिल सकता है. सूत्रों से पता चला है कि नीतीश कुमार कल पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नॉमिनेशन फाइल करेंगे. राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होंगे और उसी दिन नतीजे भी घोषित किए जाएंगे.

 नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद अब लोगों के बीच नए मुख्यमंत्री (Bihar New Chief Minister) को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी है. सूत्रों का दावा है कि नए मुख्यमंत्री की रेस में तीन नाम सबसे आगे चल रहे हैं. पहले हैं सम्राट चौधरी, दूसरे हैं नित्यानंद राय, और तीसरे हैं दिलीप जायसवाल. तो इन तीनों नेताओं के पॉलिटिकल करियर पर एक-एक करके नजर डालते हैं.

CM की रेस में सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर, 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ था. वह बिहार की पॉलिटिक्स में एक अहम चेहरा हैं. उनके पिता शकुनि चौधरी एक अनुभवी राजनेता थे, जो छह बार MLA और एक बार MP चुने रहे. जबकि उनकी मां पार्वती देवी तारापुर सीट से MP रहीं. अपने गांव में शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद सम्राट चौधरी ने मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से हायर एजुकेशन हासिल की.

सम्राट का पॉलिटिकल सफ़र

सम्राट 1990 में एक्टिव पॉलिटिक्स में आए. मई साल 1999 में वह पहली बार राबड़ी देवी की सरकार के दौरान बिहार के एग्रीकल्चर मिनिस्टर बन गए थे. इसके बाद वह 2000 और 2010 में परबत्ता असेंबली सीट से MLA चुने गए. साल 2010 में उन्होंने बिहार लेजिस्लेटिव असेंबली में अपोज़िशन के चीफ व्हिप के तौर पर भी कार्य किया. 

दलबदल और फिर BJP में एंट्री

शुरुआत में RJD और जेडीयू से जुड़े सम्राट चौधरी ने 2014 में बिहार की पॉलिटिक्स में एक बड़ा बदलाव किया. उन्होंने 13 RJD MLA के साथ एक बागी ग्रुप बनाया और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. इस बदलाव के बाद 2 जून 2014 को उन्होंने जीतन राम मांझी की सरकार में शहरी विकास और आवास मंत्री के तौर पर शपथ ली. मार्च 2023 में BJP ने उन्हें संजय जायसवाल की जगह बिहार का प्रदेश अध्यक्ष बनाया. पार्टी ने उन्हें खास तौर पर कोइरी/कुशवाहा समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और अपना OBC बेस बढ़ाने के लिए चुना था.

प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों की तीखी आलोचना की. इस दौरान उन्होंने एक सांकेतिक वादा किया और पगड़ी पहनना शुरू कर दिया, जिसे उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद ही हटाने की कसम खाई. हालांकि, जब नीतीश कुमार फिर से BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हुए तो उन्होंने अपनी पगड़ी उतार दी. जनवरी 2024 में सत्ता बदलने के बाद सम्राट चौधरी को BJP विधायक दल का नेता और बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद 2025 के चुनावों में NDA सरकार फिर से बनी और वे उपमुख्यमंत्री बने. अब वह CM की रेस में सबसे आगे हैं.

CM की रेस में दूसरा नाम नित्यानंद राय

नित्यानंद राय ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपनी सीट बचाई थी. उन्होंने RJD कैंडिडेट आलोक कुमार मेहता को 60,102 वोटों के मार्जिन से हराकर बड़ी जीत हासिल की थी. 1966 में जन्मे नित्यानंद राय ने बिहार के हाजीपुर के राज नारायण कॉलेज से अपनी हायर एजुकेशन पूरी की, जहां से उन्होंने बैचलर डिग्री हासिल की. 

लोकसभा पहुंचने से पहले वह बिहार की पॉलिटिक्स में एक्टिव रूप से शामिल थे. साल 2000 से MP चुने जाने तक वह लगातार हाजीपुर असेंबली सीट से MLA चुने जाते रहे. उन्होंने बिहार में BJP के स्टेट प्रेसिडेंट के तौर पर भी काम किया, जहां उन्होंने पार्टी का बेस मज़बूत करने में अहम रोल निभाया. नित्यानंद राय को बिहार की पॉलिटिक्स में BJP का मुख्य यादव चेहरा माना जाता है. पार्टी ने खास तौर पर उन्हें RJD के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने और OBC वोटरों को अपनी ओर खींचने के लिए एक मज़बूत कैंडिडेट के तौर पर मैदान में उतारा है.

CM के तीसरे उम्मीदवार दिलीप जायसवाल

डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का जन्म 3 दिसंबर, 1963 को बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी में हुआ था. वे शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे हैं. वे हिंदू हैं और कलवार जाति (एक बहुत पिछड़ा वर्ग) से हैं. उनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. खास बात यह है कि दिलीप जायसवाल 22 साल से ज़्यादा समय तक बिहार BJP के स्टेट ट्रेज़रर रहे. वे नीतीश कुमार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. लगभग 63 साल के जायसवाल के पास PhD है. वे पहली बार 2009 में पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के लोकल अधिकारियों से लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए चुने गए थे. वे अभी बिहार BJP के प्रेसिडेंट के तौर पर काम कर रहे हैं.

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