दिल्ली में IRS अधिकारी की बेटी की हत्या मामले में फिंगरप्रिंट से लॉकर न खुलने को लेकर सवाल उठ रहा है. ऐसे में जाने-माने साइबर एक्सपर्ट और वरिष्ठ वकील राघवेंद्र प्रताप सिंह ने इसे बेहद जघन्य अपराध बताया.
IRS Officer Daughter Case
IRS Officer Daughter Murder Case: दिल्ली में IRS अधिकारी की बेटी की हत्या मामले में सामने आया कि आरोपी राहुल मीणा ने पहले 22 वर्षीय युवती की हत्या की. इसके बाद लॉकर खोलने के लिए उसके फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल करने लगा. हालांकि उसके फिंगरप्रिंट से लॉकर नहीं खुला, जिसके बाद उसने स्क्रूड्राइवर की मदद से लॉकर तोड़ा. इस बारे में दिल्ली के जाने-माने साइबर एक्सपर्ट और वरिष्ठ वकील राघवेंद्र प्रताप सिंह ने लोकल18 से बात करते हुए हैरान करने वाला खुलासा किया है.
दिल्ली के कैलाश हिल्स में आईआरएस अधिकारी की बेटी की हत्या के मामले में खुलासा हुआ था कि राहुल मीणा ने कथित तौर पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद लूटपाट करने के लिए वह पीड़िता को चौथी मंजिल से घसीटते हुए तीसरी मंजिल पर लाया. उसने फिंगरप्रिंट लगाकर लॉकर खोलने की कोशिश की. हालांकि फिंगरप्रिंट लगाने के बावजूद लॉकर नहीं खुल सका. इसको लेकर काफी सवाल उठे कि लॉकर पर परिवार के सदस्यों के फिंगरप्रिंट थे, तो पीड़िता के हाथ से लॉकर क्यों नहीं खुला. इस पर जवाब देते हुए जाने-माने साइबर एक्सपर्ट और वरिष्ठ वकील राघवेंद्र प्रताप सिंह ने इसे बेहद जघन्य अपराध बताया.
साथ ही उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके फिंगरप्रिंट कागज पर लिए जा सकते हैं. लेकिन वो डिजिटल या बायोमेट्रिक सिस्टम में मृतक के फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इनमें बैंक का लॉकर, कैश लॉकर या मोबाइल फोन का फिंगरप्रिंट शामिल हो सकता है. उन्होंने इसके पीछे वैज्ञानिक कारण बताते हुए कहा कि मानव शरीर में जैव-विद्युत यानी बायो-इलेक्ट्रिक सक्रिय होती है. ये केवल जीवित अवस्था में ही काम करती है. मरने के बाद ये सक्रियता खत्म हो जाती है. इसके कारण बायोमेट्रिक सिस्टम फिंगरप्रिंट को पहचान नहीं पाते.
उन्होंने बताया कि मृत्यु होने के बाद दिल की धड़कन रुक जाती है और खून का संचार भी बंद हो जाता है. इससे जैव-विद्युत सक्रियता समाप्त हो जाती है. बायोमेट्रिक सिस्टम, डिजिटल लॉकर और मोबाइल अनलॉक जैसे कामों में फिंगरप्रिंट स्वीकार नहीं होता. कहा जा रहा है कि मृतका के मरने के बाद आरोपी ने उसे नीचे लाने में देर कर दी और तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. इसके कारण फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल करने के बावजूद लॉकर नहीं खुला.
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