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Iran Crown Jewels: इस खजाने को ट्रम्प भी नहीं लगा सकते हाथ! जानिए क्या है ‘क्राउन ज्वेल्स’ जो कंगाली में भी ईरान को बनाता है ‘किंग’!

ईरान की डूबती करेंसी के पीछे छिपा है एक 'अजेय' खजाना! जानिए उन क्राउन ज्वेल्स का सच जिसे दुनिया का कोई भी देश जब्त नहीं कर सकता. क्या ये हीरे बचाएंगे ईरान को?

ईरान में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों की लहर उठ रही है जिसके बाद यहां आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी बीच ईरानी रियाल की कीमत भी अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले और गिरती ही जा रही है. महंगाई, व्यापार को सीमित कर रहे हैं और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. लेकिन ईरान की राजधानी तेहरान में ज़मीन के काफी भीतर सबसे अजीब वित्तीय सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक कीमती रत्न छिपी हुई है. जी हाँ ये हैं ईरान के क्राउन ज्वेल्स। ये न तो सिर्फ़ संग्रहालय की वस्तुएं हैं और न ही महज़ शाही निशानी, यह ईरान की करेंसी रियाल को सहारा देने वाले एसेट के तौर पर हैं.

आपको बता दें कि आज के समय में दुनिया में कोई और देश अपने शाही खजाने का इस्तेमाल इस तरह नहीं करता है जिस तरह से ईरान करता है. आपने सुना या पढ़ा होगा कि जैसे ब्रिटेन के क्राउन ज्वेल्स लंदन के टॉवर में चमकते हैं, रूस की शाही विरासत काँच के शो-केस में बंद है, लेकिन ईरान का यह संग्रह देश की अर्थव्यवस्था में एक बड़ी भूमिका निभाता है. साफ़ तौर पर हिंदी भाषा में कहें तो इन्हें “पैसा” माना जाता है. अब बात आती है कि ईरान के क्राउन ज्वेल्स क्या हैं?

ईरान के क्राउन ज्वेल्स क्या हैं?

ईरान के क्राउन ज्वेल्स दुनिया के सबसे बड़े और सबसे कीमती रत्न-संग्रहों में गिने जाते हैं. सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान की तिजोरियों में रखे इस संग्रह में हीरे, पन्ने, माणिक, मोती, सोने की वस्तुएँ, औपचारिक सिंहासन और मुकुट शामिल हैं, जो सदियों की फ़ारसी इतिहास यात्रा को समेटे हुए हैं. 

लेकिन इनमें भी जो सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है वो है दार्या-ए-नूर जिसे ‘समुद्र-ए-रोशनी’ भी कहा जाता है. 182 कैरेट का हल्का गुलाबी हीरा, जो दुनिया के सबसे बड़े पिंक डायमंड्स में से एक है. इसके अलावा 51,000 से अधिक कीमती पत्थरों से जड़ा एक रत्न-जड़ित ग्लोब भी इस संग्रह का हिस्सा है.

इन्हें सिर्फ़ शाही खजाने के बजाय फाइनेंशियल एसेट क्यों माना जाता है?

अब बात आती है कि इन्हें सिर्फ़ शाही खजाने के बजाय फाइनेंशियल एसेट क्यों माना जाता है? तो आपको बता दें कि 1937 में रज़ा शाह पहलवी ने शाही खजाने को महल के नियंत्रण से निकालकर बैंक मेली (आज के सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान का पूर्ववर्ती) को सौंप दिया। इसके बाद ये जेवर शासक की निजी संपत्ति नहीं रहे. कानूनी और आर्थिक रूप से इन्हें राज्य की संपत्ति और रिज़र्व एसेट घोषित कर दिया गया, ठीक वैसे ही जैसे सोना या विदेशी मुद्रा भंडार.

