Yusuf Pathan plot dispute: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान एक बार फिर वडोदरा के विवादित भूखंड को लेकर चर्चा में हैं. लंबे समय से नगर निगम की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुजरात सरकार की ओर से उन्हें राहत मिलने की खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूसुफ पठान को यह भूखंड उसकी अनुमानित कीमत का 50 फीसदी भुगतान करने पर आवंटित किया जा सकता है. जमीन की कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है, ऐसे में उन्हें लगभग 10 करोड़ रुपये चुकाने पड़ सकते हैं. हालांकि, आवंटन की शर्तों और छूट की अंतिम आधिकारिक पुष्टि को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है.
वडोदरा के भूखंड पर क्या है नया अपडेट?
यूसुफ पठान वडोदरा के रहने वाले हैं और शहर के तांदलजा इलाके में उनका घर है. उनके घर के पास स्थित नगर निगम के भूखंड को लेकर कई साल से विवाद चल रहा है. अब सामने आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गुजरात सरकार पूर्व क्रिकेटर को इस जमीन के आवंटन में राहत देने पर सहमत हो गई है. प्रस्ताव के मुताबिक, जमीन की कीमत का आधा हिस्सा पठान को देना पड़ सकता है, जबकि शेष राशि में छूट दी जा सकती है. इस संबंध में अंतिम शर्तों की आधिकारिक पुष्टि अहम होगी.
2012 में 99 साल की लीज पर मांगी थी जमीन
इस विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई थी. उस समय यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से अपने और अपने भाई इरफान पठान की सार्वजनिक पहचान तथा सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए भूखंड को 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी. नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी और जनरल बोर्ड ने इस जमीन को सीधे पठान को आवंटित करने का प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार के पास भेजा था. प्रस्ताव में सार्वजनिक नीलामी के बजाय सीधे आवंटन की बात थी. हालांकि, गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने जून 2014 में इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी.
जमीन पर कब्जे को लेकर भी उठा था विवाद
प्रस्ताव को राज्य सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद भूखंड पर यूसुफ पठान के कब्जे को लेकर विवाद खड़ा हो गया. आरोप है कि जमीन के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाई गई और वहां शेड सहित अन्य निर्माण भी किए गए. बाद में वडोदरा नगर निगम ने जमीन को अतिक्रमण बताते हुए इसे खाली करने के लिए नोटिस जारी किया. साल 2024 में नगर निगम की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया. इस मामले में अदालत ने सवाल उठाया था कि जब जमीन के आवंटन का कोई आधिकारिक आदेश नहीं हुआ और भुगतान भी नहीं किया गया, तो उस पर कब्जा किस आधार पर किया गया.
हाईकोर्ट से वापस ली थी अपील
यूसुफ पठान ने अदालत में दलील दी थी कि राज्य सरकार की एक नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को जमीन आवंटित की जा सकती है. दूसरी ओर, नगर निगम का पक्ष था कि संबंधित भूखंड उसकी संपत्ति है और उसे बिना सार्वजनिक नीलामी के किसी व्यक्ति को आवंटित नहीं किया जा सकता. 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान के वकील ने गुजरात हाईकोर्ट में उनकी अपील वापस लेने का अनुरोध किया. अदालत ने अपील को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया. इसके बाद जमीन के मामले को अदालत के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सुलझाने की संभावना पर चर्चा शुरू हुई.
क्या खिलाड़ियों को मिलने वाली नीति के तहत मिलेगी राहत?
यूसुफ पठान को भूखंड देने की संभावित मंजूरी को खिलाड़ियों के लिए बनी सरकारी नीति से जोड़कर देखा जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के आधार पर उन्हें जमीन की कीमत में 50 फीसदी तक की छूट मिल सकती है. हालांकि, इस मामले में अंतिम आवंटन, भुगतान की राशि और छूट की शर्तों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी. इस पूरे विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य के बताए जा रहे भूखंड के लिए यूसुफ पठान को वास्तव में कितनी राशि चुकानी होगी और आवंटन किन शर्तों पर किया जाएगा.