ED Raid: ईडी ने ने रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़े भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण मुआवजे में कथित 500 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायतों पर सोमवार को कुरूद में व्यापक कार्रवाई की. इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर और राइसमिल संघ के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर के ठिकानों पर घंटों तक जांच चली.
कुरूद में ED की मैराथन छापेमारी.
Bharatmala Project: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़े भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण मुआवजे में कथित 500 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायतों पर सोमवार को कुरूद में व्यापक कार्रवाई की. इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर और राइसमिल संघ के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर के ठिकानों पर घंटों तक जांच चली. हालांकि, देर रात तक चली इस कार्रवाई के बाद भी ईडी ने किसी घोटाले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
सोमवार तड़के करीब 6:30 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में 4 गाड़ियों में सवार 15 से अधिक अधिकारी शामिल थे. सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सशस्त्र जवान तैनात रहे.
भूपेंद्र चंद्राकर का निवास: यहां जांच करीब 16 घंटे तक चली और रात 10 बजे के बाद टीम बाहर निकली. देर शाम ईडी ने वित्तीय दस्तावेजों की जांच के लिए अपने एकाउंटेंट को भी मौके पर बुलाया. शाम के दौरान एक CPU अंदर ले जाया गया, जिससे डिजिटल साक्ष्य जुटाने की संभावना जताई जा रही है. रोशन चंद्राकर का ठिकाना: यहां टीम लगभग 13 घंटे तक दस्तावेजों की जांच करती रही और शाम 7:15 बजे रवाना हुई.
ईडी की जांच कथित तौर पर जमीन मुआवजे में हुई अनियमितताओं पर केंद्रित है. आरोप है कि अधिकारियों, बिचौलियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से अपात्र लोगों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया.
अपात्र व्यक्तियों को मुआवजा वितरण
दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और बैकडेट एंट्री
अभनपुर, दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव और मगरलोड सहित कई क्षेत्रों में संदिग्ध लेनदेन
इस कार्रवाई को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है.
अजय चंद्राकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं. यह छापेमारी संदेश है कि जो भी असहमति जताएगा, उसके खिलाफ एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाएगा.
फिलहाल ईडी जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है. अब तक किसी भी घोटाले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है—क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती है या राजनीतिक रणनीति? आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस सवाल का जवाब तय करेंगे.
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