बिजनौर के नूरपुरी छिपरी गांव में एक विशालकाय अजगर ने लोगों में हड़कंप मचा दिया, हालांकि वन विभाग और सर्प मित्र की टीम ने अजगर को रेस्क्यू कर लिया है.
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बिजनौर के एक गांव में हड़कंप मचा हुआ है. दरअसल, वहां नूरपुर छिपरी गांव में एक क्विंंटल से भी अधिक वजन का अजगर देखा गया है. अजगर मिलने के बाद से ही वहां चारों ओर अफरा-तफरी मची हुई है.
उत्तर प्रदेश के इस गांव में विशालकाय अजगर के मिलने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है. यह अजगर इतना बड़ा था कि ग्रामीणों ने इसका वजन 100 किलो से अधिक बताया.
शेरकोट थाना क्षेत्र के नूरपुर छिपरी गांव में ग्रामीणों ने अचानक एक विशाल सांप देखा, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल है. बीते कुछ दिनों से खेतों और आबादी क्षेत्र के आसपास किसी भारी जीव की हलचल की खबरें थीं, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यहां इतना बड़ा अजगर मौजूद होगा. ग्रामीणों ने इसकी जानकारी होते ही तुरंत सर्प मित्र और वन विभाग को सूचना दी.
सूचना मिलते ही प्रसिद्ध सर्प मित्र बी. भास्कर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. अजगर के विशाल आकार और वजन के कारण टीम को रेस्क्यू करने में कई घंटों की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. रेस्क्यू के दौरान क्षेत्र को सुरक्षित किया गया, ग्रामीणों को दूरी बनाए रखने को कहा गया, और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया. अंततः अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया गया और वन विभाग की मदद से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी की गई.
अजगर के विशाल आकार को देखकर ग्रामीण दंग रह गए, क्योंकि उन्होंने जीवन में इतना बड़ा अजगर कभी नहीं देखा था. अजगर के पकड़े जाने के बाद गांव वालों ने राहत की सांस ली, खासकर बच्चों, मवेशियों और किसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता थी. कई लोगों ने इस घटना का वीडियो भी बना लिया, जिससे यह घटना तेजी से वायरल हो गई.
सर्प मित्र बी. भास्कर ने बताया कि अजगर पूरी तरह स्वस्थ है और यह तब तक खतरा नहीं बनता जब तक उसे छेड़ा न जाए. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मौसम बदलाव के कारण जंगली जीव अक्सर आबादी क्षेत्रों में आ जाते हैं. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, और पूरे बिजनौर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है.
उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बड़े अजगरों के रेस्क्यू की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. उदाहरण के लिए, इस घटना से पहले उत्तराखंड में 16 फुट लंबा 91 किलो का बर्मीज पायथन रेस्क्यू किया गया था. आगरा में 10 फुट का इंडियन रॉक पायथन भी एक आवासीय सोसाइटी से बचाया गया. बिहार और अन्य जगहों पर भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो जंगली जीवों के मानव बस्तियों में आने की प्रवृत्ति को दर्शाती हैं.
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