Samrat Choudhary family: भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में पहली बार गद्दी संभाली है. इस बार सीएम पद की कमान सम्राट चौधरी को सौंपी गई है. सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति का एक चर्चित नाम है, जो अलग-अलग पार्टियों के पद से लेकर सरकार में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं. बिहार में भाजपा के विधायक दल की पहली और आखिरी पसंद रहते हुए पूर्ण समर्थन के साथ सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं. वैसे को सम्राट चौधरी अपने आफ में राजनीति का बड़ा नाम है, लेकिन असल में उन्होंने राजनीति के गुर अपने पिता शकुनी चौधरी से ही सीखे हैं. जानिए सम्राट चौधरी का राजनीतिक इतिहास और उनके परिवार की पूरी कुंडली-
पार्टी से पहले बदल चुके हैं नाम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा विधायक दल के पूर्ण समर्थन से सीएम की कुर्सी पर बैठे हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सम्राट चौधरी शुरुआत से भाजपा में नहीं थे.
- सम्राट चौधरी का असली नाम राकेश कुमार है, जिन्होंने 1990 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की.
- करीब 9 साल तक राष्ट्रीय जनता दल के साथ एक्टिव पॉलिटिक्स में रहते हुए सम्राट चौधरी को 1999 में पहला ब्रेक मिला और वो राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बने.
- कम उम्र के मंत्री होने के कारण सम्राट चौधरी को अयोग्य घोषित कर दिया गया. राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए.
- भाजपा की राजनीति में उभरते रहे, पहले 2022 में प्रदेश अध्यक्ष बने और 2024 में नीतिश सरकार में डिप्टी सीएम बने.
पिता से सीखे राजनीति के गुर
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी भी बिहार की राजनीति में अपना नाम कद्दावर नेता के तौर पर दर्ज करा चुके हैं.
- शकुनी चौधरी ने करीब 15 साल तक भारतीय सेना में सेवाएं दीं और रिटायरमेंट के बाद बिहार की राजनीति में अपने कदम जमाए.
- शकुनी चौधरी को कुशवाहा (कोइरी) समुदाय का प्रमुख नेता हैं, जो साल 1985 से 2010 के बीच तारापुर विधानसभा क्षेत्र से एक्टिव रहे.
- जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी की नींव रखी और इसी पार्टी की टिकट पर साल 1998 में खगड़िया से चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे.
- निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजनीतिक करियर शुरू किया और कांग्रेस, समता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) पार्टियों में रहे.
- बिहार विधान सभा के उपाध्यक्ष बनने के बाद साल 2000 में राबड़ी देवी सरकार में मंत्री का पद संभाला.
- साल 2010 और 2015 में चुनावी हार मिलने पर राजनीति से सन्यास ले लिया.
विवादों में भी रहा नाम
तारापुर सीट पर नाम बनाने वाले शकुनी चौधरी का विवादों से भी गहरा नाता रहा है. ये बात है साल 1995 के विधान सभा चुनावों की, जब तारापुर सीट के कांग्रेस उम्मीदवार सच्चिदानंद सिंह और उनके समर्थकों पर ग्रेनाइड हमला हुआ. इस हमले में नेता और समर्थक दोनों की हत्या हुई. इस मामले में आरोपी 33 लोगों में शकुनी चौधरी का भी नाम था, जो सबूतों के अभाव में हटा दिया गया.
पत्नि पार्वती को भी राजनीति में लाए
तारापुर सीट से लोकसभा जाने के बाद सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी ने पत्नि पार्वती को भी राजनीति में स्थापित किया. पार्वती देवी ने भी साल 1998 के विधानसभा उपचुनाव में समता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज कराई. अपने समय में पार्वती देवी ने भी मुंगेर क्षेत्र की लोकल राजनीति में अपना दबदबा कायम किया और जीवन को विराम देते 11 सितंबर 2022 को तारापुर के लखनपुर में आखिरी सांस ली.
सम्राट चौधरी के परिवार में और कौन-कौन है?
शकुनी चौधरी द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 6 बच्चे हैं. सम्राट चौधरी के 5 भाई-बहन हैं, जिसमें 3 भाई और 2 बहनें हैं. सम्राट चौधरी का विवाह 2007 में ममता चौधरी से हुआ. सम्राट चौधरी के 2 बच्चे हैं, जिसमें बेटी का नाम चारू और बेटे के नाम प्रणय है.