1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान, जब राजशाही से जुड़े कई प्रतीकों को नष्ट या बेचा गया, तब भी ये जेवर सुरक्षित रहे, क्योंकि अब इन्हें शाही गहने नहीं, बल्कि राष्ट्रीय वित्तीय संपत्ति माना जाता था. इस्लामी गणराज्य ने भी इस व्यवस्था को बनाए रखा.

करेंसी को ‘बैक’ करने का मतलब क्या होता है?

आज ज़्यादातर मुद्राएं “फिएट करेंसी” होती हैं. उनकी कीमत सरकार, अर्थव्यवस्था और संस्थानों पर भरोसे से तय होती है. ऐसा कोई भौतिक सामान नहीं होता जिसे दिखाकर कहा जा सके कि यह नोट इतनी मात्रा में सोने के बराबर है. इतिहास में कई देश गोल्ड स्टैंडर्ड पर चलते थे, जहाँ हर मुद्रा इकाई एक निश्चित मात्रा में सोने से जुड़ी होती थी, ताकि सरकारें असीमित पैसा न छाप सकें. ईरान की व्यवस्था उसी पुराने तर्क की गूंज है. फर्क सिर्फ़ इतना है कि सोने की ईंटों के अलावा, ईरान अपने क्राउन ज्वेल्स को भी रिज़र्व एसेट मानता है। ये सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान की बैलेंस शीट पर दर्ज हैं.

क्राउन ज्वेल्स देश की करेंसी को कैसे सपोर्ट करते हैं?

ये ज्वेल्स सैद्धांतिक रूप से रियाल पर भरोसे को मज़बूत करने और बेहिसाब नोट छापने पर रोक लगाने का काम करते हैं. इन्हें एक असाधारण गिरवी व्यवस्था की तरह समझा जा सकता है. ये जेवर न बेचे जाते हैं, न पहने जाते हैं और शायद ही कभी अपनी जगह से हिलते हैं, लेकिन उनकी अपार कीमत अस्थिर समय में मुद्रा को सहारा देने का दावा करती है.

आर्थिक मुश्किलों के समय इनकी भूमिका क्या होती है?

ईरान में महंगाई, प्रतिबंध और आर्थिक दबाव के दौर में ये ज्वेल्स एक अलग तरह का सहारा बनते हैं. इन्हें न तो विदेशी सरकारें फ्रीज़ कर सकती हैं, न जब्त और न ही बाज़ार इन्हें अवमूल्यित कर सकता है. ये सीधे तौर पर सड़क पर रियाल की कीमत को स्थिर नहीं करते. महंगाई और विनिमय दर तात्कालिक आर्थिक कारकों से तय होती हैं. लेकिन प्रतीकात्मक और संस्थागत स्तर पर, ये एक ब्रेक की तरह काम करते हैं, यह याद दिलाते हुए कि करेंसी के पीछे वास्तविक मूल्य की एक सीमित, ठोस संपत्ति मौजूद है.

Shivani Singh

नमस्ते, मैं हूँ शिवानी सिंह. पिछले 5 से अधिक वर्षों से डिजिटल मीडिया में सब-एडिटर, एंकर और कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में सक्रिय हूँ. 'Chakde Cricket', 'InKhabar' और 'Bihari News' जैसे प्रमुख मीडिया हाउसों में काम करने के बाद, वर्तमान में मैं 'इंडिया न्यूज़' में अपनी सेवाएँ दे रही हूँ. क्रिकेट के मैदान से जुड़ी इनसाइड स्टोरीज़, मैच एनालिसिस और आंकड़ों की बारीकियों को डिकोड करना मेरी मुख्य विशेषज्ञता है. क्रिकेट के अलावा, मैं बिजनेस/फाइनेंस (मार्केट ट्रेंड्स, सरकारी योजनाएं और पर्सनल फाइनेंस), राजनीति और बॉलीवुड के ज्वलंत मुद्दों पर भी पैनी नज़र रखती हूँ. मेरा उद्देश्य हर जटिल विषय को आपके लिए आसान भाषा में प्रस्तुत करना है.

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