Live TV
Search
Home > राज्य > बिहार > Who is Samrat Chaudhary: 19 साल की उम्र में ही बन गए थे मंत्री… जानें कौन हैं सम्राट चौधरी, जो बनेंगे बिहार के नए सीएम!

Who is Samrat Chaudhary: 19 साल की उम्र में ही बन गए थे मंत्री… जानें कौन हैं सम्राट चौधरी, जो बनेंगे बिहार के नए सीएम!

Who is Samrat Chaudhary: मसम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनि चौधरी राज्य के टॉप नेताओं में से एक माने जाते हैं. सम्राट चौधरी ने अपने पिता की देखरेख में ही अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत की. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने राजनीति का ककहरा लालू प्रसाद यादव, यानी जिस RJD के वे विरोधी हैं, की उसी स्कूल में सीखा. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत RJD से की थी.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: 2026-04-14 14:40:29

Mobile Ads 1x1

Who is Samrat Chaudhary: बिहार में एक नए पॉलिटिकल दौर की शुरुआत होने वाली है. राज्य को अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है. सम्राट चौधरी का नाम फाइनल हो गया है. सम्राट बिहार के 24वें मुख्यमंत्री होंगे. उन्हें राजनीति विरासत में मिली है. सम्राट के पिता शकुनि चौधरी बिहार के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं. बिहार के नए मुख्यमंत्री ने लंबा सफर तय किया है. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी. वह पहले जेडीयू और बाद में बीजेपी में भी शामिल हुए.

शकुनि चौधरी टॉप नेताओं में से ए

सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनि चौधरी राज्य के टॉप नेताओं में से एक माने जाते हैं. सम्राट चौधरी ने अपने पिता की देखरेख में ही अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत की. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने राजनीति का ककहरा लालू प्रसाद यादव, यानी जिस RJD के वे विरोधी हैं, की उसी स्कूल में सीखा. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत RJD से की थी.

ममता कुमारी से हुई शादी

16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी की शादी ममता कुमारी से हुई थी. उनके पिता का नाम शकुनि चौधरी और मां का नाम पार्वती देवी है. सम्राट चौधरी के एक बेटा और एक बेटी है. उनके पिता शकुनि चौधरी सोशलिस्ट नेता माने जाते हैं. शकुनि चौधरी कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी थे. बाद में शकुनि चौधरी ने अपनी पॉलिटिकल दिशा बदली और नीतीश कुमार के साथ जुड़ गए.

कैबिनेट से निकाले गए

19 साल की उम्र में पहली बार मंत्री बने सम्राट चौधरी को कैबिनेट से निकाल दिया गया था. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि उन्हें निकालने की वजह उनकी उम्र को लेकर हुआ विवाद था. असल में, सम्राट चौधरी उस समय की RJD सरकार में कृषि राज्य मंत्री थे. कहा तो यह भी जाता है कि उनके लिए एक खास डिपार्टमेंट बनाया गया था.

यह भी कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी, जिसने सम्राट चौधरी को अपना चेहरा चुना था, ने उनकी उम्र पर एतराज़ जताया था. गवर्नर ने उन्हें कम उम्र की वजह से हटा दिया था. हालांकि, बाद में सम्राट चौधरी BJP में शामिल हो गए और अपनी पॉलिटिकल पहचान बनाई. हालांकि, उनकी उम्र को लेकर यह विवाद उनके पूरे पॉलिटिकल करियर का अहम हिस्सा रहा है.

1999 में उस समय के गवर्नर सूरजभान ने सम्राट चौधरी को उनकी कम उम्र की वजह से बिहार कैबिनेट से हटा दिया था. गवर्नर ने न सिर्फ उन्हें उनकी कथित कम उम्र की वजह से कैबिनेट से निकाल दिया, बल्कि उनके खिलाफ जालसाजी, गलत बयानी, झूठी घोषणा और धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का भी आदेश दिया. तब पता चला कि सम्राट की उम्र 26 साल लिखी थी, जबकि उसके स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में उसकी उम्र 31 साल लिखी थी. 1995 में फाइल किए गए एक मर्डर केस में, सम्राट चौधरी ने दावा किया था कि वह नाबालिग है. इसके अलावा, उसका बड़ा भाई, जो उस समय इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, 22 साल का था.

