धार भोजशाला सर्वे की 2000 पन्नों की ASI रिपोर्ट में क्या निकला? खुदाई में मिलीं मूर्तियां और प्राचीन शिलालेख खोल रहे हैं कई गहरे राज. जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी...
ASI की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि यह पूरा ढांचा राजा भोज और उनके पूर्वजों (परमार राजवंश) द्वारा बनवाया गया था
Bhojshala ASI Survey Report: सालों से जिस भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर बहस चल रही थी, उसमें अब एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी जो 2,000 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी है, उसके निष्कर्ष किसी को भी चौंका सकते हैं. भोजशाला विवाद में, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने दोनों पक्षों को दो हफ़्ते के अंदर ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया) की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज करने का निर्देश दिया है. ASI ने 98 दिन के सर्वे के बाद तैयार की गई 10 वॉल्यूम में 2,089 पेज की रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में कई आर्कियोलॉजिकल और धार्मिक सबूतों का ज़िक्र किया गया है. सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉम्प्लेक्स के अंदर भगवान शिव, विष्णु, वासुकी नाग और गणेश की मूर्तियों समेत कई पुरानी मूर्तियां और कलाकृतियां मिली हैं, जिनका केमिकल ट्रीटमेंट करके साइंटिफिक सबूत के तौर पर पेश किया गया है. इसके अलावा, सर्वे में इस बात के भी सबूत मिले हैं कि भोजशाला से मिले पुराने अवशेषों का इस्तेमाल कमाल मौला मस्जिद बनाने में किया गया था. यह बात इस मामले को और भी सेंसिटिव बनाती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ASI को कई आर्कियोलॉजिकल अवशेष मिले हैं, जिनमें भगवान शिव और वासुकी नाग (सात फन वाला सांप) की पौराणिक मूर्तियां शामिल हैं. सर्वे में 1,700 से ज़्यादा कलाकृतियां मिलीं, जिनमें कई मूर्तियां, स्ट्रक्चर, खंभे, दीवारें और म्यूरल शामिल हैं. ASI के सर्वे, खुदाई, आर्काइवल स्टडी और शिलालेखों की जांच से संस्कृत, देवनागरी और नागरी लिपियों में बड़ी संख्या में शिलालेख, खंभों पर खुदे हुए श्लोक, देवी-देवताओं की मूर्तियों के अवशेष, मंदिर की बनावट और कॉम्प्लेक्स के अंदर और आसपास के आर्किटेक्चरल मटीरियल मिले हैं. कई शिलालेख 11वीं-12वीं सदी के हैं और परमार काल से जुड़े हैं. कुछ शिलालेखों में संस्कृत के श्लोक और देवी सरस्वती की तारीफ़ें हैं. कुछ हिस्सों में ‘श्री सरस्वतीयै नमः’ जैसे भजन और शिक्षण परंपरा के संकेत शामिल हैं. इन शिलालेखों की लिपि शैली, भाषा और कारीगरी के आधार पर, ASI ने उन्हें मध्यकालीन हिंदू मंदिर परंपरा से जुड़ा हुआ माना है.
कॉम्प्लेक्स के पिलर, बीम और बेस स्टोन पर फूलों की डिज़ाइन, कलात्मक डिज़ाइन, कीर्तिमुख, कमल की आकृतियाँ और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ दर्ज की गई हैं. कुछ पिलर पर इंसानी आकृतियों, डांस की मुद्राओं और पौराणिक प्रतीकों के अवशेष भी मिले हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि बेस लेवल पर, दीवार की लाइनें, पिलर के बेस और पत्थर के फर्श के अवशेष मिले हैं, जिनका ओरिएंटेशन और अरेंजमेंट पारंपरिक मंदिर आर्किटेक्चर से मेल खाता है. कुछ जगहों पर यज्ञ कुंड (फायर पिट) जैसे स्ट्रक्चरल फीचर्स भी देखे गए हैं.
कॉम्प्लेक्स में फ़ारसी और अरबी शिलालेख भी दर्ज किए गए हैं, जो बाद के समय में इसे मस्जिद या दरगाह के रूप में इस्तेमाल करने का संकेत देते हैं. कमाल मौला से जुड़े शिलालेखों और लिखावटों में सूफी परंपरा के रेफरेंस मिले हैं. ASI ने दर्ज किया है कि मौजूदा स्ट्रक्चर में इस्लामिक आर्किटेक्चर के एलिमेंट भी हैं, जिसमें मेहराब, मिहराब ओरिएंटेशन और कुछ फ़ारसी लिखावट शामिल हैं.
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