Samsung Galaxy S23 Complaint: 70 हजार का सैमसंग फोन 3 साल में डेड! ग्रीन लाइन और मदरबोर्ड क्रैश के बाद यूजर से मांगे 30 हजार रुपये, भड़के यूजर ने कंपनी को घेरा. पढ़ें पूरी खबर.
सैमसंग के 70 हजार वाले फोन का 36 महीने में निकला दम!
70 हजार रुपये का प्रीमियम फोन, ब्रांड का बड़ा दावा और महज तीन साल में फोन एक 'कांच का टुकड़ा' बन गया. जी हां, टेक दिग्गज Samsung के प्रीमियम फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स की टिकाऊपन और सर्विस क्वालिटी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक मामले ने सैमसंग के लाखों यूजर्स की नींद उड़ा दी है. 2023 में मोटी रकम खर्च कर खरीदे गए फोन में पहले रहस्यमयी रंग-बिरंगी लाइन्स आईं और फिर अचानक फोन हमेशा के लिए बंद हो गया. लेकिन असली झटका तब लगा जब ग्राहक फोन लेकर सर्विस सेंटर पहुंचा. कंपनी के रवैये और रिपेयरिंग के नाम पर मांगी गई रकम ने न केवल यूजर को हैरान किया, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सैमसंग अपने महंगे फोन्स में घटिया पार्ट्स का इस्तेमाल कर रहा है? जानिए आखिर क्या है यह पूरा विवाद, सर्विस सेंटर में ग्राहक के साथ क्या हुआ और क्यों यह खबर हर सैमसंग यूजर के लिए एक बड़ी चेतावनी है...
अमरेश चंद्र जेना नाम के एक यूजर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सैमसंग इंडिया और सैमसंग मोबाइल को टैग करते हुए अपना दर्द साझा किया. यूजर ने बताया कि उन्होंने साल 2023 में 70,000 रुपये से अधिक की भारी-भरकम कीमत देकर Samsung Galaxy S23 खरीदा था. स्मार्टफोन खरीदते वक्त कंपनी की तरफ से लंबी लाइफ और बेस्ट-इन-क्लास परफॉर्मेंस का दावा किया गया था, लेकिन महज 2 साल के भीतर ही फोन की स्क्रीन पर हरा और गुलाबी रंग की लाइनें उभरने लगीं.
Dear @SamsungMobile @SamsungIndia - A high end mobile S23 of pirce 70k+ was just purchased in 2023. Within 2 yrs it started with the display issue where pink & green lines were drawn. Now completing just 3 yrs the mobile suddenly got switched off & consulting with your service -
— Amaresh chandra Jena (@ACJena) August 19, 2026
समस्या यहीं खत्म नहीं हुई. फोन खरीदे जाने के ठीक 3 साल पूरे होते ही यह अचानक पूरी तरह बंद हो गया. जब पीड़ित यूजर फोन को लेकर आधिकारिक सैमसंग सर्विस सेंटर पहुंचा, तो वहां उन्हें जो जवाब मिला उसने उनके होश उड़ा दिए. सर्विस सेंटर के इंजीनियर्स ने बताया कि फोन का मदरबोर्ड पूरी तरह क्रैश हो चुका है.
स्मार्टफोन को दोबारा ठीक कराने के लिए सर्विस सेंटर ने 30,000 रुपये से अधिक का एस्टीमेट थमा दिया. यानी 70 हजार के फोन को महज 3 साल इस्तेमाल करने के बाद फिर से आधी कीमत रिपेयरिंग में देनी होगी. यूजर का कहना है कि उनका फोन देखने में बिल्कुल नया लगता है, लेकिन अंदरूनी खराबी के कारण अब वह पूरी तरह बेकार हो चुका है.
यह समस्या सिर्फ अमरेश चंद्र तक सीमित नहीं है. इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए सक्षम जैन नाम के यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया में 'Same issue' लिखते हुए कई सैमसंग स्मार्टफोन्स की तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें साफ तौर पर वही वर्टिकल लाइन की समस्या देखी जा सकती है. इतना ही नहीं, यूजर ने तंग आकर नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पोर्टल पर कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्जा कराते हुए ग्रीवेंस रजिस्ट्रेशन फॉर्म का स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किया है.
वहीं, एक अन्य यूजर प्रीतिलता सामल ने निराशा जाहिर करते हुए लिखाIt's quite unfortunate to purchase Samsung Mobile.' यानी 'सैमसंग मोबाइल खरीदना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है.' यहां तक कहा दिया.
इस पूरी घटना के बाद यूजर ने सैमसंग से सीधा सवाल किया है कि अगर 70 हजार रुपये का फ्लैगशिप स्मार्टफोन 3 साल भी नहीं चल सकता, तो कोई ग्राहक कंपनी के हाई-एंड प्रोडक्ट्स पर भरोसा क्यों करे? गौरतलब है कि सैमसंग के महंगे फोन्स में ग्रीन लाइन और मदरबोर्ड फेलियर की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. ऐसे में भारी-भरकम पैसे खर्च करने के बावजूद यूजर्स खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
यह मामला सिर्फ एक यूजर का नहीं है, बल्कि उन तमाम ग्राहकों की चिंता को दर्शाता है जो ब्रांड पर भरोसा करके अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करते हैं. क्या सैमसंग इस मामले का संज्ञान लेकर यूजर को राहत देगा या फिर महंगे स्मार्टफोन्स की यह खराबी ऐसे ही ग्राहकों की जेब खाली करती रहेगी?
Rajpal Yadav: राजपाल यादव अपनी कॉमेडी को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार…
WTC 2025-27 में जोश टंग ने रचा इतिहास. बुमराह और स्टार्क को पीछे छोड़ बने…
वाराणसी की विश्व-प्रसिद्ध तिरंगा बर्फी को इसकी विशिष्ट बनावट के कारण GI टैग प्रदान किया…
Don 3: रणवीर सिंह की फिल्म 'डॉन 3' से बाहर होने के बाद विवाद लगातार…
भारत के पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव को भारत की सबसे बड़ी सामुदायिक क्रिकेट लीग,…
मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर 1990 के दशक की शुरुआत में इरशाद-विरोधी आंदोलन के दौरान BNP…