सम्राट चौधरी की उम्र को लेकर विवाद सबसे पहले तब सामने आया जब उस समय के समता पार्टी के नेता रघुनाथ झा और पीके सिन्हा ने उस समय के गवर्नर जस्टिस बीएम लाल और राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर, एके बसु को बताया कि चौधरी 25 साल के नहीं हैं और इसलिए मंत्री बनने के लायक नहीं हैं. इसके बाद जस्टिस लाल ने एके बसु को मामले की जांच करने और 25 दिनों के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. हालांकि जस्टिस बाद में रिटायर हो गए, लेकिन यह मामला तब फिर से सामने आया जब एक्टिंग गवर्नर ने CEO को 5 नवंबर तक पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.

रिपोर्ट में कहा गया कि सम्राट चौधरी ने जांच करने वालों के साथ सहयोग नहीं किया था. यह भी दावा किया गया कि गवर्नर के पास उनकी उम्र से जुड़े कई डॉक्यूमेंट्स थे, जिनमें बहुत सारी गड़बड़ियां थीं.

पॉलिटिकल करियर

सम्राट चौधरी का पॉलिटिकल करियर भी काफी दिलचस्प रहा है. असल में, सम्राट चौधरी शायद पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो कैबिनेट से बर्खास्त होने के बाद इस ऊंचाई पर पहुंचे हैं. जब राबड़ी कैबिनेट में यह बात सामने आई कि मंत्री बनने के समय सम्राट चौधरी की उम्र कम थी, यानी वे नाबालिग थे, तो उनके खिलाफ झूठी और गलत जानकारी देने का केस दर्ज किया गया और कार्रवाई की गई.

असल में, सम्राट चौधरी ने मंत्री पद से मुख्यमंत्री बनने के अपने सफर में कई मिथक तोड़े हैं. सम्राट चौधरी बिहार के दूसरे ऐसे नेता हैं जो डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे और फिर मुख्यमंत्री बने. कर्पूरी ठाकुर बिहार के इकलौते ऐसे नेता हैं जो डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे और बाद में मुख्यमंत्री बने. सुशील कुमार मोदी, तार किशोर प्रसाद, विजय कुमार सिन्हा और तेजस्वी यादव के साथ-साथ अनुग्रह नारायण सिंह, जो पहले डिप्टी चीफ मिनिस्टर बने थे, यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए. पहली महिला डिप्टी चीफ मिनिस्टर रेणु देवी भी चीफ मिनिस्टर नहीं बन पाईं. सम्राट चौधरी ने अब अपना नाम उस लिस्ट में जोड़ लिया है, जिसमें अब तक सिर्फ कर्पूरी ठाकुर का नाम था.

सम्राट चौधरी ने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी. हालांकि, बाद में वे जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए. 2014 में जब चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को चीफ मिनिस्टर बनाने का फैसला किया, तो वे जीतन राम मांझी की सरकार में मिनिस्टर रहे. जनता दल (यूनाइटेड) छोड़ने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

डिग्री पर सवाल

अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत में कम उम्र को लेकर विवाद झेलने वाले सम्राट चौधरी चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार को हटाने की मांग को लेकर पगड़ी बांधने के लिए भी खबरों में रहे थे. उनकी एजुकेशन को लेकर कई सवाल उठाए गए थे. उस समय खुद जनता दल (यूनाइटेड) ने उनकी डिग्री पर सवाल उठाए थे. 2025 के असेंबली इलेक्शन के दौरान भी उनकी डिग्री पर सवाल उठाए गए थे. जन सूरज के फाउंडर प्रशांत किशोर ने भी उन पर कई आरोप लगाए थे. एक प्रोग्राम में उनके हाफ-डेबिट के इस्तेमाल से भी काफी विवाद हुआ था.

