दिल्ली में मेयर का चुनाव भी इनडायरेक्टली होता है. पार्षद, MP, राज्यसभा सदस्य और नॉमिनेटेड MLA मिलकर चुने जाते हैं. पार्षद अपनी पसंद का मेयर कैंडिडेट चुन सकते हैं.
BMC VS MCD
MCD vs BMC: महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद मुंबई को नया मेयर मिलेगा और दिल्ली को भी अप्रैल में नया मेयर मिलेगा. भारत की दो सबसे बड़े नगर निगम, मुंबई में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) और दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (MCD) को अक्सर अमीर और बड़ी संस्थाओं के तौर पर देखा जाता है. खास तौर पर BMC को अक्सर देश का सबसे अमीर नगर निगम कहा जाता है. हालांकि सबसे अमीर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन होने का मतलब यह नहीं है कि उसके मेयर के पास सबसे ज़्यादा एग्जीक्यूटिव पावर हो. आइए देश की राजधानी और देश की फाइनेंशियल कैपिटल में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मेयरों की शक्तियों को समझते हैं. वे कैसे चुने जाते हैं? उनका टर्म कितने समय का होता है?
मुंबई के मेयर को जनता सीधे नहीं चुनती है. नगर निगम के चुने हुए पार्षद अपने बीच से मेयर चुनते हैं. BMC एक्ट के तहत मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है. पार्षद पांच साल के लिए चुने जाते हैं और अपने कार्यकाल के दौरान दो मेयर चुनते हैं.
दिल्ली में मेयर का चुनाव भी इनडायरेक्टली होता है. पार्षद, MP, राज्यसभा सदस्य और नॉमिनेटेड MLA मिलकर चुने जाते हैं. पार्षद अपनी पसंद का मेयर कैंडिडेट चुन सकते हैं. यहां एंटी-डिफेक्शन कानून लागू नहीं होता. दिल्ली में मेयर का टर्म एक साल का होता है. मेयर का चुनाव हर फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में यानी अप्रैल में होता है. मेयर रोटेट होता है. पहले साल महिला मेयर होगी. दूसरे साल जनरल कैटेगरी का मेयर होगा और तीसरे साल SC मेयर होगा. फिर चौथे और पांचवें साल में जनरल कैटेगरी से मेयर चुना जा सकता है.
मुंबई में म्युनिसिपल कमिश्नर (जो आमतौर पर एक IAS ऑफिसर होता है) के पास शहर चलाने की असली एग्जीक्यूटिव पावर होती है. मेयर हाउस की अध्यक्षता करता है और शहर को रिप्रेजेंट करता है, लेकिन एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल कमिश्नर के पास होता है. यह अंतर डॉक्यूमेंट्स में साफ तौर पर बताया गया है. वहीं, दिल्ली में भी म्युनिसिपल कमिश्नर के पास आमतौर पर असली एग्जीक्यूटिव, फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर होती है. मेयर का रोल आमतौर पर सेरेमोनियल और हाउस-सेंट्रिक होता है.
मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का 2025-26 के लिए सालाना बजट 74,427 करोड़ रुपये (लगभग 1.2 बिलियन डॉलर) से ज़्यादा है, जिससे यह न सिर्फ़ देश में बल्कि एशिया में भी सबसे बड़ी लोकल बॉडी बन गई है. पहले मुंबई का सालाना बजट लगभग 60,000 करोड़ रुपये (लगभग 6 बिलियन डॉलर) था. इसी तरह दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 2026-27 के लिए 16,530 करोड़ रुपये (लगभग 1.6 बिलियन डॉलर) से ज्यादा का बजट पेश किया है. इसे कमिश्नर ने दिसंबर 2025 में हाउस में पेश किया था. दोनों की तुलना करने से साफ़ पता चलता है कि मुंबई सच में एक अमीर म्युनिसिपल बॉडी है.
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