IAS Sanjeev Hans: एक महिला ने संजीव हंस पर शादी का झूठा वादा करके उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाने का आरोप लगाया. जब इस आरोप की जांच शुरू हुई तो आय से ज़्यादा संपत्ति समेत दूसरे आरोप भी सामने आए. इसके बाद अक्टूबर 2024 में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने संजीव हंस को करप्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया. इस दौरान उन्हें सर्विस से सस्पेंड कर दिया गया. उन्होंने लगभग 10 महीने ज्यूडिशियल कस्टडी (बेउर जेल में) में बिताए.
कौन हैं IAS संजीव हंस?
IAS Sanjeev Hans: बिहार के सबसे जाने-माने और असरदार ब्यूरोक्रेट्स में से एक माने जाने वाले IAS ऑफिसर संजीव हंस एक बार फिर सेंट्रल जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में आ गए हैं. सीबीआई ने उनके खिलाफ क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. जांच के मुताबिक यह मामला उस समय का है जब संजीव हंस भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन में प्राइवेट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे. आरोप है कि उन्होंने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) से मुंबई की ‘ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स’ के पक्ष में ऑर्डर दिलाने और कंपनी के डायरेक्टर की गिरफ्तारी रोकने के लिए 1 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी.
19 अक्टूबर 1973 को पंजाब में जन्मे संजीव हंस बिहार कैडर के 1997 बैच के IAS ऑफिसर हैं. हंस के पास सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री है. हंस के पिता भी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में थे. उनकी पहली पोस्टिंग बिहार के बांका जिले में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने कई जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के तौर पर काम किया. वे बिहार के एनर्जी डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी होल्डिंग कंपनी के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) जैसे असरदार पदों पर लंबे समय तक काम कर चुके हैं.
एक महिला ने संजीव हंस पर शादी का झूठा वादा करके उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाने का आरोप लगाया. जब इस आरोप की जांच शुरू हुई तो आय से ज़्यादा संपत्ति समेत दूसरे आरोप भी सामने आए. इसके बाद अक्टूबर 2024 में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने संजीव हंस को करप्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया. इस दौरान उन्हें सर्विस से सस्पेंड कर दिया गया. उन्होंने लगभग 10 महीने ज्यूडिशियल कस्टडी (बेउर जेल में) में बिताए. एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, अक्टूबर 2025 में पटना हाई कोर्ट ने रेप केस खारिज कर दिया और उन्हें करप्शन केस में कंडीशनल बेल दे दी. करप्शन केस की जांच अभी भी चल रही है. बेल पर रिहा होने के बाद भी संजीव हंस काफी समय तक बिना पोस्टिंग के रहे. हालांकि जनवरी 2026 में बिहार सरकार ने उन्हें फिर से बहाल कर दिया. हाल ही में उन्हें रेवेन्यू बोर्ड के एडिशनल मेंबर के तौर पर नई ज़िम्मेदारी दी गई है.
सीबीआई की यह नई एफआईआर उस समय की है जब संजीव हंस भारत सरकार के कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर स्वर्गीय रामविलास पासवान के पर्सनल सेक्रेटरी थे. आरोप है कि मुंबई के ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) से राहत दिलाने के लिए ₹1 करोड़ की डील हुई थी.
सीबीआई के मुताबिक, रिश्वत की रकम सीधे तौर पर नहीं ली गई थी. इसके बजाय, विपुल बंसल नाम के एक बिचौलिए के ज़रिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था. इस ट्रांज़ैक्शन को आसान बनाने के लिए खास कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया था. रिश्वत के बदले में, संजीव हंस ने कथित तौर पर बिल्डर के पक्ष में सुनवाई की तारीखों में हेरफेर किया और कंपनी के डायरेक्टर की गिरफ्तारी को रोकने में मदद की.
सीबीआई द्वारा फाइल किए गए केस के बारे में संजीव हंस के वकील ने भी एक बयान जारी किया है. संजीव के वकील, चंगेज खान ने सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों को साफ तौर पर नकार दिया है.
ईडी ने पहले बताया था कि संजीव हंस ने अपने साथियों और पूर्व MLA गुलाब यादव के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की बेनामी (किसी और के नाम पर) संपत्ति जमा की थी. उनके ठिकानों पर छापे के दौरान, जांच करने वालों को 11 करोड़ रुपये से ज़्यादा कैश, कई किलोग्राम वज़न के सोने और चांदी के बिस्कुट और विदेश में किए गए निवेश से जुड़े डॉक्यूमेंट मिले.
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