हरियाणा के पानीपत जिले की समालखा नगर पालिका की घोर लापरवाही उस समय देखने को मिली जब 6 महीने बीत जाने के बावजूद भी आज तक आवारा कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए आज तक टेंडर छोड़ने में नाकाम रही। टेंडर प्रक्रिया मे सभी नियमों को ताक पर रखने का काम किया गया। फिलहाल भी दो एजेंसी द्वारा आवेदन जमा कराए गए हैं इसी को लेकर नगर पालिका सचिव ने एडिशनल सफाई निरीक्षक को टेंडर खोलने के लिए दिशा निर्देश दिए।
India News (इंडिया न्यूज), Stray Dogs : हरियाणा के पानीपत जिले की समालखा नगर पालिका की घोर लापरवाही उस समय देखने को मिली जब 6 महीने बीत जाने के बावजूद भी आज तक आवारा कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए आज तक टेंडर छोड़ने में नाकाम रही। टेंडर प्रक्रिया मे सभी नियमों को ताक पर रखने का काम किया गया। फिलहाल भी दो एजेंसी द्वारा आवेदन जमा कराए गए हैं इसी को लेकर नगर पालिका सचिव ने एडिशनल सफाई निरीक्षक को टेंडर खोलने के लिए दिशा निर्देश दिए।
वहीं अप्रैल से अगस्त महीने तक गांव व शहर में 1127 लोग आवारा कुत्तों के शिकार होने का मामला सामने आया है जबकि 84 लोग बंदरों व 11 लोग बिल्ली के काटने का शिकार हुए जिनका हाईवे पर सामान्य अस्पताल समालखा में इलाज कराया गया या चल रहा है। उल्लेखनीय है कि कोरोना काल के बाद शहर व गांव में आवारा कुत्तों व बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा बुरा हाल शहर में है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट नगर पालिका की पोल खोल रही है। इसको लेकर समय-समय पर सामान्य अस्पताल समालखा की तरफ से बढ़ते आंकड़ों की रिपोर्ट नगर पालिका को भेजी जा रही है।
आवारा कुत्तों व बंदरों की बढ़ती संख्या के चलते खासकर महिलाओं बच्चों व बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। शहर के गली मोहल्ले में आवारा कुत्ते झुंड के रूप में बैठे रहते हैं और वहां से गुजरने वाले लोगों को काटने के लिए पीछे दौड़ पड़ते हैं वही सुबह व रात के समय सैर के लिए आते जाते लोगों को लाठी आदि का सहारा लेना पड़ रहा है। यही नहीं वाहन से गुजरने पर आवारा कुत्ते काटने के लिए काफी दूरी गाड़ी का पीछा करते हैं। इसके अलावा रात के समय गली मोहल्ले में बैठे आवारा कुत्तों के भौंकने से मोहल्ले वासियों की नींद हराम हो रही है।
सामान्य अस्पताल समालखा के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में गांव व शहर में 2550 लोग आवारा कुत्तों का शिकार हो गए थे जबकि इसी साल अप्रैल से लेकर अगस्त महीने में गांव व शहर मे 1127 लोग आवारा कुत्तों के काटने का शिकार होने का मामला सामने आया है जबकि 84 लोग बंदरों व 11 लोग बिल्ली के काटने का शिकार हो गए जिनका सामान्य अस्पताल समालखा में इलाज कराया गया या चल रहा है।
बताया जा रहा है कि आवारा कुत्तों के काटने के मामले में समालखा नंबर वन पर है। स्थिति को देखते हुए गत 19 मार्च को समालखा नगर पालिका की ओर से शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी जिसमें 7 दिन का समय निर्धारित किया गया लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने पर 6 अप्रैल के आसपास रिकॉल टेंडर पुनः लगाया गया।
इसके बाद से लेकर अब तक दो एजेंसी द्वारा आवेदन जमा कराए गए। खास बात यह है कि 6 महीने का समय बीत जाने के बावजूद भी आज तक नगर पालिका टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाई इस प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार करने का काम किया जा रहा है जिसको लेकर नगर पालिका की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं ऐसे हालात यहां पर देखने को मिल रहे हैं। इसमें बताया गया था कि आवारा कुत्तों की नसबंदी करके वहीं पर छोड़ने का काम किया जाएगा।
यह भी बताया जा रहा है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 1100 से अधिक है। इस संबंध में समालखा नगर पालिका सचिव मनीष शर्मा ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद एडिशनल सफाई निरीक्षक को टेंडर खोलने के लिए कहा गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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