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Dhaula Kuan Name Facts: क्या वाकई है धौला कुआं में कोई कुआं ? या यूं ही पड़ गया नाम, जानिए इसके पीछे का रहस्य

Dhaula Kuan Name History: दिल्ली में मौजूद धौला कुआं सिर्फ एक चौराहे की तरह काम नहीं करता है. बल्कि इसका नाम भी लोगों के लिए एक रहस्य है. जानिए आखिर क्या है इसके नाम के पीछे की कहानी.

Dhaula Kuan Name History: अगर आप दिल्ली के बासिदें हैं, तो धौला कुआं नाम की जगह को जरूर जानते होंगे. यह एक जंक्शन की तरह काम करता है, जो तीन राज्यों यूपी, हरियाणा और राजस्थान को जोड़ता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इस जगह का नाम धौला कुआं ही क्यों पड़ा? क्या वाकई वहां कोई कुआं है? या यूं ही पड़ गया इसका नाम. इन सबके बारे में विस्तार से जानेंगे इस खबर में. 

क्या वाकई है यहां कोई कुआं?

आपको बता दें कि धौला कुआं क्षेत्र का नाम एक कुएं के नाम पर रखा गया है, लेकिन लोगों ने शायद ही वहां मौजदू कुएं को देखा होगा. धौला कुआं मेट्रो स्टेशन और पेट्रोल पंप के पास एक डीडीए पार्क है. इस पार्क में जाते ही आपको एक कुआं दिखाई देता है. हालांकि, इस समय इसे लोहे की जाली से ढक दिया गया है, जहां वर्तमान में एक पंप भी लगाया है. इस पूरे एरिया का इतिहास इसी कुएं से जुड़ा है. इसी वजह से यहां के सड़क, चौराहों और मेट्रो स्टेशन का नाम भी इसी के नाम पर रखा गया है. यह दिल्ली मेट्रो के सबसे ऊंचे स्टेशनों में से एक है, जिसकी ऊंचाई लगभग 23.6 मीटर है.

क्या है इसका ऐतिहासिक कनेक्शन?

अब हम आपको धौला कुआं के ऐतिहासिक कनेक्शन के बारे में बताते हैं. बताया जाता है कि इस कुएं का निर्माण मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने करवाया था. साथ ही कहा जाता है कि इस कुएं में पानी प्राकृतिक रूप से आता है. धौला कुआं नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह कुआं सफेद पत्थरों से बना था, जिसके कारण कुएं के पानी का रंग भी सफेद दिखाई देता है. इतना ही नहीं, इसका कनेक्शन 1857 की क्रांति से भी जुड़ा है. बताया जाता है कि इसी जगह पर क्रांतिकारियों ने खड़े होकर शपथ ली थी कि वो अंग्रेजी हुकूमत के सामने नहीं झुकेंगे और आजादी लेकर रहेंगे.

किसानों के लिए प्रयोग होता था पानी

यहां चौराहे और मेट्रो स्टेशन बनने से पहले कुएं के पानी को वहां मौजूद स्थानीय लोग प्रयोग करते थे. साथ ही किसान भी अपने खेतों की सिंचाई के लिए इसका प्रयोग किया करते थे. हालांकि. अब दिल्ली के सबसे व्यस्ततम जगहों में से एक होने के कारण ये सब बंद हो गया है और इसे ढक दिया गया है. 

Kamesh Dwivedi

पिछले चार वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत. जी न्यूज और अमर उजाला डिजिटल में सेवाएं दे चुके हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ मनोरंजन की खबरों में रुचि. क्रिकेट, राजनीति के अलावा कविताएं लिखने और पढ़ने का भी शौक है.

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