MORE NEWS

Home > राज्य > बिहार > Who is Samrat Chaudhary: 19 साल की उम्र में ही बन गए थे मंत्री… जानें कौन हैं सम्राट चौधरी, जो बनेंगे बिहार के नए सीएम!

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: 2026-04-14 14:40:29

Mobile Ads 1x1

Who is Samrat Chaudhary: बिहार में एक नए पॉलिटिकल दौर की शुरुआत होने वाली है. राज्य को अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है. सम्राट चौधरी का नाम फाइनल हो गया है. सम्राट बिहार के 24वें मुख्यमंत्री होंगे. उन्हें राजनीति विरासत में मिली है. सम्राट के पिता शकुनि चौधरी बिहार के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं. बिहार के नए मुख्यमंत्री ने लंबा सफर तय किया है. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी. वह पहले जेडीयू और बाद में बीजेपी में भी शामिल हुए.

शकुनि चौधरी टॉप नेताओं में से ए

सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनि चौधरी राज्य के टॉप नेताओं में से एक माने जाते हैं. सम्राट चौधरी ने अपने पिता की देखरेख में ही अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत की. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने राजनीति का ककहरा लालू प्रसाद यादव, यानी जिस RJD के वे विरोधी हैं, की उसी स्कूल में सीखा. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत RJD से की थी.

ममता कुमारी से हुई शादी

16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी की शादी ममता कुमारी से हुई थी. उनके पिता का नाम शकुनि चौधरी और मां का नाम पार्वती देवी है. सम्राट चौधरी के एक बेटा और एक बेटी है. उनके पिता शकुनि चौधरी सोशलिस्ट नेता माने जाते हैं. शकुनि चौधरी कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी थे. बाद में शकुनि चौधरी ने अपनी पॉलिटिकल दिशा बदली और नीतीश कुमार के साथ जुड़ गए.

कैबिनेट से निकाले गए

19 साल की उम्र में पहली बार मंत्री बने सम्राट चौधरी को कैबिनेट से निकाल दिया गया था. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि उन्हें निकालने की वजह उनकी उम्र को लेकर हुआ विवाद था. असल में, सम्राट चौधरी उस समय की RJD सरकार में कृषि राज्य मंत्री थे. कहा तो यह भी जाता है कि उनके लिए एक खास डिपार्टमेंट बनाया गया था.

यह भी कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी, जिसने सम्राट चौधरी को अपना चेहरा चुना था, ने उनकी उम्र पर एतराज़ जताया था. गवर्नर ने उन्हें कम उम्र की वजह से हटा दिया था. हालांकि, बाद में सम्राट चौधरी BJP में शामिल हो गए और अपनी पॉलिटिकल पहचान बनाई. हालांकि, उनकी उम्र को लेकर यह विवाद उनके पूरे पॉलिटिकल करियर का अहम हिस्सा रहा है.

1999 में उस समय के गवर्नर सूरजभान ने सम्राट चौधरी को उनकी कम उम्र की वजह से बिहार कैबिनेट से हटा दिया था. गवर्नर ने न सिर्फ उन्हें उनकी कथित कम उम्र की वजह से कैबिनेट से निकाल दिया, बल्कि उनके खिलाफ जालसाजी, गलत बयानी, झूठी घोषणा और धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का भी आदेश दिया. तब पता चला कि सम्राट की उम्र 26 साल लिखी थी, जबकि उसके स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में उसकी उम्र 31 साल लिखी थी. 1995 में फाइल किए गए एक मर्डर केस में, सम्राट चौधरी ने दावा किया था कि वह नाबालिग है. इसके अलावा, उसका बड़ा भाई, जो उस समय इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, 22 साल का था.

