World Economic Forum: भारतीय CEOs की भागीदारी ग्लोबल इकॉनमी में देश की बढ़ती भूमिका को दिखाती है.
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World Economic Forum: स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 आयोजित होने वाला है. इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल होंगे. इस बार सबकी नजर खास तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर है, जो छह साल बाद पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में शामिल हो रहे हैं. ट्रंप बुधवार को दावोस में मुख्य भाषण (Keynote Address) देंगे और इसके बाद एक खास हाई-लेवल रिसेप्शन की मेजबानी करेंगे. इस रिसेप्शन में भारत के 7 बड़े उद्योगपति भी शामिल होंगे.
डेवोस में ट्रंप उनकी मौजूदगी यूरोप और NATO देशों के लिए चिंता की बात बन गई है, खासकर ग्रीनलैंड को लेकर. ट्रंप ने साफ कहा है कि वह हर कीमत पर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल चाहते हैं.
इन भारतीय CEOs की मौजूदगी यह दिखाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ रही है. दुनिया की कंपनियां और सरकारें सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी साझेदारी और निवेश को लेकर नए सिरे से सोच रही हैं. ऐसे में अमेरिका और भारत के बीच चल रही नई ट्रेड डील बातचीत के कारण भी दावोस में भारत की मौजूदगी पर सबकी नजर है.
ट्रंप का दावोस आना ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है. हाल के हफ्तों में अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है, जिससे लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ी है. वहीं, ट्रंप के ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के बयान से यूरोप में नाराजगी है और कई पुराने सहयोगी देशों से रिश्ते बिगड़े हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि उनकी NATO सेक्रेटरी जनरल मार्क रूटे से फोन पर बात हुई. बातचीत के दौरान, उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की नेशनल और ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए बहुत ज़रूरी है.
उन्होंने लिखा कि अब ग्रीनलैंड पर पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है. ट्रंप के मुताबिक, इस मुद्दे पर सभी संबंधित देश दावोस में मिलेंगे. उनका दावा है कि सिर्फ यूनाइटेड स्टेट्स ही दुनिया में शांति पक्की कर सकता है, और वह भी ताकत के दम पर.
दावोस पहुंचने से पहले ही, ट्रंप ने डेनमार्क समेत सात NATO देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिसने ग्रीनलैंड में अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं. ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर 1 फरवरी तक ग्रीनलैंड को US को सौंपने पर कोई समझौता नहीं हुआ, तो आर्थिक कार्रवाई तय है. यूरोपियन अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन और सिक्योरिटी पर तैयार भाषणों को फाड़ा जा रहा है और ग्रीनलैंड पर नए जवाब तैयार किए जा रहे हैं.
दावोस में, ट्रंप अपने विवादित बोर्ड ऑफ पीस के रोल को बढ़ाने का भी ऐलान करेंगे. गाजा पीस प्लान अपने दूसरे फेज़ में आ गया है. ट्रंप ने गाजा के एडमिनिस्ट्रेशन और रिकंस्ट्रक्शन की देखरेख के लिए नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) बनाने का ऐलान किया है. इस कमिटी की देखरेख और फंड जुटाने के लिए ट्रंप ने एक “बोर्ड ऑफ पीस” बनाया है, जिसके चेयरमैन ट्रंप खुद हैं. शुरू में इसे गाजा तक ही सीमित माना जाता था, लेकिन अब ट्रंप इसे ग्लोबल पीस प्लेटफॉर्म कह रहे हैं. हालांकि, इस बोर्ड पर ट्रंप के पास वीटो पावर होगी, जिसे कई यूरोपियन देश यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के पैरेलल स्ट्रक्चर के तौर पर देखते हैं.
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