राजधानी दिल्ली में जल्द ही पानी की समस्या (Water Problem) देखने को मिल सकती है. ऐसे में दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) ने लोगों से पानी को लेकर खास अपील की है.
Delhi Water Crisis
Delhi Water Crisis: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से जल संकट की समस्या दिखने वाली है. आने वाले दिनों में दिल्ली के निवासियों के लिए कुछ दिन बेहद ही चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं. इसके पीछे एक सबसी बड़ी वजह दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने आधिकारिक तौर पर यह सूचित किया है कि यमुना नदी में कच्चे पानी की कमी और प्रदूषण की वजह से राजधानी दिल्ली के कई प्रमुख वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) फिलहाल सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं. जिसका सीधा-सीधा मतलब है कि
वजीराबाद प्लांट के ठप होने का असर दिल्ली के आधे से ज्यादा हिस्सों में देखने को मिलने वाला है.
दरअसल, पानी की समस्या को ध्यान में रखते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यह स्थिति 4 फरवरी 2026 तक बनी रह सकती है. आपूर्ति बाधित होने की वजह से हैदरपुर (दोनों फेज), बवाना, नांगलोई, द्वारका और चंद्रावल जैसे बड़े प्लांट्स से जुड़े इलाकों में पानी की समस्या देखने को मिलेगी या फिर आपूर्ति पूरी तरह से बंद रहेगी. इसके अलावा, डीजेबी ने प्रभावित क्षेत्रों की एक विस्तृत सूची को जोरी कर लोगों से पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए खास अपील की है. इतना ही नहीं, आपात स्थिति के लिए विभाग ने वाटर टैंकरों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं.
जानकारी के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में जल संकट की समस्या पिछले कई सालों से चलती रही है. इसकी मुख्य वजह पड़ोसी राज्यों से आने वाले पानी में कमी और यमुना नदी में लगातार बढ़ता प्रदूषण बताया जा रहा है. दरअसल, जब यमुना में अमोनिया का स्तर 0.9 ppm (पार्ट्स प्रति मिलियन) से ऊपर चला जाता है, तो वजीराबाद और चंद्रावल जैसे पुराने प्लांट्स में पानी को साफ करना बेहद ही मुश्किल हो जाता है. फिलहाल, वर्तमान स्थिति के बारे में बात करें तो, यह स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा है, जिससे प्लांटों की उत्पादन क्षमता तेजी से गिरने लगई है.
डीजेबी के मुताबिक, पानी की यह कटौती दिल्ली के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करने वाली है. जिसमें सबसे पहले उत्तर और मध्य दिल्ली के इलाके शामिल हैं. सिविल लाइन्स, हिंदू राव अस्पताल क्षेत्र, करोल बाग, नया बाजार, और चांदनी चौक. दूसरे में दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के इलाकों को शामिल किया गया है. द्वारका के सभी सेक्टर, मटियाला, पालम, और आईजीआई हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र. इसके अलावा, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के इलाकों के बारे में बात करें तो, पीतमपुरा, शालीमार बाग, रोहिणी, सरस्वती विहार, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, राजा गार्डन और राजौरी गार्डन शामिल हैं. एनडीएमसी (Lutyens Delhi) में राष्ट्रपति भवन, संसद मार्ग और कनाट प्लेस जैसे वीआईपी क्षेत्रों में भी आपूर्ति कम दबाव के साथ देखने को मिल सकती है.

फिलहाल, दिल्ली जल बोर्ड ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन बैठकें की हैं. जिसमें बोर्ड ने साफ शब्दों में कहा है कि नागरिक मुफ्त वॉटर टैंकर मंगवाने के लिए हेल्पलाइन 1916 इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा लोगों से सख्त अपील की गई है कि वे सुबह और शाम के समय आने वाले पानी का ही इस्तेमाल करें ताकि दिनभर के आवश्यक कार्यों में किसी भी तरह की परेशानी से सामना नहीं करना पड़े.
तो वहीं, दूसरी तरफ हरियाणा से पानी की रिहाई को लेकर लगातार बातचीत की जा रही है और तकनीकी टीमें 24 घंटे प्लांट्स की निगरानी करने में जुटे हुए हैं, ताकि अमोनिया का स्तर गिरते ही उत्पादन का काम जल्द ही शुरू किया जा सके.
देश की राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों के आखिरी और गर्मियों की शुरुआत में इस तरह का संकट सबसे ज्यादा देखने को मिलता है, लेकिन इस बार कई प्रमुख प्लांट्स का एक साथ प्रभावित होना स्थिति को और भी ज्यादा गंभीर बनाने का काम कर रहा है. तो वहीं, 4 फरवरी तक का समय दिल्लीवासियों के लिए धैर्य रखने और संसाधनों का सही प्रबंधन करने का है.
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