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धार्मिक जीवन छोड़ राजनीति में क्यों आएं स्वामी ज्योतिर्मयानंद? संघ से निष्कासित होेने पर शुरू हुआ विवाद

Swami Jyotirmayananda: बंगाल विधानसभा चुनाव में स्वामी ज्योतिर्मयानंद को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार घोषित करते हुए उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज से टिकट दिया है. जिसके बाद भारत सेवाश्रम संंघ ने स्वामी ज्योतिर्मयानंद को निष्कासित कर दिया है. इसके बाद स्वामी जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजनीति में आने की वजहें बताईं.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 23, 2026 11:27:43 IST

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Swami Jyotirmayananda: बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने के बाद से ही सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है. इसी कड़ी में स्वामी ज्योतिर्मयानंद को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार घोषित करते हुए उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज से टिकट दिया है. जिसके बाद भारत सेवाश्रम संंघ ने स्वामी ज्योतिर्मयानंद को निष्कासित कर दिया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वामी ज्योतिर्मयानंद को उत्पल महाराज के नाम से भी जाना जाता है.

बीजेपी में शामिल होकर चुनाव लड़ने की बात स्वामी जी ने कहा कि वे लोगों की दुर्दशा से दुखी हैं. उत्पल महाराज ने आगे कहा कि संघ द्वारा निष्कासित करने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है.

स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने क्या कहा?

बीजेपी में शामिल होने के बाद स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने एक प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने कहा कि वे लोगों की दुर्दशा से दुखी हैं, क्योंकि राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैल गया है. दशकों से भिक्षु और योगी समाज के पुनर्निर्माण के लिए राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करते रहे हैं. चाहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस हों या ऋषि अरबिंदो, संतों और योगियों ने ही स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया है. चाहे उपन्यास ‘आनंदमठ’ की बात हो या संन्यासी विद्रोह की, संतों ने ही एक बेहतर समाज के लिए राह बनाई है.

इसके अलावा, उन्होंने आगे कहा कि जब शहर जल रहा हो, तो मंदिर उससे अछूते नहीं रह सकते. जब मुझे समाज के पुनर्निर्माण का अवसर मिला, तो मैंने उसे स्वीकार कर लिया. उत्पल महाराज ने कहा कि वे राजनीति में बने रहेंगे और आने वाले दिनों में भी अपने संन्यासी सिद्धांतों का पालन करेंगे. जब मैंने यह निर्णय लिया, तब मेरे मन में कोई दुविधा नहीं थी. मैं इसे राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा मानता हूं.

भारत सेवाश्रम संघ ने क्यों किया निष्कासित?

भारत सेवाश्रम संघ ने शुक्रवार को अपने सभी भिक्षुओं को भेजे एक आंतरिक नोट में घोषणा की कि उसने स्वामी ज्योतिर्मयानंद को निष्कासित कर दिया है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से उत्पल महाराज के नाम से जाना जाता है और जिन्हें उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज से भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था. संघ ने उनके राजनीतिक जाल में फंसने को एक भिक्षु के मिशन का अपमान बताया.

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Swami Jyotirmayananda: बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने के बाद से ही सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है. इसी कड़ी में स्वामी ज्योतिर्मयानंद को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार घोषित करते हुए उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज से टिकट दिया है. जिसके बाद भारत सेवाश्रम संंघ ने स्वामी ज्योतिर्मयानंद को निष्कासित कर दिया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वामी ज्योतिर्मयानंद को उत्पल महाराज के नाम से भी जाना जाता है.

बीजेपी में शामिल होकर चुनाव लड़ने की बात स्वामी जी ने कहा कि वे लोगों की दुर्दशा से दुखी हैं. उत्पल महाराज ने आगे कहा कि संघ द्वारा निष्कासित करने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है.

स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने क्या कहा?

बीजेपी में शामिल होने के बाद स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने एक प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने कहा कि वे लोगों की दुर्दशा से दुखी हैं, क्योंकि राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैल गया है. दशकों से भिक्षु और योगी समाज के पुनर्निर्माण के लिए राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करते रहे हैं. चाहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस हों या ऋषि अरबिंदो, संतों और योगियों ने ही स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया है. चाहे उपन्यास ‘आनंदमठ’ की बात हो या संन्यासी विद्रोह की, संतों ने ही एक बेहतर समाज के लिए राह बनाई है.

इसके अलावा, उन्होंने आगे कहा कि जब शहर जल रहा हो, तो मंदिर उससे अछूते नहीं रह सकते. जब मुझे समाज के पुनर्निर्माण का अवसर मिला, तो मैंने उसे स्वीकार कर लिया. उत्पल महाराज ने कहा कि वे राजनीति में बने रहेंगे और आने वाले दिनों में भी अपने संन्यासी सिद्धांतों का पालन करेंगे. जब मैंने यह निर्णय लिया, तब मेरे मन में कोई दुविधा नहीं थी. मैं इसे राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा मानता हूं.

भारत सेवाश्रम संघ ने क्यों किया निष्कासित?

भारत सेवाश्रम संघ ने शुक्रवार को अपने सभी भिक्षुओं को भेजे एक आंतरिक नोट में घोषणा की कि उसने स्वामी ज्योतिर्मयानंद को निष्कासित कर दिया है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से उत्पल महाराज के नाम से जाना जाता है और जिन्हें उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज से भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था. संघ ने उनके राजनीतिक जाल में फंसने को एक भिक्षु के मिशन का अपमान बताया.

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