सन्नाटा और सस्पेंस तब टूट गया जब बेतिया के एक परीक्षा केंद्र के बाहर छात्राओं की चीखें सुनाई देने लगीं, मामला केवल 'देरी' का नहीं, बल्कि उन सपनों के टूटने का है जो एक ट्रैफिक जाम की भेंट चढ़ गए तीन-चार छात्राएं बदहवास हालत में सेंटर पहुंची, लेकिन घड़ी की सुइयां उनके खिलाफ जा चुकी थीं, "हमें अंदर जाने दो, हमारी जिंदगी का सवाल है," यह गुहार गेट के लोहे से टकराकर वापस आ गई, प्रशासन अपनी जगह अड़ा रहा और छात्र अपनी बेबसी पर आंसू बहाते रहे, क्या यह महज एक इत्तेफाक था या अव्यवस्था की एक और कहानी? सस्पेंस इस बात पर है कि क्या इन छात्राओं को दोबारा मौका मिलेगा या यह साल उनके जीवन का सबसे काला अध्याय बनकर रह जाएग.
Student Late Video Bihar: बिहार के बेतिया में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको सन्न कर दिया है, परीक्षा केंद्र के बंद दरवाजों के पीछे छिपी है कई छात्रों की साल भर की मेहनत, भारी ट्रैफिक जाम में फंसने की वजह से कुछ छात्राएं सेंटर देरी से पहुंची, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा, रोती-बिलखती छात्राओं को गेट से ही वापस भेज दिया गया, अब सवाल यह है कि इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन है—शहर का बेकाबू ट्रैफिक या परीक्षा केंद्र के कड़े नियम?
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