India-EU Trade Deal: EU दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है और भारत एक बड़ी इकॉनमी है. अगर दोनों एक साथ आते हैं तो 2 अरब लोगों का मार्केट बनेगा और यह डील दुनिया की GDP का 25% कवर करेगी.
जानें इसे क्यों कहा जा रहा मदर ऑफ आल डीलl
India-EU Trade Deal: भारत और यूरोप के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील साइन हुई है. लगभग दो दशकों की रुक-रुक कर बातचीत के बाद, यह एग्रीमेंट भारत को EU के साथ फ्री ट्रेड के लिए धीरे-धीरे अपने बड़े और कड़े रेगुलेटेड मार्केट को खोलने की इजाज़त देगा. यह ट्रेड डील EU के लगभग 90 प्रतिशत प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म कर देती है या कम कर देती है.पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि भारत और EU के बीच FTA पर सहमति बन गई है. उन्होंने कहा कि लोग इसे मदर ऑफ आल डील कह रहे हैं.
इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से एग्रीकल्चर और डेयरी जैसे सेक्टर को बाहर रखा गया है. भारत को डर है कि यूरोपियन एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स उसके किसानों की इनकम पर असर डाल सकते हैं. EU भी अपने किसानों को लेकर सावधान है, इसलिए इन मुद्दों को एग्रीमेंट में शामिल नहीं किया गया है.
ट्रेड के अलावा भारत और यूरोपियन यूनियन इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट, GI टैग और डिफेंस और सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर भी बातचीत कर रहे हैं. लेबर मूवमेंट, डिफेंस इंडस्ट्री में पार्टनरशिप और बढ़े हुए स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन पर भी एग्रीमेंट होने की उम्मीद है.
यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि एक सफल भारत दुनिया को ज़्यादा स्टेबल, सिक्योर और खुशहाल बनाता है. उन्होंने इस एग्रीमेंट को हिस्टोरिक बताया और कहा कि इससे लगभग दो बिलियन लोगों का एक कॉमन मार्केट बनेगा, जो दुनिया की टोटल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.
इंडिया और EU के बीच ट्रेड डील पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी लेकिन 2013 में रुक गई. इसका कारण यह था कि दोनों पक्ष कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बना पाए. EU चाहता था कि इंडिया एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर को खोले लेकिन इंडिया को डर था कि इससे किसानों को नुकसान होगा. इंडिया ने शराब और कारों पर टैक्स कम करने की मांग भी मानने से मना कर दिया.
ट्रंप ने जो हालात बनाए हैं उसे देखते हुए भारत दुनिया भर के कई देशों के लिए उम्मीद की किरण है. सिर्फ़ टैरिफ ही नहीं बल्कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के विचार ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है. ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपियन देश ट्रंप के खिलाफ हैं.
ट्रंप के कार्यकाल में EU और US के बीच रिश्तों में तनाव देखा गया है. ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स EU को US से दूर कर रही है. ट्रंप टैरिफ की धमकी देकर EU को अपनी शर्तों पर ट्रेड करने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं. US प्रेसिडेंट द्वारा बनाए गए मौजूदा हालात ने यूरोपियन देशों को एक स्टेबल और भरोसेमंद पार्टनर की उम्मीद के साथ भारत की ओर देखने पर मजबूर किया है.
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