एक व्यवसायी को जब यह पता चला कि उसके तीन कर्मचारी अपनी शिक्षा का खर्च उठाने के लिए नौकरी के साथ-साथ कठिन पढ़ाई भी कर रहे हैं, तो उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको हैरान कर दिया, उन्होंने इन तीनों कर्मचारियों की यूनिवर्सिटी की पूरी फीस खुद भरने का जिम्मा उठाया व्यवसायी ने बहुत ही सुंदर तरीके से स्पष्ट किया कि यह उनके काम का कोई 'पुरस्कार' नहीं है, बल्कि उन लोगों में एक 'निवेश' है जो जीवन में आगे बढ़ने की भूख रखते हैं.
Businessman Pays University Fees For Employees: यह कहानी एक ‘बॉस’ और एक ‘लीडर’ के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है, व्यवसायी ने समझा कि यदि उसके कर्मचारी शिक्षित और कुशल होंगे तो इसका लाभ समाज और संस्थान दोनों को मिलेगा उन्होंने कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति के बजाय उनके भविष्य की संभावनाओं को महत्व दिया, मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना मानसिक और शारीरिक रूप से थकाने वाला होता है, इस आर्थिक मदद ने ना केवल उनका वित्तीय बोझ कम किया, बल्कि उन्हें मानसिक शांति भी दी इस पहल से अन्य उद्यमियों को भी संदेश मिलता है कि कर्मचारियों का विकास ही कंपनी का वास्तविक विकास है ‘बिल्डिंग पीपल’ का विजन लंबे समय में वफादारी और प्रतिभा को निखारता है जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, लोग इस बिजनेसमैन की तुलना उन महान उद्योगपतियों से करने लगे जो अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और सामाजिक कल्याण में लगाते हैं.
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