UPSC IAS Story: यूपीएससी से चयनित 2016 बैच के IAS अधिकारी पुलकित गर्ग चर्चा में हैं. उन्होंने सरकारी शिक्षा पर भरोसा दिखाते हुए अपनी तीन साल की बेटी का दाखिला आंगनवाड़ी में कराया.
IAS Story: यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों का चयन IAS, IPS और अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए किया जाता है, जहां बेहतर रैंक पाने वालों को IAS बनने का अवसर मिलता है. अपनी कार्यशैली और फैसलों के कारण ये अधिकारी अक्सर चर्चा में रहते हैं. ऐसे ही 2016 बैच के IAS अधिकारी पुलकित गर्ग (IAS Pulkit Garg) इन दिनों सुर्खियों में हैं. उन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए अपनी तीन साल की बेटी सिया का दाखिला एक सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र में कराया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका यह कदम आम लोगों को सरकारी संस्थानों के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश देता है और इसी वजह से वह लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं.
पुलकित गर्ग ने अपनी बेटी सिया का एडमिशन कर्वी के नया बाजार क्षेत्र में स्थित एक सरकारी कम्पोजिट स्कूल से जुड़े आंगनवाड़ी केंद्र के प्लेग्रुप में कराया. खास बात यह रही कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया खुद स्कूल जाकर पूरी की. अधिकारियों के अनुसार, यह पहल सरकारी संस्थानों में नामांकन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है.
पुलकित गर्ग उत्तर प्रदेश कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में चित्रकूट के जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की हैं. इसके बाद वह यूपीएससी में 27वीं रैंक प्राप्त किए. वह अपने काम के प्रति समर्पण और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के लिए पहचाने जाते हैं. अपने करियर के दौरान उन्होंने बुलंदशहर में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट/कलेक्टर, बागपत में जॉइंट मजिस्ट्रेट, सिद्धार्थ नगर में चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर, झांसी में म्युनिसिपल कमिश्नर और वाराणसी डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं.
DM पुलकित गर्ग ने कहा कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं. सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधन और सुविधाएं लगातार बेहतर हुई हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब एक IAS अधिकारी अपने बच्चे को सरकारी संस्थान में पढ़ा सकता है, तो आम माता-पिता को भी संकोच नहीं करना चाहिए. पुलकित गर्ग ने ज़ोर देकर कहा कि बच्चे के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और संस्कार सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. आंगनवाड़ी केंद्र इन सभी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा कर रहे हैं. यहां बच्चों को सुरक्षित माहौल के साथ-साथ सीखने और सामाजिक विकास का अवसर मिलता है.
जिलाधिकारी ने माता-पिता, ग्रामीणों और अधिकारियों से अपील की कि वे सामाजिक धारणाओं से ऊपर उठकर सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर भरोसा करें. उन्होंने कहा कि पब्लिक एजुकेशन सिस्टम तभी मजबूत होगा जब लोग इसे अपनाएंगे और समर्थन देंगे. आंगनवाड़ी में दाखिले के बाद सिया को क्लासरूम गतिविधियों में खुशी से भाग लेते देखा गया है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह खिलौनों से खेलती, कविताओं पर नाचती और दूसरे बच्चों के साथ सीखते हुए नजर आ रही है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है.
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