सम्राट चौधरी की उम्र को लेकर विवाद सबसे पहले तब सामने आया जब उस समय के समता पार्टी के नेता रघुनाथ झा और पीके सिन्हा ने उस समय के गवर्नर जस्टिस बीएम लाल और राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर, एके बसु को बताया कि चौधरी 25 साल के नहीं हैं और इसलिए मंत्री बनने के लायक नहीं हैं. इसके बाद जस्टिस लाल ने एके बसु को मामले की जांच करने और 25 दिनों के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. हालांकि जस्टिस बाद में रिटायर हो गए, लेकिन यह मामला तब फिर से सामने आया जब एक्टिंग गवर्नर ने CEO को 5 नवंबर तक पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.

रिपोर्ट में कहा गया कि सम्राट चौधरी ने जांच करने वालों के साथ सहयोग नहीं किया था. यह भी दावा किया गया कि गवर्नर के पास उनकी उम्र से जुड़े कई डॉक्यूमेंट्स थे, जिनमें बहुत सारी गड़बड़ियां थीं.

पॉलिटिकल करियर

सम्राट चौधरी का पॉलिटिकल करियर भी काफी दिलचस्प रहा है. असल में, सम्राट चौधरी शायद पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो कैबिनेट से बर्खास्त होने के बाद इस ऊंचाई पर पहुंचे हैं. जब राबड़ी कैबिनेट में यह बात सामने आई कि मंत्री बनने के समय सम्राट चौधरी की उम्र कम थी, यानी वे नाबालिग थे, तो उनके खिलाफ झूठी और गलत जानकारी देने का केस दर्ज किया गया और कार्रवाई की गई.

असल में, सम्राट चौधरी ने मंत्री पद से मुख्यमंत्री बनने के अपने सफर में कई मिथक तोड़े हैं. सम्राट चौधरी बिहार के दूसरे ऐसे नेता हैं जो डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे और फिर मुख्यमंत्री बने. कर्पूरी ठाकुर बिहार के इकलौते ऐसे नेता हैं जो डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे और बाद में मुख्यमंत्री बने. सुशील कुमार मोदी, तार किशोर प्रसाद, विजय कुमार सिन्हा और तेजस्वी यादव के साथ-साथ अनुग्रह नारायण सिंह, जो पहले डिप्टी चीफ मिनिस्टर बने थे, यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए. पहली महिला डिप्टी चीफ मिनिस्टर रेणु देवी भी चीफ मिनिस्टर नहीं बन पाईं. सम्राट चौधरी ने अब अपना नाम उस लिस्ट में जोड़ लिया है, जिसमें अब तक सिर्फ कर्पूरी ठाकुर का नाम था.

सम्राट चौधरी ने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी. हालांकि, बाद में वे जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए. 2014 में जब चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को चीफ मिनिस्टर बनाने का फैसला किया, तो वे जीतन राम मांझी की सरकार में मिनिस्टर रहे. जनता दल (यूनाइटेड) छोड़ने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

डिग्री पर सवाल

अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत में कम उम्र को लेकर विवाद झेलने वाले सम्राट चौधरी चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार को हटाने की मांग को लेकर पगड़ी बांधने के लिए भी खबरों में रहे थे. उनकी एजुकेशन को लेकर कई सवाल उठाए गए थे. उस समय खुद जनता दल (यूनाइटेड) ने उनकी डिग्री पर सवाल उठाए थे. 2025 के असेंबली इलेक्शन के दौरान भी उनकी डिग्री पर सवाल उठाए गए थे. जन सूरज के फाउंडर प्रशांत किशोर ने भी उन पर कई आरोप लगाए थे. एक प्रोग्राम में उनके हाफ-डेबिट के इस्तेमाल से भी काफी विवाद हुआ था.

MORE NEWS