Harsha Richhariya: महाकुंभ के दौरान वायरल हुई हर्षा रिछारिया ने सांसारिक जीवन को त्याग कर साध्वी का रूप धारण कर लिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या हिंदू धर्म में महिलाएं संन्यास ले सकती हैं?
क्या हिंदू धर्म में संन्यास ले सकती हैं महिलाएं?
Harshanand Giri Maharaj: महाकुंभ के दौरान वायरल हुई हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं. ऐसा इसलिए हैं क्योंकि उसने औपचारिक रूप से सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया है. उज्जैन में रविवार को मंगलनाथ स्थित गंगा घाट पर हर्षा ने मौनी तीर्थ पीठाधीश्वर सुमनाजी महाराज से औपचारिक दीक्षा संस्कार प्राप्त करने के बाद संन्यासी जीवन अपना लिया. एक साध्वी बनने के बाद उनका नाम अब हर्षानंद गिरि महाराज हो गया है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के भोपाल की रहने वाली हर्षा रिछारिया पहले एक एंकर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और मेकअप आर्टिस्ट के रूप में काम करती थीं. 2025 के महाकुंभ के दौरान हर्षा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही थीं.
महाकुंभ के दौरान ही वो साधु-संतों के साथ नजर आने लगी थी. हर्षा की तस्वीरों के साथ खूबसूरत साध्वी ट्रेंड कर रहा था. जिसकी वजह से उसकी लोकप्रियता में चार चांद लग गया. हालांकि बाद में जब उनकी पुरानी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें एंकरिंग और ग्लैमर इंडस्ट्री में उनकी पिछली भागीदारी का पता चला तो एक विवाद खड़ा हो गया. तब से हर्षा रिछारिया लगातार सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं.
बताया जा रहा है कि हर्षा रिछारिया 19 अप्रैल को उज्जैन पहुंचीं और उन्होंने मंगलनाथ स्थित गंगा घाट पर मोनी तीर्थ पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर सुमनाजी महाराज से दीक्षा लेकर सन्यास अपनाया. संन्यास लेने के बाद हर्षा रिछारिया से हर्षानंद गिरि बनी साध्वी ने कहा कि प्रयागराज कुंभ से उन्हें संकेत मिले थे कि किस दिशा में जाना है. गुरुजी के मार्गदर्शन में संध्या दीक्षा हुई है, उनके आशीर्वाद से आगे बढ़ेंगे. गुरुजी ने शपथ दिलवाई है कि ऐसा कोई काम ना हो जिससे संन्यास से जीवन कलंकित हो.
क्या हिंदू धर्म में महिला सन्यांस ले सकती हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए परम पूज्य नव योगेन्द्र स्वामी ने कहा कि स्त्रियों को गेरुवा वस्त्र धारण करने की मनाही है. स्त्रियों को भक्ति करने का उतना ही अधिकार है. जितना पुरुषों को है. जरूरी नहीं है कि संन्यास लेकर ही भगवान मिलते हैं. संन्यास लेकर अगर कोई उसका पालन नहीं करे तो वो नर्क में जाएगा. संन्यास कोई भी ले सकता है. इसके लिए कोई बंधन नहीं है.
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