Gold Price Outlook: आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल सकती है. अगर दुनिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400 से 4,500 डॉलर प्रति औंस (151107 रुपए प्रति 10 ग्राम) तक पहुंच सकता है. यह अनुमान Kotak Neo की कमोडिटी एक्सपर्ट कायनात चेनवाला ने लगाया है.
हालांकि, सोने को इस ऊंचाई तक पहुंचने से पहले 4,220 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार करना होगा. उनके मुताबिक, सोने की आगे की चाल काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर निर्भर करेगी.
सोने की कीमतों में तेजी की क्या है वजह?
कायनात चेनवाला के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो सोने को फायदा मिल सकता है. फिलहाल सप्लाई में रुकावट और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना रहने पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती है.
वहीं, अगर दोनों देशों के बीच तनाव का स्थायी समाधान निकलता है, तो कच्चे तेल की कीमतें घटकर 70 से 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं. इससे कीमती धातुओं के बाजार के लिए माहौल बेहतर हो सकता है.
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर नीति भी सोने की कीमतों के लिए अहम होगी. बाजार में दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की 80% संभावना जताई जा रही थी. ऐसे में फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है, इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है.
घरेलू बाजार में कहां पहुंचा सोना?
घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना करीब 1.40 लाख रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था. यह अपने पिछले रिकॉर्ड स्तर 1.80 लाख रुपये से 20% के करीब नीचे है.
कायनात चेनवाला के मुताबिक, पिछले एक से दो सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में करीब 10% का करेक्शन आया है. यानी हाल के दिनों में सोने के भाव में अच्छी गिरावट देखने को मिली है. हालांकि, कीमतों में आई यह गिरावट त्योहारी सीजन में नए खरीदारों को आकर्षित कर सकती है.
उन्हें उम्मीद है कि सितंबर तिमाही में मांग में सुधार के बाद दिसंबर तिमाही में भी ज्वेलरी की मांग मजबूत बनी रह सकती है. हालांकि, सोने की ऊंची कीमतों के कारण गहनों की बिक्री की मात्रा पर दबाव रह सकता है. ऐसे में ग्राहक भारी गहनों के बजाय हल्के वजन और कम कैरेट वाली ज्वेलरी खरीदना पसंद कर सकते हैं.
सोने में निवेश चांदी से बेहतर क्यों?
कायनात चेनवाला का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में चांदी के मुकाबले सोने में निवेश का जोखिम और संभावित रिटर्न का संतुलन बेहतर है. इसकी बड़ी वजह सोने की कीमतों में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव और मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में सुरक्षित निवेश के तौर पर इसकी पहचान है.
उनके मुताबिक, कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोग अपने पोर्टफोलियो का करीब 75-80% हिस्सा सोने में रख सकते हैं. वहीं, ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक 15-20% हिस्सा चांदी में लगाने पर विचार कर सकते हैं.
अगले 6 महीने इन बातों पर रखें नजर
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 4,220 डॉलर प्रति औंस का स्तर पहला अहम पड़ाव होगा. इसके बाद अनुकूल परिस्थितियों में कीमतें 4,400 से 4,500 डॉलर तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, अगले छह महीनों में कच्चे तेल की कीमतों, करेंसी में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों से सोने की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है. इसलिए निवेशकों को सोने में निवेश से पहले वैश्विक घटनाक्रम और बाजार के रुझान पर नजर रखनी चाहिए.
(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)
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