Delhi AAP MLAs: राघव चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसदों के आप छोड़ने के बाद ये अटकलें लगाई जा रही है कि दिल्ली के 22 विधायक भी राघव चड्ढा के साथ जा सकते हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्यसभा सांसद बनने से पहले राघव चड्ढा ने दिल्ली की राजनीति में गहरी पैठ बनाई थी.
दिल्ली के 22 आम आदमी पार्टी के विधायक भी जाएंगे राघव चड्ढा के साथ?
Delhi AAP MLAs: पंजाब से आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने आप छोड़कर बीजेपी में जाने का एलान किया है. उसके बाद से कभी पंजाब के विधायकों तो कभी दिल्ली के विधायकों के तोड़ने की खबर सामने आ रही है. इस बीच कई तहर की अटकलें लगाई जा रही है. आगे क्या होगा ये तो राधव चड्ढा को ही पता होगा. हालांकि कुछ लोगों का ये भी कहना है कि इस टूट के पीछे संदीप पाठक का हाथ है. हालांकि अलग-अलग मुंह, अलग-अलग बातें. राजनीति में अटकलें तो लगती रहती है.
आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार सुबह पंजाब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इससे इस बात की पुष्टि हो गई कि पार्टी के भीतर कोई बड़ा घटनाक्रम होने की संभावना है.
पंजाब में पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुसार आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ ईडी की जो छापेमारी हुई, वह निर्देशों के तहत की गई थी. उन्होंने आगे बताया कि इस समय पार्टी की मुख्य प्राथमिकता दिल्ली में अपने 22 विधायकों के समूह को एकजुट रखना है. इसके अलावा, एक नेता ने टिप्पणी करते हुए बताया कि जिन सांसदों ने पार्टी छोड़ी है, उनमें से अधिकतर कारोबारी है. इसके अलावा, ये भी अटकलें लगाई जा रही है कि आप छोड़ बीजेपी में गए सांसद 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप के ज्यादा से ज्यादा नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने की कोशिश कर रहे थे.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी के सामने अब दिल्ली में अपनी संगठनात्मक संरचना की अखंडता को बनाए रखने की चुनौती है. इसके अलावा, जिन 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी है. उनकी जगह नए नेताओं की पहचान करना भी आम आदमी पार्टी के लिए एक चुनौती है.
आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है. इसके अलावा, उन्होंने आगे कहा कि और भी लोग उनके खेमे में शामिल होने वाले हैं. उन्होंने पार्टी के भीतर और अधिक विभाजन की संभावना का भी संकेत दिया. राघव चड्ढा दिल्ली के पूर्व विधायक हैं और पंजाब में पार्टी के कामकाज की देखरेख करने से पहले वह राजधानी में बहुत सक्रिय थे. यह देखते हुए कि वह इस आंतरिक विभाजन के सूत्रधार के रूप में उभरे हैं, आम आदमी पार्टी अब उनके शब्दों को हल्के में लेने का जोखिम नहीं उठा सकती.
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