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उत्तराखंड के मंदिरों और धामों में गैर हिंदुओं की नो एंट्री, यहां जानिए- कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?

Non-Hindu Entry Ban in Char Dham: उत्तराखंड में मंदिरों और धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. एक तरफ कांग्रेस इस निर्णय का विरोध कर रही है. तो उत्तराखंड की धामी सरकार ने मंदिर समितियों के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया है. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ था.

Uttarakhand Char Dham: उत्तराखंड में मंदिरों और धामों में प्रवेश को लेकर अब नए नियम लागू होने लगे है. जिसमें अब विशेषतौर से गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंध किया जाने का निर्णय सिलसिलेवार लिया जा रहा है. इसकी शुरुआत हरिद्वार में कुंभ स्थल से हुई थी, जहां अंग्रेजों के बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए कुंभ क्षेत्र व घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किया गया. वहीं अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध धामों में भी इसको लागू किया गया है.

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने क्या कहा? (What did the Badrinath Kedarnath Temple Committee say?)

बीकेटीसी यानी बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने धार्मिक पवित्रता और परंपराओं का हवाला देते हुए कहा है कि अब बीकेटीसी के मंदिरों और धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के लिए प्रस्ताव लाया जाएगा और आगामी बोर्ड बैठक में इसे पारित भी किया जाएगा. वहीं इसी कदम को आगे बढ़ाते हुए गंगोत्री धाम समिति ने भी आगामी चारधाम यात्रा में गंगोत्री धाम में गैर हिन्दू धर्म के लोगों के प्रवेश को प्रतिबंध करने की बात कही है.

सरकार ने मंदिर समितियों के निर्णय का किया समर्थन (The government supported the decision of the temple committees)

जानकारी सामने आ रही है कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने मंदिर समितियों के निर्णय को अपना समर्थन दिया है. जिसको लेकर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी कहा कि जब हिन्दू मक्का मदीना नहीं जा सकते तो हमारे हिन्दू मंदिरों में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंध किया जाना उचित है. इस प्रतिबंध पर समिति के निर्णय को भी उन्होंने समर्थन देते हुए उचित बताया है.

कांग्रेस ने किया विरोध (Congress party protested)

मंदिर समितियों के इस निर्णय पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है. जिसमें कहा गया है कि बीजेपी सरकार के पास जनता के सरोकारों से जुड़े मुद्दों के जवाब देने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे इस तरह का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि जिनकी मंदिरों के प्रति आस्था नहीं है वो पहले से ही मंदिर नहीं जाते इसमें नियम बनाना केवल फिजूल के काम हैं.

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने क्या कहा? (What did Waqf Board chairman Shadab Shams say?)

कांग्रेस की इसी प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड डेढ़ करोड़ सनातनियों की भूमि है. इन चार धामों में तमाम श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ आते हैं. जिनकी आस्था इन चार धामों, गंगा, यमुना पर ना हो. वह यहां पर ना आए इसमें उन्हें क्या दिक्कत है? यह एक बहुत शानदार निर्णय है और जिनकी आस्था इन चार धामों पर नहीं है वह बिल्कुल भी यहां पर ना आए. 

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद? (Where did the whole controversy begin?)

अक्सर हिंदू संगठनों द्वारा ये मांग उठाई जाती है कि उत्तराखंड के मंदिरों और धामों में गैर हिंदुओं की एंट्री नहीं होनी चाहिए. हालांकि, हिंदू धर्म के अलावा, दूसरे धर्मों से ताल्लुक रखने वाले लोग इन जगहों पर जाने से बचते रहे हैं. लेकिन अब मंदिर समितियों ने आधिकारिक रूप से ये निर्णय ले लिया है. जिसका उत्तराखंड की धामी सरकार ने भी समर्थन किया है.

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Sohail Rahman

सोहेल रहमान, जो पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति और खेल के मुद्दे पर लिखना काफी पसंद है. इसके अलावा, देश और दुनिया की खबरों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में लोगों तक पहुंचाने का माद्दा रखते हैं. ITV Network में 24 अगस्त, 2024 से अपनी सेवा दे रहे हैं. इससे पहले, इंशॉट्स में करीब 5 साल अपनी सेवा दी है.

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