363 बिश्नोई के सिर कर दिए गए थे कलम, इस एक आंदोलन ने राजस्थान में किया नरसंहार, हर तरफ खून ही खून

Bishnoi Community: चिपको आंदोलन तो कुछ नही राजस्थान की धरती पर एक ऐसा आंदोलन छिड़ा था जिसने सैकड़ों लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। इस आंदोलन में 363 बिश्नोई समाज के लोगों ने पेड़ों से चिपककर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

Khejarli Massacre: पेड़ कुदरत के बनाए हुए वो नायाब तोहफा है जिसकी वजह से हम अपना जीवन सुकून से बिताते हैं. वहीं कई लोग ऐसे होते हैं जो कारोबार करने के उद्देश्य से इन्हे काट देते हैं. कभी आपने सोचा है अगर दुनिया में एक भी पेड़ नहीं बचेगा तो क्या होगा? तो लोगों का जीवन मिट्टी में मिल जाएगा. भारत में जब भी पर्यावरण आंदोलनों की बात होती है, तो सबसे पहले उत्तराखंड के चिपको आंदोलन का ज़िक्र आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस आंदोलन से लगभग 250 साल पहले राजस्थान की धरती पर एक ऐसा ही आंदोलन हुआ था जिस आंदोलन में सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गवा दी थी. जिसने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल कायम की थी.साल 1730 में बिश्नोई समुदाय के 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान गवा दी थी. आज हम इसी बारे में बात करेंगे. 

जानिए पूरी कहानी

इतिहासकार रामचंद्र गुहा और माधव गाडगिल ने अपनी पुस्तक “द फिसर्ड लैंड: एन इकोलॉजिकल हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया” में इस बलिदान का जिक्र किया है. जानकारी के मुताबिक 18वीं शताब्दी में, जोधपुर के महाराजा अभय सिंह ने अपने महल का निर्माण शुरू करवाया था. इतिहासकार रामचंद्र गुहा और माधव गाडगिल ने अपनी पुस्तक “द फ़िसर्ड लैंड: एन इकोलॉजिकल हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया” में इस घटना का वर्णन किया है. 18वीं शताब्दी में जोधपुर के महाराजा अभय सिंह ने अपने महल का निर्माण शुरू करवाया था। आदेशानुसार जैसे ही पेड़ों को काटने की तैयारी शुरू हुई, इसी दौरान गांव की एक महिला अमृता देवी और उसकी तीन बेटियाँ आगे आईं। उन्होंने पेड़ों को पकड़ लिया और उन्हें बचाने के लिए विरोध जताया। समझाने के बजाय, सेनापति ने कुल्हाड़ी चलाने का आदेश दे दिया. इस दौरान अमृता देवी और उनकी बेटियाँ शहीद हो गईं.अपने अंतिम क्षणों में उन्होंने कहा था, “आप सिर काट सकते हैं, लेकिन पेड़ नहीं। अमृता देवी के बलिदान ने पूरे बिश्नोई समुदाय को अंदर तक झंकझोर कर रख दिया. 

काटे गए थे सैकड़ों बिश्नोई

इस घटना ने बिश्नोई समाज को सदमे में डाल दिया था. जिसके बाद धीरे-धीरे गांव की औरतें, बच्चे और पुरुष भी खेजड़ी के पेड़ों से चिपक गए. इसके बाद सैनिकों ने एक-एक करके बेरहमी से उनके सिर काट दए.। इस घटना में कुल 363 लोग शहीद हुए। इतिहास इसे खेजड़ी नरसंहार के नाम से जानता है. जब इस घटना के बारे में महाराजा अभय सिंह को पता चला, तो वो व्यथित हो गए. उन्होंने तुरंत एक ताम्रपत्र जारी कर उस क्षेत्र को संरक्षित घोषित कर दिया. आदेश दिया गया कि बिश्नोई समाज के गांवों में पेड़ काटना या शिकार करना सख्त मना है.

Heena Khan

Share
Published by
Heena Khan

Recent Posts

जब Porsche से निकले Satua Baba तो लोग रह गए दंग, माघ मेले में छाए लग्जरी गाड़ियों का कलेक्शन रखने वाले बाबा

Satua Baba: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में एक आध्यात्मिक गुरु…

Last Updated: January 15, 2026 08:09:48 IST

BMC Election 2026: इन पार्टियों का भविष्य तय करेगा मुंबई का मानुष, वोटिंग के लिए इन डॉक्यूमेंट्स को ले जा सकेंगे अपने साथ!

BMC Election 2026: लगभग तीन साल के इंतज़ार के बाद मुंबई एक नया नागरिक प्रशासन…

Last Updated: January 15, 2026 07:25:48 IST

US Iran News: क्या ईरान की धमकी से डर गए ट्रंप, मिडिल ईस्ट से वापस बुलाई अपनी सेना?

US Iran News: कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को अमेरिका ने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और…

Last Updated: January 15, 2026 06:54:14 IST

Aaj Ka Panchang 15 January 2026: 15 जनवरी 2026, देखें आज का पंचांग! जानें दिन का शुभ मुहूर्त, क्या है राहुकाल का समय?

Today panchang 15 January 2026: आज 15 जनवरी 2026, बुधवार का दिन हिंदू पंचांग के…

Last Updated: January 14, 2026 21:15:53 IST

DC W vs UP W: रोमांचक मुकाबले में जीती दिल्ली, यूपी की लगातार तीसरी हार, लिजेल ली फिफ्टी

वूमेंस प्रीमियर लीग 2026 (Women's Premier League 2026) का सातवां मुकाबला यूपी वॉरियर्स और दिल्ली…

Last Updated: January 14, 2026 22:54:11 IST

NEET PG 2025: माइनस स्कोर वाले भी बनेंगे स्पेशलिस्ट! कट-ऑफ में ऐतिहासिक गिरावट, जानें वजह

डॉक्टरी के क्षेत्र में जाने की तैयारी करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है.…

Last Updated: January 14, 2026 22:47:58 IST