Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में बड़ा फैसला देते हुए 60 से अधिक यूपीएससी अभ्यर्थियों को राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि केवल माता-पिता की सैलरी के बेस पर क्रीमी लेयर तय नहीं होगी और कुछ मामलों में कृषि आय भी शामिल नहीं होगी.
OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. इसमें 60 से ज्यादा यूपीएससी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल माता-पिता की सैलरी के आधार पर ओबीसी क्रीमी लेयर तय नहीं की जा सकती है.
साथ ही इसमें कुछ मामलों में कृषि आय को इसमें शामिल नहीं होगा. इस बड़ी फैसले के बाद पहले क्रीमी लेयर की गलत व्याख्या के कारण बाहर किए गए कई उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति का रास्ता शुरु हो सकता है.
60 से अधिक यूपीएससी कैंडिडेट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. यूपीएससी परीक्षा से बाहर हुए OBC कैंडिडेट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 60 से अधिक UPSC कैंडिडेट को नियुक्त करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर को परिभाषित करते हुए बड़ी राहत दी है. अदालत ने कहा है कि अगर माता-पिता ग्रुप IV में सरकारी नौकरी करते हैं. साथ ही अगर उनकी आय ₹8 लाख से ऊपर हो गई है, तो भी उसे क्रीमी लेयर में नहीं जोड़ा जाएगा. साथ ही ऐसे मामलों में कृषि आय को भी नहीं जोड़ा जाएगा
केवल ‘अन्य स्रोतों’ (बिजनेस, प्रॉपर्टी आदि) से परिवारिक आय (3 साल) ₹8 लाख या वर्ष से कम होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार DoPT ने 2004 में जो पत्र निकाला था, उसका पैरा 9 अब अमान्य हो गया है. इस अनुसार बैंक या प्राइवेट नौकरी वालों की सैलरी मात्र को क्रिमी लेयर नहीं माना जा सकता है.
ऐसे मामलों में पहले पोस्ट की सरकारी ग्रुप III और IV के साथ समानक तय किया जाएगा. तब तक केवल 1993 OM लागू रहेगा. इस निर्णय का फायदा अनेकों ऐसे लोगों को मिलेगा, जिन्हें पहले क्रीमी लेयर की गलत परिभाषा के कारण ओबीसी रिजर्वेशन से बाहर रखा गया और वो नौकरी में तो हैं, लेकिन सही कैडर में नहीं हैं.
ऐसे सभी मामलों में पिछले डेट (retrospectively) ये फैसला लागू होगा . DOPT को इसे लागू करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है. अगर जरूरी हुआ, तो अतिरिक्त पद बनायी जाएगी, ताकि दूसरे वर्गों के कर्मचारियों की सीनियरिटी पर असर न पड़े. भविष्य के सिविल सेवा परीक्षा में वैध OBC-NCL सर्टिफिकेट (DM/तहसीलदार से) को प्राथमिकता मिलेगी, सैलरी आधारित रिजेक्शन बंद होगा.
इस निर्णय से ओबीसी आरक्षण का मूल मकसद बहाल होगा. रोहित नाथन (CSE-2012), केतन बैच (CSE-2015) जैसे अनेकों मामलों में DoPT को 6 महीने में फिर से सत्यापन कर OBC-NCL स्टेटस देना होगा.
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