Bharat Taxi Price: हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने भारत टैक्सी नामक एक नए राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया. इसके आने से एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भारत टैक्सी Ola और Uber से सस्ती है या महंगी. चलिए जानते हैं इसके बारे में.
भारत टैक्सी और ओला उबर के रेट्स
Bharat Taxi vs Ola-Uber: कैब सर्विस मार्केट में भारत टैक्सी के रूप में नया नाम जुड़ गया है. इसके आने से हर कोई Ola-Uber से उसकी तुलना कर रहा है. Bharat Taxi न केवल ड्राइवरों के लिए ज्यादा फायदेमंद होगी, बल्कि यात्रियों के लिए भी काफी सस्ती होगी. इस ऐप की शुरुआत दिल्ली में हो चुकी है. जानिए क्या Bharat Taxi का किराया Ola-Uber की तुलना में सस्ता है या नहीं.
कंपनी का दावा है कि भारत टैक्सी का किराया ओला और उबर की तुलना में कम रखा गया है. भारत टैक्सी में न्यूनतम किराया 4 किलोमीटर तक सिर्फ 30 रुपये है, जबकि ओला और उबर में यही किराया 40 से 55 रुपये तक पहुंच जाता है. 4 से 12 किलोमीटर की दूरी के लिए भारत टैक्सी 23 रुपये प्रति किलोमीटर चार्ज करती है, जो अन्य प्लेटफॉर्म्स से कम है. 12 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर यह किराया 18 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है. भारत टैक्सी की खास बात यह है कि इसमें पीक ऑवर के दौरान भी सर्ज प्राइसिंग लागू नहीं होगी. वहीं, ओला और उबर में व्यस्त समय पर किराया दोगुना तक हो सकता है. ड्राइवर नेटवर्क की बात करें तो भारत टैक्सी के साथ करीब 4 लाख ड्राइवर जुड़े हुए हैं, जबकि ओला के पास 15 से 20 लाख और उबर के पास 10 से 15 लाख ड्राइवर हैं.
भारत टैक्सी ड्राइवरों द्वारा संचालित एक सहकारी संस्था है जिसमें प्रति सवारी कोई कमीशन नहीं लिया जाता है. हालांकि, ड्राइवरों को इस ऐप का उपयोग करने के लिए प्रतिदिन 30 रुपये का एक निश्चित प्रवेश शुल्क देना पड़ता है. इसका उद्देश्य ड्राइवरों को किराए का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रखने देना है. इसके विपरीत, उबर और ओला के ड्राइवरों से प्रत्येक सवारी पर भारी कमीशन लिया जाता है, जिससे उनकी आय कम हो जाती है.
यह पूरी तरह से सरकारी ऐप नहीं है, बल्कि इसका संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) द्वारा किया जाता है, जो एक बहु-राज्यीय सहकारी समिति है. यह राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के सहयोग से काम करती है और अमूल तथा नाबार्ड सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा समर्थित है. इन संस्थाओं के प्रतिनिधि अंतरिम बोर्ड का हिस्सा हैं.
डिसक्लेमर- किराया स्थान और समय के हिसाब से बदल सकता है. सर्ज प्राइसिंग का अर्थ यह है कि व्यस्त समय में ओला और उबर बेस किराए से दो गुना तक शुल्क वसूल सकते हैं.
Delhi High Court Order: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला…
UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कसनी शुरू…
Snake Viral Video: सोशल मीडिया पर आपको ऐसे कई रूह कंपा देने वाले वीडियो मिल…
Iran Hormuz Strait Tax: ईरान का एक बड़ा फैसला और पूरी दुनिया में मचेगा हाहाकार!…
census 2027 Question List: 2027 की जनगणना का पहला चरण यानी, घर-घर जाकर गिनती करना…
Gujarat Hailstorm Alert: गुजरात में मौसम का खौफनाक रूप! जामनगर में पल भर में गिरा…