एक दंपत्ति (Couple) से उनके बेटे के फर्जी और डरावने वीडियो (Fake and scary video of son) के जरिए एक लाख रुपये की ठगी (Fraud of rupees one lakh) का मामला सामने आया है. साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) ने तकनीक का इस्तेमाल कर बेटे के अपहरण का जाल बुना जिसके बाद माता-पिता ने फिरौती (Extortion) दे दी.
दिल्ली साइबर क्राइम
1 Lakh Scam News: डिजिटल युग में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं, ऐसे में अपराधियों के नए और कई खतरनाक तरीके मासूम लोगों को लगातार अपना शिकार बनाते जा रहे हैं. ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां, एक दंपत्ति को उनके बेटे का खून से लथपथ वीडियो भेजकर पूरी तरह से डराने की कोशिश की गई. इतना ही नहीं, अपराधियों ने यह भी दावा करते हुए कहा कि उन्होंने उनके बेटे का अपहरण कर लिया है और उसकी जान खतरे में है. साथ ही अपराधियों ने जान बचाने के लिए फिरौती मांगने की कोशिश की है. तो वहीं, दूसरी तरफ अपने बच्चे को इस हालत में देखते ही माचा-पिता के होश उड़ गए. जिसके बाद उन्होंने बिना किसी देर के अपराधियों के खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. वे इस बात से अंजान की एक तरह के साइबर अपराध में पूरी तरह से फंस चुके हैं.
तो वहीं, दूसरी तरफ बाद में जब दंपत्ति ने अपने बेटे से संपर्क करने की कोशिश की, तो पता चला कि वह पूरी तरह से सुरक्षित था और उसे किसी ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था. दरअसल, वह वीडियो ‘डीपफेक’ (Deepfake) तकनीक या किसी अन्य एडिटिंग टूल का इस्तेमाल करके तैयार किया गया था ताकि माता-पिता को मानसिक रूप से परेशान किया जा सके. फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर से ऑनलाइन सुरक्षा और अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही ‘डिजिटल किडनैपिंग’ जैसी खतरनाक साजिशों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दरअसल, यह मामला ‘वर्चुअल किडनैपिंग’ (Virtual Kidnapping) का एक क्लासिक उदाहरण भी पेश करता है, जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति को वास्तव में अगवा नहीं करते हैं, बल्कि तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल करके ऐसा भ्रम पैदा करने की पूरी तरह से कोशिश करते हैं. इसके अलावा, साइबर ठग सोशल मीडिया से पीड़ित के परिवार की जानकारी निकालते हैं और फिर एआई (AI) टूल्स की मदद से फर्जी वीडियो या वॉयस क्लोनिंग का सहारा लेकर मासूम लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं. इस मामले में, बेटे का खून से लथपथ वीडियो इतना वास्तविक लग रहा था कि दंपत्ति के पास पुलिस से संपर्क करने या सच्चाई जानने का साहस ही नहीं बचा था जिसकी वजह से वह इस ठगी के जाल में बूरी तरह से फंस गए.
तो वहीं, अब इस मामले में विशेषज्ञों ने जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अपराधी पीड़ित को फोन काटने या फिर किसी और से बात करने का मौका नहीं देते ताकि वे तुरंत ही उनके जाल में आसानी से फंस जाएं. एक लाख रुपये की यह धोखाधड़ी सिर्फ वित्तीय नुकसान नहीं है, बल्कि यह उस गहरे मानसिक आघात को भी दर्शाती है जिससे वह परिवार गुजर रहा है. हालांकि, पुलिस अब उन खातों और आईपी एड्रेस की जांच करने में जुटी है कि जिनके जरिए यह ठगी अंजाम दी गई, लेकिन आम जनता के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है.
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